भ्वादि गण — लङ् लकार (भूतकाल)
अनुमानित समय: 20 मिनट
लङ् लकार — भूत काल
पिछले पाठों में हमने लट् लकार (वर्तमान) और लृट् लकार (भविष्यत्) सीखा। अब लङ् लकार — भूत काल (past tense) सीखें।
लङ् लकार कैसे बनता है?
लङ् लकार की दो विशेषताएँ हैं:
- ‘अ’ आगम — धातु के अंश से पहले ‘अ’ जुड़ता है
- प्रत्यय बदलते हैं — लट् के प्रत्ययों से थोड़ा भिन्न
संरचना: अ + धातु अंश + लङ् प्रत्यय
लङ् लकार प्रत्यय सारणी
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | -त् | -ताम् | -न् |
| मध्यम पुरुष | -ः | -तम् | -त |
| उत्तम पुरुष | -म् | -व | -म |
लट् के प्रत्ययों से तुलना करें: -ति → -त्, -तः → -ताम्, -न्ति → -न्, -सि → -ः, -मि → -म्।
गम् धातु — लङ् लकार (9 रूप)
गम् → अंश: गच्छ- (लट् की तरह) → ‘अ’ जोड़ें → अगच्छ-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष (वह/वे) | अगच्छत् | अगच्छताम् | अगच्छन् |
| मध्यम पुरुष (तू/तुम) | अगच्छः | अगच्छतम् | अगच्छत |
| उत्तम पुरुष (मैं/हम) | अगच्छम् | अगच्छाव | अगच्छाम |
पठ् धातु — लङ् लकार
पठ् → अंश: पठ- → ‘अ’ जोड़ें → अपठ-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अपठत् | अपठताम् | अपठन् |
| मध्यम पुरुष | अपठः | अपठतम् | अपठत |
| उत्तम पुरुष | अपठम् | अपठाव | अपठाम |
भू धातु — लङ् लकार
भू → अंश: भव- → ‘अ’ जोड़ें → अभव-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अभवत् | अभवताम् | अभवन् |
| मध्यम पुरुष | अभवः | अभवतम् | अभवत |
| उत्तम पुरुष | अभवम् | अभवाव | अभवाम |
’अ’ आगम (augment) का नियम
लङ् लकार की पहचान ‘अ’ आगम है जो धातु अंश से पहले जुड़ता है:
| धातु | लट् (वर्तमान) | लङ् (भूत) |
|---|---|---|
| गम् | गच्छति | अगच्छत् |
| पठ् | पठति | अपठत् |
| भू | भवति | अभवत् |
यदि धातु अंश स्वर से शुरू हो, तो ‘अ’ आगम उस स्वर में मिल जाता है (वृद्धि सन्धि)।
लट् बनाम लङ् — तुलना
| पुरुष + वचन | गम् (लट्) | गम् (लङ्) |
|---|---|---|
| प्र.पु.ए. | गच्छति | अगच्छत् |
| प्र.पु.द्वि. | गच्छतः | अगच्छताम् |
| प्र.पु.ब. | गच्छन्ति | अगच्छन् |
| म.पु.ए. | गच्छसि | अगच्छः |
| म.पु.द्वि. | गच्छथः | अगच्छतम् |
| म.पु.ब. | गच्छथ | अगच्छत |
| उ.पु.ए. | गच्छामि | अगच्छम् |
| उ.पु.द्वि. | गच्छावः | अगच्छाव |
| उ.पु.ब. | गच्छामः | अगच्छाम |
दो बदलाव: (1) आरम्भ में ‘अ’ जुड़ता है, (2) अन्तिम प्रत्यय बदलते हैं।
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| बालकः ह्यः अपठत् | लड़के ने कल पढ़ा |
| बालकौ ह्यः अपठताम् | दो लड़कों ने कल पढ़ा |
| बालकाः ह्यः अपठन् | सब लड़कों ने कल पढ़ा |
| अहं ह्यः विद्यालयम् अगच्छम् | मैं कल विद्यालय गया |
| त्वं कुत्र अगच्छः? | तू कहाँ गया? |
मूल पाठ में प्रयोग
ह्यः बालकः विद्यालयम् अगच्छत्। तत्र सः संस्कृतम् अपठत्। सायं सः गृहम् आगच्छत्।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| ह्यः | कल (बीता हुआ) | काल-वाचक अव्यय |
| बालकः | लड़का | प्रथमा एकवचन |
| अगच्छत् | (वह) गया | गम् धातु, लङ्, प्र.पु.ए. |
| अपठत् | (उसने) पढ़ा | पठ् धातु, लङ्, प्र.पु.ए. |
| आगच्छत् | (वह) आया | आगम् धातु, लङ्, प्र.पु.ए. |
अनुवाद: कल लड़का विद्यालय गया। वहाँ उसने संस्कृत पढ़ा। शाम को वह घर आया।
याद रखें
- लङ् लकार = भूत काल। अ + धातु अंश + लङ् प्रत्यय
- ‘अ’ आगम लङ् की प्रमुख पहचान है — यह धातु से पहले जुड़ता है
- प्रत्यय: -त्/-ताम्/-न् (प्र.पु.), -ः/-तम्/-त (म.पु.), -म्/-व/-म (उ.पु.)
- धातु अंश (गच्छ-, पठ-, भव-) लट् लकार जैसा ही रहता है — केवल आगम और प्रत्यय बदलते हैं
संवाद अभ्यास
गुरुः — ह्यः त्वं किम् अकरोः? शिष्यः — अहं ह्यः अपठम्। गुरुः — किं रामः अपि अपठत्? शिष्यः — आम्, रामः अपि अपठत्। गुरुः — बालकाः कुत्र अगच्छन्? शिष्यः — बालकाः विद्यालयम् अगच्छन्। गुरुः — किं सीता ह्यः न अपठत्? शिष्यः — न, सीता अपि अपठत्।
अभ्यास
लङ् लकार किस काल को दर्शाता है?