मुख्य सामग्री पर जाएँ
इस मॉड्यूल के पाठ

संयुक्त वाक्य — 'च', 'वा', 'किन्तु'

अनुमानित समय: 15 मिनट

समुच्चयबोधक अव्यय

समुच्चयबोधक (conjunctions) वे अव्यय हैं जो दो शब्दों, वाक्यांशों, या वाक्यों को जोड़ते हैं। संस्कृत के प्रमुख समुच्चयबोधक:

शब्दअर्थप्रकार
और (and)योजक
वाया (or)विकल्पक
किन्तु / परन्तुलेकिन (but)व्यतिरेकक
अतः / तस्मात्इसलिए (therefore)कारणसूचक
यतःक्योंकि (because)कारणसूचक

च — और (And)

= और। यह संस्कृत का सबसे प्रचलित समुच्चयबोधक है।

विशेष नियम — ‘च’ postpositive है

हिन्दी के ‘और’ की तरह बीच में नहीं आता। यह जिस शब्द/वाक्यांश को जोड़ना है उसके बाद आता है:

हिन्दीसंस्कृतध्यान दें
राम और कृष्णरामः कृष्णः ’च’ कृष्ण के बाद
फल और जलफलम् जलम् ’च’ जल के बाद

दो शब्दों को जोड़ना

संस्कृतअर्थ
रामः कृष्णः च गच्छतःराम और कृष्ण जाते हैं
फलं जलं च अस्तिफल और जल है
बालकः बालिका च पठतःबालक और बालिका पढ़ते हैं
अत्र तत्र चयहाँ और वहाँ
प्रातः सायं चसवेरे और शाम को

ध्यान दें — जब दो कर्ता ‘च’ से जुड़ते हैं, तो क्रिया द्विवचन में होती है (गच्छतः, पठतः)।

दो वाक्यांशों को जोड़ना

संस्कृतअर्थ
सः प्रातः गच्छति सायं च आगच्छतिवह सवेरे जाता है और शाम को आता है
अहं पठामि त्वं च लिखसिमैं पढ़ता हूँ और तू लिखता है
सः फलं भक्षयति जलं च पिबतिवह फल खाता है और जल पीता है

एक से अधिक ‘च’

तीन या अधिक शब्द जोड़ने हों तो प्रत्येक के बाद लगा सकते हैं, या केवल अन्तिम के बाद:

संस्कृतअर्थ
रामः कृष्णः अर्जुनः चराम, कृष्ण, और अर्जुन
रामः च कृष्णः च अर्जुनः चराम और कृष्ण और अर्जुन

वा — या (Or)

वा = या (or)। यह भी postpositive है — दूसरे विकल्प के बाद आता है:

संस्कृतअर्थ
गच्छसि वा तिष्ठसि?तू जाता है या ठहरता है?
फलं वा मोदकं वा?फल या लड्डू?
अद्य वा श्वः?आज या कल?
सः आगमिष्यति वा न?वह आएगा या नहीं?

किन्तु / परन्तु — लेकिन (But)

किन्तु और परन्तु = लेकिन / परन्तु (but)। ये दो वाक्यांशों के बीच में आते हैं (हिन्दी ‘लेकिन’ की तरह):

संस्कृतअर्थ
सः धनवान् अस्ति किन्तु सुखी न अस्तिवह धनवान है लेकिन सुखी नहीं है
सः पठति परन्तु न जानातिवह पढ़ता है परन्तु नहीं जानता
अहं गमिष्यामि किन्तु त्वं तिष्ठमैं जाऊँगा लेकिन तू ठहर
वनम् सुन्दरम् अस्ति किन्तु दुर्गमम्वन सुन्दर है लेकिन दुर्गम है

अतः / तस्मात् — इसलिए (Therefore)

अतः और तस्मात् = इसलिए / अतएव (therefore)। ये कार्य-वाक्य के आरम्भ में आते हैं:

संस्कृतअर्थ
सः पठति अतः जानातिवह पढ़ता है इसलिए जानता है
वर्षा अस्ति तस्मात् सः न गच्छतिवर्षा है इसलिए वह नहीं जाता
विद्या सुलभा अस्ति अतः पठविद्या सुलभ है इसलिए पढ़

