संयुक्त वाक्य — 'च', 'वा', 'किन्तु'
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समुच्चयबोधक अव्यय
समुच्चयबोधक (conjunctions) वे अव्यय हैं जो दो शब्दों, वाक्यांशों, या वाक्यों को जोड़ते हैं। संस्कृत के प्रमुख समुच्चयबोधक:
| शब्द | अर्थ | प्रकार |
|---|---|---|
| च | और (and) | योजक |
| वा | या (or) | विकल्पक |
| किन्तु / परन्तु | लेकिन (but) | व्यतिरेकक |
| अतः / तस्मात् | इसलिए (therefore) | कारणसूचक |
| यतः | क्योंकि (because) | कारणसूचक |
च — और (And)
च = और। यह संस्कृत का सबसे प्रचलित समुच्चयबोधक है।
विशेष नियम — ‘च’ postpositive है
च हिन्दी के ‘और’ की तरह बीच में नहीं आता। यह जिस शब्द/वाक्यांश को जोड़ना है उसके बाद आता है:
| हिन्दी | संस्कृत | ध्यान दें |
|---|---|---|
| राम और कृष्ण | रामः कृष्णः च | ’च’ कृष्ण के बाद |
| फल और जल | फलम् जलम् च | ’च’ जल के बाद |
दो शब्दों को जोड़ना
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| रामः कृष्णः च गच्छतः | राम और कृष्ण जाते हैं |
| फलं जलं च अस्ति | फल और जल है |
| बालकः बालिका च पठतः | बालक और बालिका पढ़ते हैं |
| अत्र तत्र च | यहाँ और वहाँ |
| प्रातः सायं च | सवेरे और शाम को |
ध्यान दें — जब दो कर्ता ‘च’ से जुड़ते हैं, तो क्रिया द्विवचन में होती है (गच्छतः, पठतः)।
दो वाक्यांशों को जोड़ना
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः प्रातः गच्छति सायं च आगच्छति | वह सवेरे जाता है और शाम को आता है |
| अहं पठामि त्वं च लिखसि | मैं पढ़ता हूँ और तू लिखता है |
| सः फलं भक्षयति जलं च पिबति | वह फल खाता है और जल पीता है |
एक से अधिक ‘च’
तीन या अधिक शब्द जोड़ने हों तो प्रत्येक के बाद च लगा सकते हैं, या केवल अन्तिम के बाद:
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| रामः कृष्णः अर्जुनः च | राम, कृष्ण, और अर्जुन |
| रामः च कृष्णः च अर्जुनः च | राम और कृष्ण और अर्जुन |
वा — या (Or)
वा = या (or)। यह भी postpositive है — दूसरे विकल्प के बाद आता है:
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| गच्छसि वा तिष्ठसि? | तू जाता है या ठहरता है? |
| फलं वा मोदकं वा? | फल या लड्डू? |
| अद्य वा श्वः? | आज या कल? |
| सः आगमिष्यति वा न? | वह आएगा या नहीं? |
किन्तु / परन्तु — लेकिन (But)
किन्तु और परन्तु = लेकिन / परन्तु (but)। ये दो वाक्यांशों के बीच में आते हैं (हिन्दी ‘लेकिन’ की तरह):
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः धनवान् अस्ति किन्तु सुखी न अस्ति | वह धनवान है लेकिन सुखी नहीं है |
| सः पठति परन्तु न जानाति | वह पढ़ता है परन्तु नहीं जानता |
| अहं गमिष्यामि किन्तु त्वं तिष्ठ | मैं जाऊँगा लेकिन तू ठहर |
| वनम् सुन्दरम् अस्ति किन्तु दुर्गमम् | वन सुन्दर है लेकिन दुर्गम है |
अतः / तस्मात् — इसलिए (Therefore)
अतः और तस्मात् = इसलिए / अतएव (therefore)। ये कार्य-वाक्य के आरम्भ में आते हैं:
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः पठति अतः जानाति | वह पढ़ता है इसलिए जानता है |
| वर्षा अस्ति तस्मात् सः न गच्छति | वर्षा है इसलिए वह नहीं जाता |
