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चतुर्थी विभक्ति — सम्प्रदान कारक

अनुमानित समय: 18 मिनट

चतुर्थी विभक्ति — सम्प्रदान कारक

चतुर्थी विभक्ति वाक्य में सम्प्रदान कारक प्रकट करती है। सम्प्रदान = जिसे कुछ दिया जाए, जिसके लिए क्रिया की जाए।

कुञ्जी: सम्प्रदान = “किसके लिए? किसे देता है?” का उत्तर

चतुर्थी विभक्ति के चिह्न

शब्द प्रकारएकवचनद्विवचनबहुवचन
पुं. अकारान्त (राम)रामायरामाभ्याम्रामेभ्यः
पुं. उकारान्त (गुरु)गुरवेगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
स्त्री. आकारान्त (लता)लतायैलताभ्याम्लताभ्यः
स्त्री. ईकारान्त (नदी)नद्यैनदीभ्याम्नदीभ्यः
नपुं. अकारान्त (फल)फलायफलाभ्याम्फलेभ्यः

ध्यान दें: द्विवचन में चतुर्थी = तृतीया = पञ्चमी (-भ्याम्)। बहुवचन में चतुर्थी = पञ्चमी (-भ्यः/-एभ्यः)।

चतुर्थी विभक्ति के प्रयोग

1. ‘दा’ (देना) धातु — सम्प्रदान

सबसे मूलभूत प्रयोग — जिसे कुछ दिया जाए:

वाक्यसम्प्रदानअर्थ
माता बालकाय फलम् ददातिबालकायबालक के लिए फल देती है
गुरुः शिष्याय ज्ञानम् ददातिशिष्यायशिष्य को ज्ञान देता है
राजा विप्राय धनम् ददातिविप्रायब्राह्मण को धन देता है

2. ‘नमः’ (नमस्कार) के साथ

‘नमः’ शब्द के साथ सदा चतुर्थी:

वाक्यअर्थ
गुरवे नमःगुरु को नमस्कार
शिवाय नमःशिव को नमस्कार
विष्णवे नमःविष्णु को नमस्कार
सरस्वत्यै नमःसरस्वती को नमस्कार

3. ‘स्वस्ति’ (कल्याण), ‘स्वाहा’, ‘वषट्’ के साथ

यज्ञ और मङ्गल वाक्यों में:

वाक्यअर्थ
प्रजाभ्यः स्वस्तिप्रजा का कल्याण हो
अग्नये स्वाहाअग्नि के लिए (आहुति)
इन्द्राय वषट्इन्द्र के लिए (आहुति)

4. ‘रुच्’ (अच्छा लगना), ‘क्रुध्’ (क्रोध), ‘स्पृह्’ (इच्छा) धातुओं के साथ

कुछ विशेष धातुओं के साथ चतुर्थी:

वाक्यधातुअर्थ
बालकाय मोदकम् रोचतेरुच्बालक को मोदक अच्छा लगता है
रामाय कुप्यतिक्रुध्राम पर क्रोध करता है
धनाय स्पृहयतिस्पृह्धन की इच्छा करता है

5. उद्देश्य (Purpose)

जिस उद्देश्य से क्रिया की जाए:

वाक्यअर्थ
मोक्षाय तपस्यतिमोक्ष के लिए तपस्या करता है
धर्माय यततेधर्म के लिए प्रयत्न करता है
सुखाय कर्म करोतिसुख के लिए कर्म करता है

सम्प्रदान बनाम कर्म — अन्तर

कर्म (द्वितीया)सम्प्रदान (चतुर्थी)
प्रश्नक्या/किसे?किसके लिए?
भूमिकाजिस पर क्रिया होजिसे प्राप्त हो
उदाहरणफलम् ददाति (क्या देता है)रामाय ददाति (किसे देता है)

‘रामाय फलम् ददाति’ — यहाँ ‘फलम्’ = कर्म (क्या देता है?), ‘रामाय’ = सम्प्रदान (किसके लिए?)

अभ्यास — सम्प्रदान पहचानें

वाक्य 1: माता पुत्राय भोजनम् ददाति।

(माता पुत्र के लिए भोजन देती है।)

शब्दविभक्तिकारक
माताप्रथमाकर्ता
पुत्रायचतुर्थीसम्प्रदान
भोजनम्द्वितीयाकर्म

वाक्य 2: विद्यार्थिभ्यः गुरुः पुस्तकानि ददाति।

(विद्यार्थियों के लिए गुरु पुस्तकें देता है।)

शब्दविभक्तिकारक
विद्यार्थिभ्यःचतुर्थी बहु.सम्प्रदान
गुरुःप्रथमाकर्ता
पुस्तकानिद्वितीयाकर्म

मूल पाठ में प्रयोग

गुरवे नमः। गुरुः शिष्याय विद्याम् ददाति। शिष्याय ज्ञानम् रोचते। सः मोक्षाय प्रयतते।

शब्दअर्थव्याकरण
गुरवेगुरु कोचतुर्थी एकवचन (नमः-योग)
शिष्यायशिष्य के लिएचतुर्थी एकवचन (सम्प्रदान)
विद्याम्विद्या कोद्वितीया एकवचन (कर्म)
शिष्यायशिष्य कोचतुर्थी एकवचन (रुच् धातु)
मोक्षायमोक्ष के लिएचतुर्थी एकवचन (उद्देश्य)

अनुवाद: गुरु को नमस्कार। गुरु शिष्य को विद्या देता है। शिष्य को ज्ञान अच्छा लगता है। वह मोक्ष के लिए प्रयत्न करता है।

याद रखें

  1. चतुर्थी = सम्प्रदान — “किसके लिए? किसे देता है?” का उत्तर
  2. दा (देना) धातु → सम्प्रदान चतुर्थी में — रामाय ददाति
  3. नमः, स्वस्ति, स्वाहा, वषट् → सदा चतुर्थी — गुरवे नमः
  4. रुच्, क्रुध्, स्पृह् धातुओं के साथ → चतुर्थी
  5. उद्देश्य (purpose) → चतुर्थी — मोक्षाय तपस्यति

अभ्यास

प्रश्न 1 / 80 सही

चतुर्थी विभक्ति का मुख्य कारक कौन-सा है?