यतः — क्योंकि (Because)

यतः = क्योंकि (because)। प्रायः यतः…अतः युग्म में प्रयुक्त:

संस्कृतअर्थ
यतः सः पठति अतः जानातिक्योंकि वह पढ़ता है इसलिए जानता है
यतः वर्षा अस्ति अतः न गच्छामिक्योंकि वर्षा है इसलिए मैं नहीं जाता
यतः आचार्यः आगच्छति अतः सर्वे पठन्तिक्योंकि आचार्य आता है इसलिए सब पढ़ते हैं

सारणी — postpositive बनाम मध्यवर्ती

शब्दस्थानउदाहरण
जोड़े जाने वाले शब्द के बादरामः कृष्णः
वादूसरे विकल्प के बादगच्छसि वा तिष्ठसि
किन्तुदो वाक्यांशों के बीचपठति किन्तु न जानाति
अतःकार्य-वाक्य के आरम्भअतः गच्छति
यतःकारण-वाक्य के आरम्भयतः वर्षा अस्ति

मूल पाठ में प्रयोग

बालकः प्रातः पाठशालां गच्छति सम्यक् पठति च। सायम् आगच्छति किन्तु क्रीडितुं न गच्छति। यतः श्रान्तः अस्ति अतः गृहे तिष्ठति।

शब्दअर्थव्याकरण
बालकःबालकपुल्लिंग, प्रथमा
प्रातःसवेरेकाल-वाचक अव्यय
पाठशालाम्पाठशाला कोस्त्रीलिंग, द्वितीया
गच्छतिजाता हैगम् धातु, लट्, प्र. पु.
सम्यक्अच्छी तरहक्रियाविशेषण
पठतिपढ़ता हैपठ् धातु, लट्, प्र. पु.
औरसमुच्चयबोधक अव्यय
सायम्शाम कोकाल-वाचक अव्यय
आगच्छतिआता हैआगम् धातु, लट्, प्र. पु.
किन्तुलेकिनव्यतिरेकक अव्यय
क्रीडितुम्खेलने के लिएतुमुन् प्रत्ययान्त
यतःक्योंकिकारणसूचक अव्यय
श्रान्तःथका हुआविशेषण, पुल्लिंग
अतःइसलिएकारणसूचक अव्यय
गृहेघर मेंसप्तमी विभक्ति
तिष्ठतिठहरता हैस्था धातु, लट्, प्र. पु.

अन्वय: बालकः प्रातः पाठशालाम् गच्छति सम्यक् पठति च। सायम् आगच्छति किन्तु क्रीडितुम् न गच्छति। यतः श्रान्तः अस्ति अतः गृहे तिष्ठति।

अनुवाद: बालक सवेरे पाठशाला जाता है और अच्छी तरह पढ़ता है। शाम को आता है लेकिन खेलने नहीं जाता। क्योंकि थका हुआ है इसलिए घर में ठहरता है।

याद रखें

  1. = और — postpositive: जोड़े जाने वाले शब्द के बाद आता है
  2. वा = या — postpositive: दूसरे विकल्प के बाद आता है
  3. किन्तु / परन्तु = लेकिन — दो विरोधी वाक्यांशों के बीच
  4. यतः…अतः = क्योंकि…इसलिए — कारण-कार्य सम्बन्ध
  5. ‘च’ से दो कर्ता जुड़ें तो क्रिया द्विवचन में होती है

श्लोक अभ्यास

विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्। पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥

शब्दअर्थव्याकरण
विद्याज्ञानस्त्रीलिंग, प्रथमा, एकवचन
ददातिदेती हैदा धातु, लट्, प्रथम पुरुष, एकवचन
विनयम्विनम्रता कोपुल्लिंग, द्वितीया, एकवचन
पात्रताम्योग्यता कोस्त्रीलिंग, द्वितीया, एकवचन

इस श्लोक में (और) का भाव निहित है — विद्या → विनय → पात्रता → धन → धर्म → सुख। यह शृंखला संयुक्त वाक्य रचना का सुन्दर उदाहरण है।

अभ्यास

प्रश्न 1 / 80 सही

'रामः गच्छति कृष्णः च गच्छति' में 'च' का अर्थ क्या है?