मुख्य सामग्री पर जाएँ
इस मॉड्यूल के पाठ

द्वितीया विभक्ति — कर्म कारक

अनुमानित समय: 20 मिनट

द्वितीया विभक्ति — कर्म कारक

द्वितीया विभक्ति वाक्य में कर्म कारक प्रकट करती है। कर्म = जिस पर क्रिया का फल (प्रभाव) पड़ता है।

कुञ्जी: कर्म = “क्या/किसे करता है?” का उत्तर

द्वितीया विभक्ति के चिह्न

शब्द प्रकारएकवचनद्विवचनबहुवचन
पुं. अकारान्त (राम)रामम्रामौरामान्
पुं. उकारान्त (गुरु)गुरुम्गुरूगुरून्
स्त्री. आकारान्त (लता)लताम्लतेलताः
स्त्री. ईकारान्त (नदी)नदीम्नद्यौनदीः
नपुं. अकारान्त (फल)फलम्फलेफलानि

द्वितीया विभक्ति के प्रयोग

1. कर्म कारक — मुख्य प्रयोग

सकर्मक (transitive) धातुओं के साथ कर्म द्वितीया में:

वाक्यकर्मअर्थ
रामः फलम् खादतिफलम्फल को खाता है
सीता गीतम् गायतिगीतम्गीत को गाती है
बालकः ग्रन्थम् पठतिग्रन्थम्ग्रन्थ को पढ़ता है
माता शिशुम् पालयतिशिशुम्शिशु को पालती है

2. गतिवाचक धातुओं के साथ — गन्तव्य स्थान

गम् (जाना), चल् (चलना), प्रविश् (प्रवेश करना), इ (जाना) जैसी गति वाचक धातुओं के साथ गन्तव्य स्थान (destination) भी द्वितीया में:

वाक्यगन्तव्यअर्थ
रामः ग्रामम् गच्छतिग्रामम्गाँव को जाता है
सः वनम् प्रविशतिवनम्वन में प्रवेश करता है
बालकः नगरम् चलतिनगरम्नगर को चलता है

ध्यान दें: हिन्दी में “गाँव को जाता है” और “गाँव में जाता है” दोनों कहते हैं। संस्कृत में गतिवाचक धातुओं के साथ गन्तव्य सदा द्वितीया में होता है, सप्तमी में नहीं।

3. कालावधि (Duration of Time)

कितने समय तक क्रिया हुई — यह बताने के लिए द्वितीया:

वाक्यकालावधिअर्थ
सः मासम् पठतिमासम्एक महीना (तक) पढ़ता है
वर्षम् तपतिवर्षम्एक वर्ष (तक) तपस्या करता है
दिनम् सेवतेदिनम्एक दिन (तक) सेवा करता है

4. विशेष अव्ययों के साथ

कुछ अव्यय द्वितीया विभक्ति के साथ प्रयुक्त होते हैं:

अव्ययअर्थउदाहरण
प्रतिकी ओर/के प्रतिग्रामम् प्रति गच्छति
अभितःदोनों ओरग्रामम् अभितः वृक्षाः
परितःचारों ओरनगरम् परितः प्राचीरम्
उभयतःदोनों ओरमार्गम् उभयतः वृक्षाः

कर्म के प्रकार

मुख्य कर्म (Primary Object)

वाक्यमुख्य कर्म
रामः सीताम् विद्याम् पाठयतिविद्याम् = मुख्य कर्म

गौण कर्म (Secondary Object)

कुछ धातुओं (दुह्, याच्, पच्, नी, हृ आदि) के साथ दो कर्म हो सकते हैं:

वाक्यगौण कर्ममुख्य कर्म
रामः सीताम् विद्याम् पाठयतिसीताम् (गौण)विद्याम् (मुख्य)

अभ्यास — कर्म पहचानें

वाक्य 1: बालकः विद्यालयम् गच्छति ग्रन्थम् च पठति।

(बालक विद्यालय जाता है और ग्रन्थ पढ़ता है।)

शब्दविभक्तिकारकप्रयोग
बालकःप्रथमाकर्ताकौन जाता है?
विद्यालयम्द्वितीयाकर्मगन्तव्य स्थान
ग्रन्थम्द्वितीयाकर्मक्या पढ़ता है?

वाक्य 2: गुरुः शिष्यान् धर्मम् शिक्षयति।

(गुरु शिष्यों को धर्म सिखाता है।)

शब्दविभक्तिकारक
गुरुःप्रथमाकर्ता
शिष्यान्द्वितीया बहु.गौण कर्म
धर्मम्द्वितीयामुख्य कर्म

मूल पाठ में प्रयोग

बालकः प्रातः विद्यालयम् गच्छति। सः ग्रन्थम् पठति। गुरुम् नमति। मासम् अभ्यासं करोति।

शब्दअर्थव्याकरण
विद्यालयम्विद्यालय कोद्वितीया एकवचन (गन्तव्य)
ग्रन्थम्ग्रन्थ कोद्वितीया एकवचन (कर्म)
गुरुम्गुरु कोद्वितीया एकवचन (कर्म)
मासम्एक महीनाद्वितीया एकवचन (कालावधि)

अनुवाद: बालक प्रातः विद्यालय जाता है। वह ग्रन्थ पढ़ता है। गुरु को नमस्कार करता है। एक महीने तक अभ्यास करता है।

याद रखें

  1. द्वितीया = कर्म — “क्या/किसे?” का उत्तर
  2. गतिवाचक धातु + गन्तव्य स्थान → द्वितीया (ग्रामम् गच्छति)
  3. कालावधि (duration) → द्वितीया (मासम् पठति)
  4. प्रति, अभितः, परितः अव्ययों के साथ → द्वितीया
  5. नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा = द्वितीया — सन्दर्भ से पहचानें

अभ्यास

प्रश्न 1 / 80 सही

द्वितीया विभक्ति का मुख्य कारक कौन-सा है?