गुरु शब्द — उकारान्त पुल्लिङ्ग
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गुरु शब्द रूप (उकारान्त पुल्लिङ्ग)
अब तक आपने अकारान्त (राम, देव), ईकारान्त (नदी), और इकारान्त (मति) शब्दों के रूप सीखे। अब उकारान्त शब्दों की बारी है।
गुरु शब्द उकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों का प्रतिनिधि है। इसके रूप सीखने से शिशु, साधु, भानु, बन्धु, मृत्यु, वायु, शत्रु, विष्णु, पशु आदि सभी उकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों के रूप आ जाते हैं।
उकारान्त शब्दों की विशेषता
उकारान्त शब्दों में उ स्वर प्रत्यय लगने पर तीन प्रकार से बदलता है:
- गुण (उ → ओ → अव्) — गुरवे, गुरवः
- दीर्घ (उ → ऊ) — गुरू (द्विवचन), गुरूणाम्
- वृद्धि (उ → औ) — गुरौ (सप्तमी)
सम्पूर्ण गुरु शब्द रूप
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा (कर्ता) | गुरुः | गुरू | गुरवः |
| द्वितीया (कर्म) | गुरुम् | गुरू | गुरून् |
| तृतीया (करण) | गुरुणा | गुरुभ्याम् | गुरुभिः |
| चतुर्थी (सम्प्रदान) | गुरवे | गुरुभ्याम् | गुरुभ्यः |
| पञ्चमी (अपादान) | गुरोः | गुरुभ्याम् | गुरुभ्यः |
| षष्ठी (सम्बन्ध) | गुरोः | गुर्वोः | गुरूणाम् |
| सप्तमी (अधिकरण) | गुरौ | गुर्वोः | गुरुषु |
| सम्बोधन | हे गुरो! | हे गुरू! | हे गुरवः! |
राम (अकारान्त) बनाम गुरु (उकारान्त) — तुलना
| विभक्ति | राम (अकारान्त) | गुरु (उकारान्त) |
|---|---|---|
| प्रथमा एक. | रामः | गुरुः |
| द्वितीया एक. | रामम् | गुरुम् |
| तृतीया एक. | रामेण | गुरुणा |
| चतुर्थी एक. | रामाय | गुरवे |
| पञ्चमी एक. | रामात् | गुरोः |
| षष्ठी एक. | रामस्य | गुरोः |
| सप्तमी एक. | रामे | गुरौ |
ध्यान दें: प्रथमा और द्वितीया एकवचन में प्रत्यय-संरचना समान है (विसर्ग, -म्)। तृतीया से आगे रूप भिन्न हो जाते हैं।
ध्यान देने योग्य बातें
1. पञ्चमी एकवचन = षष्ठी एकवचन
दोनों = गुरोः। सन्दर्भ से अर्थ समझें:
- गुरोः गृहात् आगच्छति = गुरु से (पञ्चमी — अपादान)
- गुरोः पुस्तकम् = गुरु का (षष्ठी — सम्बन्ध)
2. तृतीया एकवचन में णत्व
गुरु + ना = गुरुणा (न → ण)। यह णत्व विधान है — ऋ, र, ष के बाद ‘न’ → ‘ण’ हो जाता है। यहाँ ‘रु’ के कारण ‘न’ → ‘ण’ हुआ।
3. सम्बोधन एकवचन
सम्बोधन में उ → ओ (गुण) हो जाता है: हे गुरो!
4. षष्ठी-सप्तमी द्विवचन
गुर्वोः — यहाँ उ → व् (यण् सन्धि जैसी) + ओः = गुर्वोः
समान शब्द (उकारान्त पुल्लिङ्ग)
| शब्द | अर्थ | प्रथमा एक. | तृतीया एक. | प्रथमा बहु. |
|---|---|---|---|---|
| गुरु | गुरु/शिक्षक | गुरुः | गुरुणा | गुरवः |
| शिशु | शिशु/बालक | शिशुः | शिशुना | शिशवः |
| साधु | साधु/सज्जन | साधुः | साधुना | साधवः |
| भानु | सूर्य | भानुः | भानुना | भानवः |
| बन्धु | बन्धु/रिश्तेदार | बन्धुः | बन्धुना | बन्धवः |
| वायु | वायु/हवा | वायुः | वायुना | वायवः |
| शत्रु | शत्रु/दुश्मन | शत्रुः | शत्रुणा | शत्रवः |
| पशु | पशु/जानवर | पशुः | पशुना | पशवः |
अभ्यास वाक्य
- गुरुः पाठयति। — गुरु पढ़ाता है। (प्रथमा)
- शिष्यः गुरुम् नमति। — शिष्य गुरु को नमस्कार करता है। (द्वितीया)
- गुरुणा ज्ञानं दत्तम्। — गुरु द्वारा ज्ञान दिया गया। (तृतीया)
- गुरवे पुष्पाणि ददाति। — गुरु के लिए पुष्प देता है। (चतुर्थी)
- गुरोः समीपम् गच्छति। — गुरु के समीप जाता है। (षष्ठी)
- गुरौ भक्तिः अस्ति। — गुरु में भक्ति है। (सप्तमी)
मूल पाठ में प्रयोग
इन वाक्यों में गुरु शब्द के रूप पहचानें:
गुरुः शिष्यान् पाठयति। गुरोः वचनम् प्रमाणम्। गुरौ श्रद्धा भवेत्।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| गुरुः | गुरु | प्रथमा एकवचन (कर्ता) |
| शिष्यान् | शिष्यों को | द्वितीया बहुवचन (कर्म) |
| गुरोः | गुरु का | षष्ठी एकवचन (सम्बन्ध) |
| वचनम् | वचन | प्रथमा एकवचन (कर्ता) |
| गुरौ | गुरु में | सप्तमी एकवचन (अधिकरण) |
अनुवाद: गुरु शिष्यों को पढ़ाता है। गुरु का वचन प्रमाण है। गुरु में श्रद्धा होनी चाहिए।
याद रखें
- प्रथमा एकवचन = गुरुः (विसर्गान्त, राम के समान)
- तृतीया एकवचन = गुरुणा (णत्व) — रामेण से भिन्न
- चतुर्थी एकवचन = गुरवे (गुण सन्धि — उ → अव्)
- पञ्चमी = षष्ठी एकवचन = गुरोः (सन्दर्भ से अर्थ)
- सम्बोधन = हे गुरो! (गुण — उ → ओ)
अभ्यास
'गुरु' शब्द का प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप क्या है?