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इस मॉड्यूल के पाठ

गुरु शब्द — उकारान्त पुल्लिङ्ग

अनुमानित समय: 18 मिनट

गुरु शब्द रूप (उकारान्त पुल्लिङ्ग)

अब तक आपने अकारान्त (राम, देव), ईकारान्त (नदी), और इकारान्त (मति) शब्दों के रूप सीखे। अब उकारान्त शब्दों की बारी है।

गुरु शब्द उकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों का प्रतिनिधि है। इसके रूप सीखने से शिशु, साधु, भानु, बन्धु, मृत्यु, वायु, शत्रु, विष्णु, पशु आदि सभी उकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों के रूप आ जाते हैं।

उकारान्त शब्दों की विशेषता

उकारान्त शब्दों में स्वर प्रत्यय लगने पर तीन प्रकार से बदलता है:

  1. गुण (उ → ओ → अव्) — गुरवे, गुरवः
  2. दीर्घ (उ → ऊ) — गुरू (द्विवचन), गुरूणाम्
  3. वृद्धि (उ → औ) — गुरौ (सप्तमी)

सम्पूर्ण गुरु शब्द रूप

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमा (कर्ता)गुरुःगुरूगुरवः
द्वितीया (कर्म)गुरुम्गुरूगुरून्
तृतीया (करण)गुरुणागुरुभ्याम्गुरुभिः
चतुर्थी (सम्प्रदान)गुरवेगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
पञ्चमी (अपादान)गुरोःगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
षष्ठी (सम्बन्ध)गुरोःगुर्वोःगुरूणाम्
सप्तमी (अधिकरण)गुरौगुर्वोःगुरुषु
सम्बोधनहे गुरो!हे गुरू!हे गुरवः!

राम (अकारान्त) बनाम गुरु (उकारान्त) — तुलना

विभक्तिराम (अकारान्त)गुरु (उकारान्त)
प्रथमा एक.रामःगुरुः
द्वितीया एक.रामम्गुरुम्
तृतीया एक.रामेणगुरुणा
चतुर्थी एक.रामायगुरवे
पञ्चमी एक.रामात्गुरोः
षष्ठी एक.रामस्यगुरोः
सप्तमी एक.रामेगुरौ

ध्यान दें: प्रथमा और द्वितीया एकवचन में प्रत्यय-संरचना समान है (विसर्ग, -म्)। तृतीया से आगे रूप भिन्न हो जाते हैं।

ध्यान देने योग्य बातें

1. पञ्चमी एकवचन = षष्ठी एकवचन

दोनों = गुरोः। सन्दर्भ से अर्थ समझें:

  • गुरोः गृहात् आगच्छति = गुरु से (पञ्चमी — अपादान)
  • गुरोः पुस्तकम् = गुरु का (षष्ठी — सम्बन्ध)

2. तृतीया एकवचन में णत्व

गुरु + ना = गुरुणा (न → ण)। यह णत्व विधान है — ऋ, र, ष के बाद ‘न’ → ‘ण’ हो जाता है। यहाँ ‘रु’ के कारण ‘न’ → ‘ण’ हुआ।

3. सम्बोधन एकवचन

सम्बोधन में उ → (गुण) हो जाता है: हे गुरो!

4. षष्ठी-सप्तमी द्विवचन

गुर्वोः — यहाँ उ → व् (यण् सन्धि जैसी) + ओः = गुर्वोः

समान शब्द (उकारान्त पुल्लिङ्ग)

शब्दअर्थप्रथमा एक.तृतीया एक.प्रथमा बहु.
गुरुगुरु/शिक्षकगुरुःगुरुणागुरवः
शिशुशिशु/बालकशिशुःशिशुनाशिशवः
साधुसाधु/सज्जनसाधुःसाधुनासाधवः
भानुसूर्यभानुःभानुनाभानवः
बन्धुबन्धु/रिश्तेदारबन्धुःबन्धुनाबन्धवः
वायुवायु/हवावायुःवायुनावायवः
शत्रुशत्रु/दुश्मनशत्रुःशत्रुणाशत्रवः
पशुपशु/जानवरपशुःपशुनापशवः

अभ्यास वाक्य

  1. गुरुः पाठयति। — गुरु पढ़ाता है। (प्रथमा)
  2. शिष्यः गुरुम् नमति। — शिष्य गुरु को नमस्कार करता है। (द्वितीया)
  3. गुरुणा ज्ञानं दत्तम्। — गुरु द्वारा ज्ञान दिया गया। (तृतीया)
  4. गुरवे पुष्पाणि ददाति। — गुरु के लिए पुष्प देता है। (चतुर्थी)
  5. गुरोः समीपम् गच्छति। — गुरु के समीप जाता है। (षष्ठी)
  6. गुरौ भक्तिः अस्ति। — गुरु में भक्ति है। (सप्तमी)

मूल पाठ में प्रयोग

इन वाक्यों में गुरु शब्द के रूप पहचानें:

गुरुः शिष्यान् पाठयति। गुरोः वचनम् प्रमाणम्। गुरौ श्रद्धा भवेत्।

शब्दअर्थव्याकरण
गुरुःगुरुप्रथमा एकवचन (कर्ता)
शिष्यान्शिष्यों कोद्वितीया बहुवचन (कर्म)
गुरोःगुरु काषष्ठी एकवचन (सम्बन्ध)
वचनम्वचनप्रथमा एकवचन (कर्ता)
गुरौगुरु मेंसप्तमी एकवचन (अधिकरण)

अनुवाद: गुरु शिष्यों को पढ़ाता है। गुरु का वचन प्रमाण है। गुरु में श्रद्धा होनी चाहिए।

याद रखें

  1. प्रथमा एकवचन = गुरुः (विसर्गान्त, राम के समान)
  2. तृतीया एकवचन = गुरुणा (णत्व) — रामेण से भिन्न
  3. चतुर्थी एकवचन = गुरवे (गुण सन्धि — उ → अव्)
  4. पञ्चमी = षष्ठी एकवचन = गुरोः (सन्दर्भ से अर्थ)
  5. सम्बोधन = हे गुरो! (गुण — उ → ओ)

अभ्यास

प्रश्न 1 / 80 सही

'गुरु' शब्द का प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप क्या है?