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इस मॉड्यूल के पाठ

विसर्ग और अनुस्वार — विशेष वर्ण

अनुमानित समय: 15 मिनट

विसर्ग (ः)

विसर्ग एक हल्की श्वास-ध्वनि है जो शब्द के अन्त में आती है। इसे दो बिन्दुओं (ः) से लिखा जाता है।

विसर्ग कहाँ आता है?

  1. प्रथमा विभक्ति पुल्लिंग शब्दों में — रामः, नरः, बालकः
  2. कुछ अव्ययों में — प्रातः (सवेरे), पुनः (फिर)
  3. सन्धि में — कभी-कभी स् का विसर्ग हो जाता है

उदाहरण

शब्दअर्थ
रामःराम (कर्ता)
नरःमनुष्य (कर्ता)
प्रातःसवेरे
पुनःफिर
यशःकीर्ति

अनुस्वार (ं)

अनुस्वार (ं) म् का स्थानापन्न है। जब म् के बाद कोई व्यञ्जन आता है, तो म् के स्थान पर अनुस्वार (ं) लिख सकते हैं:

मूलअनुस्वार रूपस्थिति
रामम् गच्छतिरामं गच्छतिम् + ग (व्यञ्जन)
सम् + गमसंगमम् + ग
सम् + स्कृतसंस्कृतम् + स
किम् + चित्किंचित्म् + च

नियम

  • म् + व्यञ्जन → अनुस्वार (ं) लिख सकते हैं
  • म् + स्वर → अनुस्वार नहीं लिखा जाता (राम + अस्ति = रामोऽस्ति, यहाँ सन्धि होती है)

चन्द्रबिन्दु (ँ)

चन्द्रबिन्दु (ँ) स्वर को अनुनासिक बनाता है। इसके उच्चारण में नाक से भी वायु निकलती है।

संस्कृत में चन्द्रबिन्दु का प्रयोग कम है, परन्तु हिन्दी में अधिक दिखता है (जैसे ‘हँसना’, ‘आँख’)।

मूल पाठ में प्रयोग

इन शब्दों में विसर्ग और अनुस्वार पहचानें:

रामः गृहं गच्छति। नरः संस्कृतं पठति।

शब्दविशेष वर्णविवरण
रामःविसर्ग (ः)प्रथमा विभक्ति, कर्ता
गृहम् / गृहंअनुस्वार (ं)म् + ग (व्यञ्जन)
नरःविसर्ग (ः)प्रथमा विभक्ति, कर्ता
संस्कृतम् / संस्कृतंअनुस्वार (ं)म् + प (व्यञ्जन)

याद रखें

  1. विसर्ग (ः) — हल्की श्वास-ध्वनि, शब्द के अन्त में (रामः, प्रातः)
  2. अनुस्वार (ं) — म् का स्थानापन्न, व्यञ्जन से पहले (गृहम् = गृहं)
  3. चन्द्रबिन्दु (ँ) — स्वर को अनुनासिक बनाता है
  4. गृहम् और गृहं — दोनों लेखन सही हैं, अर्थ एक ही है

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

विसर्ग (ः) का उच्चारण कैसे होता है?