सर्वनाम और गम् धातु — पहले वाक्य
अनुमानित समय: 15 मिनट
शब्द
पहले तीन सर्वनाम और गम् (जाना) धातु के तीन रूप सीखें:
| सर्वनाम | अर्थ | पुरुष | गम् धातु का रूप | अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| सः | वह | प्रथम पुरुष | गच्छति | वह जाता है |
| त्वम् | तू | मध्यम पुरुष | गच्छसि | तू जाता है |
| अहम् | मैं | उत्तम पुरुष | गच्छामि | मैं जाता हूँ |
ध्यान दें — संस्कृत में क्रिया के रूप से ही पता चलता है कि कर्ता कौन है:
- -ति → प्रथम पुरुष (वह)
- -सि → मध्यम पुरुष (तू)
- -मि → उत्तम पुरुष (मैं)
प्रथम वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| अहं गच्छामि | मैं जाता हूँ |
| त्वं गच्छसि | तू जाता है |
| सः गच्छति | वह जाता है |
संस्कृत वाक्य में कर्ता पहले और क्रिया बाद में आती है।
प्रश्नवाचक शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कुत्र | कहाँ |
| यत्र | जहाँ |
| तत्र | वहाँ |
| सर्वत्र | सब जगह |
| किम् | क्या |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| त्वं कुत्र गच्छसि? | तू कहाँ जाता है? |
| यत्र सः गच्छति | जहाँ वह जाता है |
| अहं तत्र गच्छामि | मैं वहाँ जाता हूँ |
| त्वं सर्वत्र गच्छसि | तू सब जगह जाता है |
| किं सः गच्छति? | क्या वह जाता है? |
| सः गच्छति किम्? | वह जाता है क्या? |
ध्यान दें — किम् वाक्य के आरम्भ या अन्त में आ सकता है। दोनों का अर्थ प्रश्न है।
नकारात्मक वाक्य — ‘न’
न = नहीं। यह क्रिया से ठीक पहले आता है:
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| अहं न गच्छामि | मैं नहीं जाता हूँ |
| त्वं न गच्छसि | तू नहीं जाता है |
| सः न गच्छति | वह नहीं जाता है |
| अहं तत्र न गच्छामि | मैं वहाँ नहीं जाता हूँ |
| किं सः न गच्छति? | क्या वह नहीं जाता है? |
‘कः’ — कौन
दो और शब्द:
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कः | कौन |
| अस्ति | है |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| कः तत्र गच्छति? | कौन वहाँ जाता है? |
| कः सर्वत्र गच्छति? | कौन सब जगह जाता है? |
| तत्र कः न गच्छति? | वहाँ कौन नहीं जाता? |
| कः तत्र अस्ति? | कौन वहाँ है? |
| तत्र कः अस्ति? | वहाँ कौन है? |
मूल पाठ में प्रयोग
इन वाक्यों को पढ़ें — यहाँ केवल वही व्याकरण प्रयुक्त है जो अब तक सीखा है:
अहं तत्र गच्छामि। सः कुत्र गच्छति? सः न गच्छति।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| अहम् | मैं | उत्तम पुरुष सर्वनाम |
| तत्र | वहाँ | स्थानवाचक अव्यय |
| गच्छामि | (मैं) जाता हूँ | गम् धातु, लट्, उत्तम पुरुष |
| सः | वह | प्रथम पुरुष सर्वनाम |
| कुत्र | कहाँ | प्रश्नवाचक अव्यय |
| गच्छति | (वह) जाता है | गम् धातु, लट्, प्रथम पुरुष |
| न | नहीं | नकारात्मक अव्यय |
अन्वय: अहम् तत्र गच्छामि। सः कुत्र गच्छति? सः न गच्छति।
अनुवाद: मैं वहाँ जाता हूँ। वह कहाँ जाता है? वह नहीं जाता।
याद रखें
- क्रिया का अन्त पुरुष बताता है: -ति (वह), -सि (तू), -मि (मैं)
- कुत्र-यत्र-तत्र-सर्वत्र — ‘-त्र’ प्रत्यय स्थान-वाचक शब्द बनाता है
- न सदा क्रिया से पहले आता है
- किम् प्रश्न बनाता है — वाक्य के आरम्भ या अन्त में
संवाद अभ्यास
गुरुः — त्वं कुत्र गच्छसि? शिष्यः — अहं गृहं गच्छामि। गुरुः — सः कुत्र गच्छति? शिष्यः — सः विद्यालयं गच्छति। गुरुः — सा किं करोति? शिष्यः — सा पुस्तकं पठति। गुरुः — शोभनम्! त्वम् अपि पठ।
अभ्यास
'सः' का अर्थ क्या है?