| विद्या सुलभा अस्ति अतः पठ | विद्या सुलभ है इसलिए पढ़ |
यतः — क्योंकि (Because)
यतः = क्योंकि (because)। प्रायः यतः…अतः युग्म में प्रयुक्त:
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| यतः सः पठति अतः जानाति | क्योंकि वह पढ़ता है इसलिए जानता है |
| यतः वर्षा अस्ति अतः न गच्छामि | क्योंकि वर्षा है इसलिए मैं नहीं जाता |
| यतः आचार्यः आगच्छति अतः सर्वे पठन्ति | क्योंकि आचार्य आता है इसलिए सब पढ़ते हैं |
सारणी — postpositive बनाम मध्यवर्ती
| शब्द | स्थान | उदाहरण |
|---|---|---|
| च | जोड़े जाने वाले शब्द के बाद | रामः कृष्णः च |
| वा | दूसरे विकल्प के बाद | गच्छसि वा तिष्ठसि |
| किन्तु | दो वाक्यांशों के बीच | पठति किन्तु न जानाति |
| अतः | कार्य-वाक्य के आरम्भ | अतः गच्छति |
| यतः | कारण-वाक्य के आरम्भ | यतः वर्षा अस्ति |
मूल पाठ में प्रयोग
बालकः प्रातः पाठशालां गच्छति सम्यक् पठति च। सायम् आगच्छति किन्तु क्रीडितुं न गच्छति। यतः श्रान्तः अस्ति अतः गृहे तिष्ठति।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| बालकः | बालक | पुल्लिंग, प्रथमा |
| प्रातः | सवेरे | काल-वाचक अव्यय |
| पाठशालाम् | पाठशाला को | स्त्रीलिंग, द्वितीया |
| गच्छति | जाता है | गम् धातु, लट्, प्र. पु. |
| सम्यक् | अच्छी तरह | क्रियाविशेषण |
| पठति | पढ़ता है | पठ् धातु, लट्, प्र. पु. |
| च | और | समुच्चयबोधक अव्यय |
| सायम् | शाम को | काल-वाचक अव्यय |
| आगच्छति | आता है | आगम् धातु, लट्, प्र. पु. |
| किन्तु | लेकिन | व्यतिरेकक अव्यय |
| क्रीडितुम् | खेलने के लिए | तुमुन् प्रत्ययान्त |
| यतः | क्योंकि | कारणसूचक अव्यय |
| श्रान्तः | थका हुआ | विशेषण, पुल्लिंग |
| अतः | इसलिए | कारणसूचक अव्यय |
| गृहे | घर में | सप्तमी विभक्ति |
| तिष्ठति | ठहरता है | स्था धातु, लट्, प्र. पु. |
अन्वय: बालकः प्रातः पाठशालाम् गच्छति सम्यक् पठति च। सायम् आगच्छति किन्तु क्रीडितुम् न गच्छति। यतः श्रान्तः अस्ति अतः गृहे तिष्ठति।
अनुवाद: बालक सवेरे पाठशाला जाता है और अच्छी तरह पढ़ता है। शाम को आता है लेकिन खेलने नहीं जाता। क्योंकि थका हुआ है इसलिए घर में ठहरता है।
याद रखें
- च = और — postpositive: जोड़े जाने वाले शब्द के बाद आता है
- वा = या — postpositive: दूसरे विकल्प के बाद आता है
- किन्तु / परन्तु = लेकिन — दो विरोधी वाक्यांशों के बीच
- यतः…अतः = क्योंकि…इसलिए — कारण-कार्य सम्बन्ध
- ‘च’ से दो कर्ता जुड़ें तो क्रिया द्विवचन में होती है
श्लोक अभ्यास
विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्। पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| विद्या | ज्ञान | स्त्रीलिंग, प्रथमा, एकवचन |
| ददाति | देती है | दा धातु, लट्, प्रथम पुरुष, एकवचन |
| विनयम् | विनम्रता को | पुल्लिंग, द्वितीया, एकवचन |
| पात्रताम् | योग्यता को | स्त्रीलिंग, द्वितीया, एकवचन |
इस श्लोक में च (और) का भाव निहित है — विद्या → विनय → पात्रता → धन → धर्म → सुख। यह शृंखला संयुक्त वाक्य रचना का सुन्दर उदाहरण है।
अभ्यास
'रामः गच्छति कृष्णः च गच्छति' में 'च' का अर्थ क्या है?