नय् और आनय् — ले जाना और लाना
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नय् धातु — ले जाना
नय् धातु का अर्थ है ‘ले जाना’ (to carry/take):
| सर्वनाम | पुरुष | वर्तमान (लट्) | अर्थ | भविष्यत् (लृट्) | अर्थ |
|---|---|---|---|---|---|
| सः | प्रथम पुरुष | नयति | वह ले जाता है | नेष्यति | वह ले जाएगा |
| त्वम् | मध्यम पुरुष | नयसि | तू ले जाता है | नेष्यसि | तू ले जाएगा |
| अहम् | उत्तम पुरुष | नयामि | मैं ले जाता हूँ | नेष्यामि | मैं ले जाऊँगा |
ध्यान दें — भविष्यत् में नय् → नेष्य- हो जाता है (गम् → गमिष्य- की तरह)।
आनय् धातु — लाना
जैसे आ + गम् = आगम् (आना), वैसे ही आ + नय् = आनय् (लाना):
| सर्वनाम | पुरुष | वर्तमान (लट्) | अर्थ | भविष्यत् (लृट्) | अर्थ |
|---|---|---|---|---|---|
| सः | प्रथम पुरुष | आनयति | वह लाता है | आनेष्यति | वह लाएगा |
| त्वम् | मध्यम पुरुष | आनयसि | तू लाता है | आनेष्यसि | तू लाएगा |
| अहम् | उत्तम पुरुष | आनयामि | मैं लाता हूँ | आनेष्यामि | मैं लाऊँगा |
नये शब्द — वस्तुएँ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जलम् | जल / पानी |
| पुष्पम् | फूल |
| पुस्तकम् | पुस्तक |
| लेखनी | कलम |
| वस्त्रम् | कपड़ा |
| उत्तरीयम् | दुपट्टा |
| अपूपम् | पूड़ा |
| सूपम् | दाल |
| नवीनम् | नया |
| पुराणम् | पुराना |
| सर्वम् | सब |
अभ्यास वाक्य
अब तक सीखी सभी धातुओं (गम्, आगम्, भक्षय्, नय्, आनय्) का प्रयोग करें:
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः फलं नयति | वह फल ले जाता है |
| अहम् आम्रम् आनयामि | मैं आम लाता हूँ |
| त्वम् अन्नम् आनेष्यसि किम्? | तू अन्न लाएगा क्या? |
| अहं जलम् आनयामि | मैं जल लाता हूँ |
| त्वं पुष्पम् आनयसि | तू फूल लाता है |
| सः वस्त्रं तत्र नयति | वह कपड़ा वहाँ ले जाता है |
| सः सदा नगरं गच्छति पुस्तकं च आनयति | वह सदा नगर जाता है और पुस्तक लाता है |
| सः अद्य आगमिष्यति वस्त्रं च नेष्यति | वह आज आएगा और कपड़ा ले जाएगा |
| अहं गृहं गमिष्यामि सूपं च भक्षयिष्यामि | मैं घर जाऊँगा और दाल खाऊँगा |
विभक्ति परिचय
ऊपर के वाक्यों में फलम्, जलम्, पुस्तकम् जैसे शब्दों में -म् लगा है। यह द्वितीया विभक्ति (कर्म कारक) का चिह्न है — ‘को’ के अर्थ में।
संस्कृत में शब्द के रूप वाक्य में उसकी भूमिका बताते हैं। इसे विभक्ति कहते हैं। कुल 7 विभक्तियाँ + सम्बोधन होते हैं।
विभक्तियों का विस्तृत अध्ययन राम शब्द रूप पाठ में है — वहाँ सभी 7 विभक्तियों के रूप और उनके अर्थ विस्तार से दिए गए हैं।
मूल पाठ में प्रयोग
इन वाक्यों को पढ़ें — यहाँ केवल वही व्याकरण प्रयुक्त है जो अब तक सीखा है:
अहं नगरं गमिष्यामि पुस्तकं च आनेष्यामि। सः गृहम् अन्नं नेष्यति।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| अहम् | मैं | उत्तम पुरुष सर्वनाम |
| नगरम् | नगर को | द्वितीया विभक्ति |
| गमिष्यामि | (मैं) जाऊँगा | गम् धातु, लृट्, उत्तम पुरुष |
| पुस्तकम् | पुस्तक को | द्वितीया विभक्ति |
| च | और | समुच्चयबोधक अव्यय |
| आनेष्यामि | (मैं) लाऊँगा | आनय् धातु, लृट्, उत्तम पुरुष |
| सः | वह | प्रथम पुरुष सर्वनाम |
| गृहम् | घर को | द्वितीया विभक्ति |
| अन्नम् | अन्न को | द्वितीया विभक्ति |
| नेष्यति | (वह) ले जाएगा | नय् धातु, लृट्, प्रथम पुरुष |
अन्वय: अहम् नगरम् गमिष्यामि पुस्तकम् च आनेष्यामि। सः गृहम् अन्नम् नेष्यति।
अनुवाद: मैं नगर जाऊँगा और पुस्तक लाऊँगा। वह घर को अन्न ले जाएगा।
याद रखें
- नय् = ले जाना, आनय् = लाना — ‘आ’ उपसर्ग दिशा उलटता है
- भविष्यत् में नय् → नेष्य-, आनय् → आनेष्य-
- कर्म (जिसे ले जाएँ/लाएँ) में -म् प्रत्यय लगता है (द्वितीया विभक्ति)
- अब तक 5 धातुएँ: गम् (जाना), आगम् (आना), भक्षय् (खाना), नय् (ले जाना), आनय् (लाना)
अभ्यास
'नयति' और 'आनयति' में क्या अन्तर है?