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इस मॉड्यूल के पाठ

पितृ शब्द — ऋकारान्त पुल्लिङ्ग

अनुमानित समय: 22 मिनट

पितृ शब्द रूप (ऋकारान्त पुल्लिङ्ग)

पितृ शब्द ऋकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों का प्रतिनिधि है। इसका अर्थ है ‘पिता’। ऋकारान्त शब्द संस्कृत के विशिष्ट शब्द हैं — इनके रूप अन्य शब्दों से काफी भिन्न हैं।

इसके रूप सीखने से भ्रातृ (भाई), जामातृ (दामाद), नप्तृ (पोता), कर्तृ (करने वाला), दातृ (देने वाला) आदि सभी ऋकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों के रूप आ जाते हैं।

ऋकारान्त शब्दों की विशेषता

ऋकारान्त शब्दों में स्वर प्रत्यय लगने पर तीन प्रकार से बदलता है:

  1. दीर्घ (ऋ → आ) — पिता (प्रथमा एकवचन)
  2. गुण (ऋ → अर्) — पितरम्, पितरौ, पितरः
  3. यण् सन्धि (ऋ → र्) — पित्रा, पित्रे, पित्राः

ध्यान दें: प्रथमा एकवचन में ऋ → आ — यह ऋकारान्त शब्दों का सबसे विशिष्ट रूप है।

सम्पूर्ण पितृ शब्द रूप

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमा (कर्ता)पितापितरौपितरः
द्वितीया (कर्म)पितरम्पितरौपितॄन्
तृतीया (करण)पित्रापितृभ्याम्पितृभिः
चतुर्थी (सम्प्रदान)पित्रेपितृभ्याम्पितृभ्यः
पञ्चमी (अपादान)पितुःपितृभ्याम्पितृभ्यः
षष्ठी (सम्बन्ध)पितुःपित्रोःपितॄणाम्
सप्तमी (अधिकरण)पितरिपित्रोःपितृषु
सम्बोधनहे पितः!हे पितरौ!हे पितरः!

मातृ शब्द रूप (ऋकारान्त स्त्रीलिङ्ग) — तुलना

मातृ (माता) स्त्रीलिङ्ग ऋकारान्त शब्द है। पितृ से तुलना:

विभक्तिपितृ (पुं.)मातृ (स्त्री.)अन्तर?
प्रथमा एक.पितामातासमान
द्वितीया एक.पितरम्मातरम्समान
तृतीया एक.पित्रामात्रासमान
चतुर्थी एक.पित्रेमात्रेसमान
पञ्चमी एक.पितुःमातुःसमान
षष्ठी एक.पितुःमातुःसमान
सप्तमी एक.पितरिमातरिसमान
द्वितीया बहु.पितॄन्मातॄःभिन्न
षष्ठी बहु.पितॄणाम्मातॄणाम्समान

मुख्य अन्तर: एकवचन में पितृ और मातृ के लगभग सभी रूप समान हैं। अन्तर केवल द्वितीया बहुवचन में है — पुल्लिङ्ग में पितॄन् (नकारान्त), स्त्रीलिङ्ग में मातॄः (विसर्गान्त)।

ध्यान देने योग्य बातें

1. प्रथमा एकवचन — विशिष्ट रूप

पिता — यहाँ ऋ → आ होता है। यह रूप इतना भिन्न है कि पहली बार देखने पर ‘पितृ’ शब्द से जोड़ पाना कठिन है।

2. पञ्चमी = षष्ठी एकवचन

दोनों = पितुः। सन्दर्भ से अर्थ निश्चित करें:

  • पितुः गृहात् आगच्छति = पिता से (पञ्चमी — अपादान)
  • पितुः गृहम् = पिता का (षष्ठी — सम्बन्ध)

3. सम्बोधन एकवचन

सम्बोधन में ऋ → अ होता है: हे पितः! (न कि हे पिता!)

4. तृतीया-चतुर्थी में यण् सन्धि

ऋ → र् (यण् सन्धि): पित्रा (तृतीया), पित्रे (चतुर्थी)

समान शब्द (ऋकारान्त)

शब्दअर्थलिङ्गप्रथमा एक.तृतीया एक.प्रथमा बहु.
पितृपितापुं.पितापित्रापितरः
मातृमातास्त्री.मातामात्रामातरः
भ्रातृभाईपुं.भ्राताभ्रात्राभ्रातरः
दुहितृबेटीस्त्री.दुहितादुहित्रादुहितरः
कर्तृकर्तापुं.कर्ताकर्त्राकर्तारः
दातृदातापुं.दातादात्रादातारः

अभ्यास वाक्य

  1. पिता पुत्रं रक्षति। — पिता पुत्र की रक्षा करता है। (प्रथमा)
  2. पुत्रः पितरं नमति। — पुत्र पिता को प्रणाम करता है। (द्वितीया)
  3. पित्रा सह गच्छति। — पिता के साथ जाता है। (तृतीया)
  4. पित्रे उपहारं ददाति। — पिता के लिए उपहार देता है। (चतुर्थी)
  5. पितुः गृहम् विशालम्। — पिता का घर विशाल है। (षष्ठी)
  6. पितरि श्रद्धा अस्ति। — पिता में श्रद्धा है। (सप्तमी)

मूल पाठ में प्रयोग

इन वाक्यों में ऋकारान्त शब्दों के रूप पहचानें:

पिता पुत्रं विद्यालयं नयति। पितुः वचनम् प्रमाणम्। माता गृहे तिष्ठति।

शब्दअर्थव्याकरण
पितापिताप्रथमा एकवचन (कर्ता) — ऋ → आ
पुत्रम्पुत्र कोद्वितीया एकवचन (कर्म)
पितुःपिता काषष्ठी एकवचन (सम्बन्ध)
वचनम्वचनप्रथमा एकवचन (कर्ता)
मातामाताप्रथमा एकवचन (कर्ता) — मातृ (ऋकारान्त स्त्री.)

अनुवाद: पिता पुत्र को विद्यालय ले जाता है। पिता का वचन प्रमाण है। माता घर में रहती है।

याद रखें

  1. प्रथमा एकवचन = पिता (ऋ → आ) — सबसे विशिष्ट रूप
  2. गुण (ऋ → अर्) — पितरम्, पितरौ, पितरः, पितरि
  3. यण् सन्धि (ऋ → र्) — पित्रा, पित्रे, पित्रोः
  4. पञ्चमी = षष्ठी एकवचन = पितुः (सन्दर्भ से अर्थ)
  5. मातृ (स्त्री.) के एकवचन रूप पितृ के समान हैं — अन्तर केवल बहुवचन में

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

'पितृ' शब्द का प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप क्या है?