पितृ शब्द — ऋकारान्त पुल्लिङ्ग
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पितृ शब्द रूप (ऋकारान्त पुल्लिङ्ग)
पितृ शब्द ऋकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों का प्रतिनिधि है। इसका अर्थ है ‘पिता’। ऋकारान्त शब्द संस्कृत के विशिष्ट शब्द हैं — इनके रूप अन्य शब्दों से काफी भिन्न हैं।
इसके रूप सीखने से भ्रातृ (भाई), जामातृ (दामाद), नप्तृ (पोता), कर्तृ (करने वाला), दातृ (देने वाला) आदि सभी ऋकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों के रूप आ जाते हैं।
ऋकारान्त शब्दों की विशेषता
ऋकारान्त शब्दों में ऋ स्वर प्रत्यय लगने पर तीन प्रकार से बदलता है:
- दीर्घ (ऋ → आ) — पिता (प्रथमा एकवचन)
- गुण (ऋ → अर्) — पितरम्, पितरौ, पितरः
- यण् सन्धि (ऋ → र्) — पित्रा, पित्रे, पित्राः
ध्यान दें: प्रथमा एकवचन में ऋ → आ — यह ऋकारान्त शब्दों का सबसे विशिष्ट रूप है।
सम्पूर्ण पितृ शब्द रूप
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा (कर्ता) | पिता | पितरौ | पितरः |
| द्वितीया (कर्म) | पितरम् | पितरौ | पितॄन् |
| तृतीया (करण) | पित्रा | पितृभ्याम् | पितृभिः |
| चतुर्थी (सम्प्रदान) | पित्रे | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| पञ्चमी (अपादान) | पितुः | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| षष्ठी (सम्बन्ध) | पितुः | पित्रोः | पितॄणाम् |
| सप्तमी (अधिकरण) | पितरि | पित्रोः | पितृषु |
| सम्बोधन | हे पितः! | हे पितरौ! | हे पितरः! |
मातृ शब्द रूप (ऋकारान्त स्त्रीलिङ्ग) — तुलना
मातृ (माता) स्त्रीलिङ्ग ऋकारान्त शब्द है। पितृ से तुलना:
| विभक्ति | पितृ (पुं.) | मातृ (स्त्री.) | अन्तर? |
|---|---|---|---|
| प्रथमा एक. | पिता | माता | समान |
| द्वितीया एक. | पितरम् | मातरम् | समान |
| तृतीया एक. | पित्रा | मात्रा | समान |
| चतुर्थी एक. | पित्रे | मात्रे | समान |
| पञ्चमी एक. | पितुः | मातुः | समान |
| षष्ठी एक. | पितुः | मातुः | समान |
| सप्तमी एक. | पितरि | मातरि | समान |
| द्वितीया बहु. | पितॄन् | मातॄः | भिन्न |
| षष्ठी बहु. | पितॄणाम् | मातॄणाम् | समान |
मुख्य अन्तर: एकवचन में पितृ और मातृ के लगभग सभी रूप समान हैं। अन्तर केवल द्वितीया बहुवचन में है — पुल्लिङ्ग में पितॄन् (नकारान्त), स्त्रीलिङ्ग में मातॄः (विसर्गान्त)।
ध्यान देने योग्य बातें
1. प्रथमा एकवचन — विशिष्ट रूप
पिता — यहाँ ऋ → आ होता है। यह रूप इतना भिन्न है कि पहली बार देखने पर ‘पितृ’ शब्द से जोड़ पाना कठिन है।
2. पञ्चमी = षष्ठी एकवचन
दोनों = पितुः। सन्दर्भ से अर्थ निश्चित करें:
- पितुः गृहात् आगच्छति = पिता से (पञ्चमी — अपादान)
- पितुः गृहम् = पिता का (षष्ठी — सम्बन्ध)
3. सम्बोधन एकवचन
सम्बोधन में ऋ → अ होता है: हे पितः! (न कि हे पिता!)
4. तृतीया-चतुर्थी में यण् सन्धि
ऋ → र् (यण् सन्धि): पित्रा (तृतीया), पित्रे (चतुर्थी)
समान शब्द (ऋकारान्त)
| शब्द | अर्थ | लिङ्ग | प्रथमा एक. | तृतीया एक. | प्रथमा बहु. |
|---|---|---|---|---|---|
| पितृ | पिता | पुं. | पिता | पित्रा | पितरः |
| मातृ | माता | स्त्री. | माता | मात्रा | मातरः |
| भ्रातृ | भाई | पुं. | भ्राता | भ्रात्रा | भ्रातरः |
| दुहितृ | बेटी | स्त्री. | दुहिता | दुहित्रा | दुहितरः |
| कर्तृ | कर्ता | पुं. | कर्ता | कर्त्रा | कर्तारः |
| दातृ | दाता | पुं. | दाता | दात्रा | दातारः |
अभ्यास वाक्य
- पिता पुत्रं रक्षति। — पिता पुत्र की रक्षा करता है। (प्रथमा)
- पुत्रः पितरं नमति। — पुत्र पिता को प्रणाम करता है। (द्वितीया)
- पित्रा सह गच्छति। — पिता के साथ जाता है। (तृतीया)
- पित्रे उपहारं ददाति। — पिता के लिए उपहार देता है। (चतुर्थी)
- पितुः गृहम् विशालम्। — पिता का घर विशाल है। (षष्ठी)
- पितरि श्रद्धा अस्ति। — पिता में श्रद्धा है। (सप्तमी)
मूल पाठ में प्रयोग
इन वाक्यों में ऋकारान्त शब्दों के रूप पहचानें:
पिता पुत्रं विद्यालयं नयति। पितुः वचनम् प्रमाणम्। माता गृहे तिष्ठति।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| पिता | पिता | प्रथमा एकवचन (कर्ता) — ऋ → आ |
| पुत्रम् | पुत्र को | द्वितीया एकवचन (कर्म) |
| पितुः | पिता का | षष्ठी एकवचन (सम्बन्ध) |
| वचनम् | वचन | प्रथमा एकवचन (कर्ता) |
| माता | माता | प्रथमा एकवचन (कर्ता) — मातृ (ऋकारान्त स्त्री.) |
अनुवाद: पिता पुत्र को विद्यालय ले जाता है। पिता का वचन प्रमाण है। माता घर में रहती है।
याद रखें
- प्रथमा एकवचन = पिता (ऋ → आ) — सबसे विशिष्ट रूप
- गुण (ऋ → अर्) — पितरम्, पितरौ, पितरः, पितरि
- यण् सन्धि (ऋ → र्) — पित्रा, पित्रे, पित्रोः
- पञ्चमी = षष्ठी एकवचन = पितुः (सन्दर्भ से अर्थ)
- मातृ (स्त्री.) के एकवचन रूप पितृ के समान हैं — अन्तर केवल बहुवचन में
अभ्यास
'पितृ' शब्द का प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप क्या है?