द्वितीया विभक्ति — कर्म कारक
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द्वितीया विभक्ति — कर्म कारक
द्वितीया विभक्ति वाक्य में कर्म कारक प्रकट करती है। कर्म = जिस पर क्रिया का फल (प्रभाव) पड़ता है।
कुञ्जी: कर्म = “क्या/किसे करता है?” का उत्तर
द्वितीया विभक्ति के चिह्न
| शब्द प्रकार | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| पुं. अकारान्त (राम) | रामम् | रामौ | रामान् |
| पुं. उकारान्त (गुरु) | गुरुम् | गुरू | गुरून् |
| स्त्री. आकारान्त (लता) | लताम् | लते | लताः |
| स्त्री. ईकारान्त (नदी) | नदीम् | नद्यौ | नदीः |
| नपुं. अकारान्त (फल) | फलम् | फले | फलानि |
द्वितीया विभक्ति के प्रयोग
1. कर्म कारक — मुख्य प्रयोग
सकर्मक (transitive) धातुओं के साथ कर्म द्वितीया में:
| वाक्य | कर्म | अर्थ |
|---|---|---|
| रामः फलम् खादति | फलम् | फल को खाता है |
| सीता गीतम् गायति | गीतम् | गीत को गाती है |
| बालकः ग्रन्थम् पठति | ग्रन्थम् | ग्रन्थ को पढ़ता है |
| माता शिशुम् पालयति | शिशुम् | शिशु को पालती है |
2. गतिवाचक धातुओं के साथ — गन्तव्य स्थान
गम् (जाना), चल् (चलना), प्रविश् (प्रवेश करना), इ (जाना) जैसी गति वाचक धातुओं के साथ गन्तव्य स्थान (destination) भी द्वितीया में:
| वाक्य | गन्तव्य | अर्थ |
|---|---|---|
| रामः ग्रामम् गच्छति | ग्रामम् | गाँव को जाता है |
| सः वनम् प्रविशति | वनम् | वन में प्रवेश करता है |
| बालकः नगरम् चलति | नगरम् | नगर को चलता है |
ध्यान दें: हिन्दी में “गाँव को जाता है” और “गाँव में जाता है” दोनों कहते हैं। संस्कृत में गतिवाचक धातुओं के साथ गन्तव्य सदा द्वितीया में होता है, सप्तमी में नहीं।
3. कालावधि (Duration of Time)
कितने समय तक क्रिया हुई — यह बताने के लिए द्वितीया:
| वाक्य | कालावधि | अर्थ |
|---|---|---|
| सः मासम् पठति | मासम् | एक महीना (तक) पढ़ता है |
| वर्षम् तपति | वर्षम् | एक वर्ष (तक) तपस्या करता है |
| दिनम् सेवते | दिनम् | एक दिन (तक) सेवा करता है |
4. विशेष अव्ययों के साथ
कुछ अव्यय द्वितीया विभक्ति के साथ प्रयुक्त होते हैं:
| अव्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रति | की ओर/के प्रति | ग्रामम् प्रति गच्छति |
| अभितः | दोनों ओर | ग्रामम् अभितः वृक्षाः |
| परितः | चारों ओर | नगरम् परितः प्राचीरम् |
| उभयतः | दोनों ओर | मार्गम् उभयतः वृक्षाः |
कर्म के प्रकार
मुख्य कर्म (Primary Object)
| वाक्य | मुख्य कर्म |
|---|---|
| रामः सीताम् विद्याम् पाठयति | विद्याम् = मुख्य कर्म |
गौण कर्म (Secondary Object)
कुछ धातुओं (दुह्, याच्, पच्, नी, हृ आदि) के साथ दो कर्म हो सकते हैं:
| वाक्य | गौण कर्म | मुख्य कर्म |
|---|---|---|
| रामः सीताम् विद्याम् पाठयति | सीताम् (गौण) | विद्याम् (मुख्य) |
अभ्यास — कर्म पहचानें
वाक्य 1: बालकः विद्यालयम् गच्छति ग्रन्थम् च पठति।
(बालक विद्यालय जाता है और ग्रन्थ पढ़ता है।)
| शब्द | विभक्ति | कारक | प्रयोग |
|---|---|---|---|
| बालकः | प्रथमा | कर्ता | कौन जाता है? |
| विद्यालयम् | द्वितीया | कर्म | गन्तव्य स्थान |
| ग्रन्थम् | द्वितीया | कर्म | क्या पढ़ता है? |
वाक्य 2: गुरुः शिष्यान् धर्मम् शिक्षयति।
(गुरु शिष्यों को धर्म सिखाता है।)
| शब्द | विभक्ति | कारक |
|---|---|---|
| गुरुः | प्रथमा | कर्ता |
| शिष्यान् | द्वितीया बहु. | गौण कर्म |
| धर्मम् | द्वितीया | मुख्य कर्म |
मूल पाठ में प्रयोग
बालकः प्रातः विद्यालयम् गच्छति। सः ग्रन्थम् पठति। गुरुम् नमति। मासम् अभ्यासं करोति।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| विद्यालयम् | विद्यालय को | द्वितीया एकवचन (गन्तव्य) |
| ग्रन्थम् | ग्रन्थ को | द्वितीया एकवचन (कर्म) |
| गुरुम् | गुरु को | द्वितीया एकवचन (कर्म) |
| मासम् | एक महीना | द्वितीया एकवचन (कालावधि) |
अनुवाद: बालक प्रातः विद्यालय जाता है। वह ग्रन्थ पढ़ता है। गुरु को नमस्कार करता है। एक महीने तक अभ्यास करता है।
याद रखें
- द्वितीया = कर्म — “क्या/किसे?” का उत्तर
- गतिवाचक धातु + गन्तव्य स्थान → द्वितीया (ग्रामम् गच्छति)
- कालावधि (duration) → द्वितीया (मासम् पठति)
- प्रति, अभितः, परितः अव्ययों के साथ → द्वितीया
- नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा = द्वितीया — सन्दर्भ से पहचानें
अभ्यास
द्वितीया विभक्ति का मुख्य कारक कौन-सा है?