समुच्चयबोधक अव्यय — च, वा, अपि, तु
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समुच्चयबोधक अव्यय क्या हैं?
समुच्चयबोधक अव्यय वे शब्द हैं जो दो या अधिक शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ते हैं — जैसे हिन्दी में ‘और’, ‘या’, ‘भी’, ‘परन्तु’।
संस्कृत के प्रमुख समुच्चयबोधक अव्यय: च, वा, अपि, तु, किन्तु, परन्तु, अथवा, यद्यपि, तथापि
1. च (और / and)
‘च’ संस्कृत का सबसे प्रचलित समुच्चयबोधक है। इसका अर्थ है ‘और’।
महत्त्वपूर्ण नियम: ‘च’ शब्द के बाद आता है
हिन्दी/अंग्रेजी में ‘और/and’ बीच में आता है, परन्तु संस्कृत में ‘च’ अन्तिम शब्द के बाद आता है:
| हिन्दी | संस्कृत |
|---|---|
| राम और कृष्ण | रामः कृष्णः च |
| फल और पुष्प | फलम् पुष्पम् च |
| सीता और गीता | सीता गीता च |
दो से अधिक शब्दों को जोड़ना
जब तीन या अधिक शब्दों को जोड़ना हो:
| हिन्दी | संस्कृत |
|---|---|
| राम, सीता और लक्ष्मण | रामः सीता लक्ष्मणः च |
| फल, पुष्प और जल | फलम् पुष्पम् जलम् च |
कभी-कभी प्रत्येक शब्द के बाद ‘च’ भी आ सकता है (विशेषतः काव्य में):
रामः च सीता च लक्ष्मणः च वनं गच्छन्ति।
वाक्य उदाहरण
रामः गच्छति सीता च गच्छति। राम जाता है और सीता भी जाती है।
बालकः पठति लिखति च। बालक पढ़ता है और लिखता है।
2. वा (या / or)
‘वा’ का अर्थ है ‘या/अथवा’ (or)। यह प्रत्येक विकल्प के बाद आता है:
| हिन्दी | संस्कृत |
|---|---|
| फल या पुष्प | फलम् वा पुष्पम् वा |
| राम या कृष्ण | रामः वा कृष्णः वा |
वाक्य उदाहरण
चायं वा दुग्धं वा पिबतु। चाय या दूध पीजिए।
अद्य वा श्वः वा आगमिष्यति। आज या कल आएगा।
3. अपि (भी / also, even)
‘अपि’ का अर्थ है ‘भी’ (also) या ‘भी’ (even)। यह जिस शब्द पर बल देना हो उसके बाद आता है:
सः अपि आगच्छति। = वह भी आता है। अहम् अपि गमिष्यामि। = मैं भी जाऊँगा।
‘अपि’ प्रश्नवाचक के रूप में
‘अपि’ वाक्य के आरम्भ में आकर प्रश्न भी बना सकता है (क्या…?):
अपि कुशलम्? = क्या कुशल है? (Are you well?)
4. तु / किन्तु / परन्तु (परन्तु / but)
ये तीनों विरोधार्थक अव्यय हैं — ‘लेकिन/परन्तु’:
| अव्यय | प्रयोग |
|---|---|
| तु | लघु, प्रचलित |
| किन्तु | मध्यम |
| परन्तु | दृढ़ विरोध |
सः धनवान् अस्ति, तु सुखी नास्ति। वह धनवान है, परन्तु सुखी नहीं है।
विद्या ददाति विनयम्, किन्तु धनं ददाति मदम्। विद्या विनय देती है, किन्तु धन मद (घमण्ड) देता है।
5. अथवा (या / or — पर्यायवाची)
‘अथवा’ = ‘वा’ का पर्यायवाची, गद्य में अधिक प्रचलित:
गृहे अथवा विद्यालये पठतु। घर में अथवा विद्यालय में पढ़ो।
6. यद्यपि…तथापि (यद्यपि…तो भी)
यह एक महत्त्वपूर्ण जोड़ा है — ‘although…nevertheless’:
यद्यपि सः बालकः तथापि बुद्धिमान्। यद्यपि वह बालक है तो भी बुद्धिमान है।
‘च’ के विशेष प्रयोग
’च’ कभी वाक्य के आरम्भ में नहीं
यह हिन्दी/अंग्रेजी से महत्त्वपूर्ण भेद है:
| गलत | सही |
|---|---|
| रामः च गच्छति | |
| सः च पठति |
’च’ = ‘भी’ (sometimes)
कभी-कभी ‘च’ का अर्थ ‘भी’ भी होता है:
त्वं च जानासि। = तुम भी जानते हो।
अभ्यास — अनुवाद करें
| हिन्दी | संस्कृत |
|---|---|
| राम और सीता जाते हैं | रामः सीता च गच्छतः |
| दूध या जल पीओ | दुग्धं वा जलं वा पिब |
| वह भी आता है | सः अपि आगच्छति |
| वह जाता है परन्तु नहीं बोलता | सः गच्छति तु न वदति |
याद रखें
- च = और — सदा शब्द के बाद (अन्त में) आता है, कभी आरम्भ में नहीं
- वा = या — प्रत्येक विकल्प के बाद: फलं वा पुष्पं वा
- अपि = भी — शब्द के बाद; वाक्यारम्भ में = प्रश्नवाचक (अपि कुशलम्?)
- तु/किन्तु/परन्तु = परन्तु/लेकिन
- यद्यपि…तथापि = यद्यपि…तो भी (although…nevertheless)
अभ्यास
'रामः कृष्णः च' का सही अनुवाद क्या है?