यद् शब्द — जो (सम्बन्धवाचक)
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यद् शब्द — सम्बन्धवाचक सर्वनाम
यद् (जो / जिसने / जिसका) सम्बन्धवाचक सर्वनाम (relative pronoun) है। यह “who / which / that” के अर्थ में प्रयुक्त होता है और सदा तद् (correlative) के साथ जोड़ी बनाकर वाक्य में प्रयुक्त होता है।
सबसे महत्त्वपूर्ण: यद् के रूप तद् शब्द के समान हैं — ‘त’ के स्थान पर ‘य’ आता है। तद् जानते हैं तो यद् स्वतः आ जाएगा।
यद् शब्द — पुल्लिंग (Masculine)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | यः | यौ | ये |
| द्वितीया | यम् | यौ | यान् |
| तृतीया | येन | याभ्याम् | यैः |
| चतुर्थी | यस्मै | याभ्याम् | येभ्यः |
| पञ्चमी | यस्मात् | याभ्याम् | येभ्यः |
| षष्ठी | यस्य | ययोः | येषाम् |
| सप्तमी | यस्मिन् | ययोः | येषु |
यद् शब्द — स्त्रीलिंग (Feminine)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | या | ये | याः |
| द्वितीया | याम् | ये | याः |
| तृतीया | यया | याभ्याम् | याभिः |
| चतुर्थी | यस्यै | याभ्याम् | याभ्यः |
| पञ्चमी | यस्याः | याभ्याम् | याभ्यः |
| षष्ठी | यस्याः | ययोः | यासाम् |
| सप्तमी | यस्याम् | ययोः | यासु |
यद् शब्द — नपुंसकलिंग (Neuter)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | यत् | ये | यानि |
| द्वितीया | यत् | ये | यानि |
| तृतीया | येन | याभ्याम् | यैः |
| चतुर्थी | यस्मै | याभ्याम् | येभ्यः |
| पञ्चमी | यस्मात् | याभ्याम् | येभ्यः |
| षष्ठी | यस्य | ययोः | येषाम् |
| सप्तमी | यस्मिन् | ययोः | येषु |
तद्, किम्, यद् — तीनों की तुलना (पुल्लिंग एकवचन)
| विभक्ति | तद् (वह) | किम् (कौन) | यद् (जो) |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सः | कः | यः |
| द्वितीया | तम् | कम् | यम् |
| तृतीया | तेन | केन | येन |
| चतुर्थी | तस्मै | कस्मै | यस्मै |
| पञ्चमी | तस्मात् | कस्मात् | यस्मात् |
| षष्ठी | तस्य | कस्य | यस्य |
| सप्तमी | तस्मिन् | कस्मिन् | यस्मिन् |
तीनों सर्वनाम एक ही ढाँचे में चलते हैं। केवल आरम्भिक वर्ण बदलता है: त/स → क → य
यद्-तद् वाक्य-रचना (Relative-Correlative Construction)
संस्कृत में relative clause बनाने का सूत्र:
यद् (जो) … तद् (वह)
| यद् वाक्य | तद् वाक्य | अर्थ |
|---|---|---|
| यः नरः पठति | सः विद्वान् भवति | जो व्यक्ति पढ़ता है, वह विद्वान होता है |
| या नदी वहति | सा गङ्गा अस्ति | जो नदी बहती है, वह गंगा है |
| यत् फलम् पक्वम् | तत् मधुरम् भवति | जो फल पका हुआ है, वह मीठा होता है |
| यम् पश्यसि | तम् वद | जिसे देखो, उसे बोलो |
| यस्य गृहम् अत्र | तस्य नाम रामः | जिसका घर यहाँ है, उसका नाम राम है |
| यस्मिन् ग्रामे वसति | तस्मिन् सुखम् अस्ति | जिस गाँव में रहता है, उसमें सुख है |
प्रसिद्ध सूक्तियाँ
- यत् भावो तत् भवति। — जैसा भाव, वैसा होता है।
- यः करोति सः भुङ्क्ते। — जो करता है वह भोगता है।
- यत्र धर्मः तत्र जयः। — जहाँ धर्म है वहाँ विजय है। (यत्र-तत्र = जहाँ-वहाँ)
याद रखें
- यद् = तद् में ‘त’→‘य’ — बस इतना ही सूत्र
- प्रथमा एकवचन: यः (पुं), या (स्त्री), यत् (नपुं)
- सदा तद् के साथ जोड़ी में प्रयोग: यः…सः, या…सा, यत्…तत्
- यद्-तद् रचना संस्कृत साहित्य में अत्यन्त प्रचलित है — इसे भली प्रकार सीखें
अभ्यास
प्रश्न 1 / 80 सही
यद् शब्द पुल्लिंग प्रथमा एकवचन का रूप क्या है?