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इस मॉड्यूल के पाठ

विस्मयादि निपात — अहो, हा, धिक्

अनुमानित समय: 12 मिनट

विस्मयादि निपात क्या हैं?

विस्मयादि निपात (exclamatory particles) वे अव्यय हैं जो भावों को व्यक्त करते हैं — आश्चर्य, शोक, धिक्कार, सम्बोधन, प्रणाम, आशीर्वाद इत्यादि।

ये शब्द वाक्य के व्याकरणिक ढाँचे से स्वतन्त्र होते हैं — केवल भाव प्रकट करते हैं।

1. अहो (ओह! / वाह! — आश्चर्य, प्रशंसा)

‘अहो’ आश्चर्य (wonder) या प्रशंसा (admiration) व्यक्त करता है:

अहो सुन्दरम्! = ओह, कितना सुन्दर! अहो बत महत् पापम्! = ओह, कितना बड़ा पाप! अहो दैवम्! = ओह, भाग्य (विधि) की बात!

‘अहो’ हर्ष और विस्मय दोनों में प्रयुक्त हो सकता है।

2. हा (हाय! — शोक, विलाप)

‘हा’ शोक (grief) और विलाप (lamentation) का बोधक है:

हा कष्टम्! = हाय, कितना कष्ट! हा हतोऽस्मि! = हाय, मारा गया मैं! हा देवि! = हाय देवी! (पुकार + शोक)

‘हा हा’ — तीव्र विलाप

हा हा! किम् इदम् अभवत्! = हाय हाय! यह क्या हो गया!

3. धिक् (धिक्कार! — तिरस्कार, निन्दा)

‘धिक्’ तिरस्कार (contempt) और निन्दा (reproach) व्यक्त करता है:

धिक् त्वाम्! = तुम्हें धिक्कार! (धिक् + द्वितीया विभक्ति) धिक् मूर्खम्! = मूर्ख को धिक्कार! धिग् जीवितम्! = ऐसे जीवन को धिक्कार!

ध्यान दें: ‘धिक्’ के बाद द्वितीया विभक्ति (accusative) आती है — ‘जिसको धिक्कार’।

व्यञ्जन सन्धि: धिक् + त = धिक् त्वाम् (क् + त = क्त), धिक् + म = धिग् मूर्खम् (क् + म = ग्)

4. हे / भो / भोः (अरे! — सम्बोधन)

ये अव्यय किसी को पुकारने/सम्बोधित करने के लिए प्रयुक्त होते हैं:

अव्ययप्रयोगउदाहरण
हेसामान्य सम्बोधनहे राम! हे कृष्ण!
भो / भोःआदरपूर्ण या सामान्य सम्बोधनभो राजन्! भोः मित्र!
अरेअनादर / अनौपचारिकअरे बालक!

हे भगवन्, रक्ष माम्! = हे भगवन्, मेरी रक्षा करो! भो राजन्, शृणु! = हे राजन्, सुनो!

5. नमः (नमस्कार / salutation)

‘नमः’ नमन या प्रणाम व्यक्त करता है। इसके बाद चतुर्थी विभक्ति (dative — ‘जिसको’) आती है:

नमः शिवाय = शिव को नमस्कार नमो नमः = बार-बार नमस्कार गुरवे नमः = गुरु को नमस्कार

ध्यान दें: नमः + विसर्ग सन्धि → ‘नमो’ (नमः + अ/ओ)

6. स्वस्ति (कल्याण हो / well-being)

‘स्वस्ति’ आशीर्वाद और मंगलकामना में प्रयुक्त होता है:

स्वस्ति प्रजाभ्यः = प्रजा का कल्याण हो स्वस्ति नो गोभ्यः = हमारी गायों का कल्याण हो

‘स्वस्ति’ से ही ‘स्वस्तिक’ शब्द बना है — मंगल का चिह्न।

7. अन्य उपयोगी निपात

निपातअर्थउदाहरण
बतखेद / आश्चर्यबत कष्टम्! (खेद है!)
दिष्ट्यासौभाग्य सेदिष्ट्या जीवसि! (सौभाग्य से जीवित हो!)
साधुबहुत अच्छा!साधु साधु! (बहुत अच्छा!)
अलम्बस / पर्याप्त / मतअलम् विलम्बेन (बस, विलम्ब मत करो)

सारांश सारणी

निपातभावहिन्दीउदाहरण
अहोआश्चर्य/प्रशंसाओह!/वाह!अहो सुन्दरम्!
हाशोक/विलापहाय!हा कष्टम्!
धिक्तिरस्कारधिक्कार!धिक् त्वाम्!
हे/भोसम्बोधनअरे!/ओ!हे राम!
नमःनमननमस्कारनमः शिवाय
स्वस्तिमंगलकामनाकल्याण होस्वस्ति प्रजाभ्यः

वाक्यों में प्रयोग

हे मित्र! अहो, अद्य सुन्दरं दिनम् अस्ति! ग्रामं गच्छावः। हे मित्र! ओह, आज सुन्दर दिन है! गाँव चलें।

हा हा! सः वृक्षः पतितः। धिक् कुठारधारिणम्! हाय हाय! वह वृक्ष गिर गया। कुल्हाड़ी वाले को धिक्कार!

याद रखें

  1. अहो = आश्चर्य/प्रशंसा, हा = शोक, धिक् = धिक्कार
  2. हे/भो = सम्बोधन (किसी को पुकारना)
  3. नमः + चतुर्थी विभक्ति = नमस्कार (नमः शिवाय)
  4. स्वस्ति = कल्याण/मंगल कामना
  5. धिक् + द्वितीया विभक्ति = जिसको धिक्कार (धिक् त्वाम्)

अभ्यास

प्रश्न 1 / 80 सही

'अहो सुन्दरम्!' में 'अहो' किस भाव को व्यक्त करता है?