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इस मॉड्यूल के पाठ

निस्, नि, उद्

अनुमानित समय: 15 मिनट

निस्, नि, उद् — तीन उपसर्ग

इस पाठ में तीन उपसर्ग: निस्/निर् (बाहर/बिना), नि (नीचे/भीतर), उद् (ऊपर)।

ध्यान दें: ‘निस्’ और ‘नि’ दो भिन्न उपसर्ग हैं — इन्हें मिलाएँ नहीं!

1. निस् / निर् (बाहर / without / out)

‘निस्’ का मूल अर्थ है ‘बाहर’ (out) या ‘बिना/रहित’ (without)।

सन्धि: निस् → निर्/निश्/निः

पूर्व रूपपरिवर्तनउदाहरण
निस् + स्वरनिर्निर् + आशा = निराशा
निस् + घोष व्यञ्जननिर्निर् + भय = निर्भय
निस् + अघोष व्यञ्जननिश्/निष्निस् + चय = निश्चय
निस् + अन्तनिःनिःशब्दम्

प्रमुख शब्द — ‘निस्’ उपसर्ग

शब्दरचनाअर्थ
निर्गमःनिर् + गम्बाहर निकलना, exit
निर्भयःनिर् + भयभय रहित, fearless
निर्मलःनिर् + मलमल रहित, pure
निश्चयःनिस् + चिनिश्चित करना, certainty
निराशानिर् + आशाआशा रहित, hopelessness
निर्दोषःनिर् + दोषदोष रहित, faultless
निष्पापःनिस् + पापपाप रहित, sinless
निर्वाणम्निर् + वाबुझना / मुक्ति

वाक्यों में प्रयोग

वीरः निर्भयः भवति। = वीर निर्भय होता है। गङ्गाजलम् निर्मलम् अस्ति। = गंगा का जल निर्मल (स्वच्छ) है। सः गृहात् निर्गच्छति। = वह घर से बाहर निकलता है।

2. नि (नीचे / down / into / settled)

‘नि’ का मूल अर्थ है ‘नीचे’ (down), ‘भीतर’ (into), या ‘स्थिर/नियत’ (settled/fixed)।

‘निस्’ बनाम ‘नि’ — भेद

निस् / निर्नि
बाहर / बिनानीचे / भीतर / स्थिर
निर्गमः (बाहर जाना)निवासः (भीतर रहना)
निर्भय (भय रहित)नियमः (स्थिर बंधन)

प्रमुख शब्द — ‘नि’ उपसर्ग

शब्दधातुअर्थ
निवासःनि + वस्स्थिर रहना, dwelling
निवेदनम्नि + विद्नीचे (विनम्रतापूर्वक) कहना, submission
नियमःनि + यम्स्थिर नियन्त्रण, rule
नियोगःनि + युज्नीचे (दृढ़ता से) जोड़ना, appointment
निग्रहःनि + ग्रह्नीचे दबाना, restraint
निमित्तम्नि + माकारण, cause
निपातःनि + पत्नीचे गिरना, falling

वाक्यों में प्रयोग

मम निवासः ग्रामे अस्ति। = मेरा निवास गाँव में है। धर्मस्य नियमान् पालयतु। = धर्म के नियमों का पालन करो। शिष्यः गुरवे निवेदनम् करोति। = शिष्य गुरु को निवेदन करता है।

3. उद् (ऊपर / up / upward)

‘उद्’ का मूल अर्थ है ‘ऊपर’ (up/upward) या ‘बाहर’ (out/forth)।

सन्धि: उद् → उत्/उन्/उ

पूर्व रूपपरिवर्तनउदाहरण
उद् + अघोषउत्उद् + स्था = उत्थान
उद् + नउन्उद् + नत = उन्नत
उद् + हउद् + हृ = उद्धार (द्ध)

प्रमुख शब्द — ‘उद्’ उपसर्ग

शब्दधातुअर्थ
उद्गमःउद् + गम्ऊपर उठना, origin/rise
उद्यमःउद् + यम्ऊपर उठकर प्रयास, effort
उत्थानम्उद् + स्थाऊपर खड़ा होना, rising
उत्पत्तिःउद् + पद्ऊपर आना, origin/birth
उत्साहःउद् + सह्ऊपर उठने की शक्ति, enthusiasm
उद्धारःउद् + हृऊपर उठाकर ले जाना, upliftment
उन्नतिःउद् + नम्ऊपर नमना → उन्नति, progress
उद्यानम्उद् + याऊपर जाना → बगीचा, garden
उच्चारणम्उद् + चर्ऊपर चलाना → उच्चारण, pronunciation

वाक्यों में प्रयोग

सूर्यस्य उद्गमः पूर्वदिशि भवति। = सूर्य का उदय पूर्व दिशा में होता है। उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। = उद्यम (प्रयत्न) से ही कार्य सिद्ध होते हैं, मनोरथों (इच्छाओं) से नहीं। गुरुः शिष्यस्य उद्धारं करोति। = गुरु शिष्य का उद्धार करता है।

तुलना — निस्, नि, उद्

उपसर्गदिशाभावउदाहरण
निस्/निर्बाहर ←रहित, शून्यनिर्गम, निर्भय, निर्मल
निनीचे ↓ / भीतरस्थिर, नियतनिवास, नियम, निवेदन
उद्ऊपर ↑उत्थान, उन्नतिउद्गम, उद्यम, उत्थान

विपरीत जोड़े

उद् (ऊपर)नि (नीचे)
उद्गमः (ऊपर जाना)निपातः (नीचे गिरना)
उत्थानम् (उठना)निग्रहः (दबाना)
उन्नतिः (उन्नति)

अभ्यास — ‘गम्’ धातु + तीनों उपसर्ग

उपसर्ग + गम्रूपअर्थ
निर् + गम्निर्गच्छतिबाहर निकलता है
नि + गम्निगच्छतिनीचे/भीतर जाता है
उद् + गम्उद्गच्छतिऊपर जाता/उठता है

याद रखें

  1. निस्/निर् = बाहर/बिना — निर्गम (बाहर), निर्भय (बिना भय), निर्मल (बिना मल)
  2. नि = नीचे/भीतर/स्थिर — निवास (स्थिर रहना), नियम (स्थिर बंधन), निवेदन (विनम्र कथन)
  3. उद् = ऊपर — उद्गम (ऊपर उठना), उद्यम (प्रयत्न), उत्थान (उठना)
  4. ‘निस्’ और ‘नि’ भिन्न उपसर्ग हैं — अर्थ भिन्न!
  5. सन्धि: निस् → निर्/निश्/निष्; उद् → उत्/उन्/उद्ध

अभ्यास

प्रश्न 1 / 70 सही

'निर्भयः' में 'निर्' (निस्) उपसर्ग का अर्थ क्या है?