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इस मॉड्यूल के पाठ

स्वर सन्धि — स्वरों का मेल

अनुमानित समय: 20 मिनट

सन्धि क्या है?

सन्धि (सम् + धि) का अर्थ है ‘मेल’ या ‘जोड़’। जब दो शब्द निकट आते हैं और उनके सीमावर्ती वर्णों में परिवर्तन होता है, तो उसे सन्धि कहते हैं।

संस्कृत में सन्धि अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है — लगभग हर वाक्य में सन्धि होती है।

सन्धि तीन प्रकार की होती है:

  1. स्वर सन्धि — दो स्वरों का मेल (इस पाठ में)
  2. व्यञ्जन सन्धि — व्यञ्जन + स्वर/व्यञ्जन (अगले पाठ में)
  3. विसर्ग सन्धि — विसर्ग + स्वर/व्यञ्जन

1. सवर्ण दीर्घ सन्धि

जब दो समान (सवर्ण) स्वर मिलते हैं, तो दीर्घ स्वर बनता है:

पहला स्वरदूसरा स्वरपरिणामउदाहरण
विद्य(अ) + (अ)र्थी = विद्यार्थी
हिम(अ) + आलयः = हिमालयः
विद्या + (अ)र्थी = विद्यार्थी
विद्या + आलयः = विद्यालयः
अति + इव = अतीव
गिरि + ईशः = गिरीशः
गुरु + उपदेशः = गुरूपदेशः
लघु + ऊर्मिः = लघूर्मिः

2. गुण सन्धि

जब अ/आ के बाद इ/ई, उ/ऊ, ऋ आता है:

पहलादूसरापरिणामउदाहरण
अ/आइ/ईदेव(अ) + इन्द्रः = देवेन्द्रः
अ/आउ/ऊसूर्य(अ) + उदयः = सूर्योदयः
अ/आअर्देव(अ) + ऋषिः = देवर्षिः

3. वृद्धि सन्धि

जब अ/आ के बाद ए/ऐ, ओ/औ आता है:

पहलादूसरापरिणामउदाहरण
अ/आए/ऐएक(अ) + एकम् = एकैकम्
अ/आओ/औवन(अ) + ओषधिः = वनौषधिः

सन्धि-विच्छेद सारणी

सन्धि शब्दविच्छेदनियम
हिमालयःहिम + आलयःसवर्ण दीर्घ (अ+आ=आ)
विद्यालयःविद्या + आलयःसवर्ण दीर्घ (आ+आ=आ)
सूर्योदयःसूर्य + उदयःगुण (अ+उ=ओ)
देवेन्द्रःदेव + इन्द्रःगुण (अ+इ=ए)
महेश्वरःमहा + ईश्वरःगुण (आ+ई=ए)
एकैकम्एक + एकम्वृद्धि (अ+ए=ऐ)

मूल पाठ में प्रयोग

इन शब्दों में सन्धि पहचानें और विच्छेद करें:

देवेन्द्रः हिमालयं गच्छति। सूर्योदये सः विद्यालयं गमिष्यति।

सन्धि शब्दविच्छेदनियम
देवेन्द्रःदेव + इन्द्रःगुण (अ+इ=ए)
हिमालयम्हिम + आलयम्सवर्ण दीर्घ (अ+आ=आ)
सूर्योदयेसूर्य + उदयेगुण (अ+उ=ओ)
विद्यालयम्विद्या + आलयम्सवर्ण दीर्घ (आ+आ=आ)

अनुवाद: देवेन्द्र हिमालय जाता है। सूर्योदय पर वह विद्यालय जाएगा।

याद रखें

  1. सवर्ण दीर्घ — समान स्वर मिलें → दीर्घ (अ+अ=आ, इ+इ=ई, उ+उ=ऊ)
  2. गुण — अ/आ + इ/ई = ए, अ/आ + उ/ऊ = ओ, अ/आ + ऋ = अर्
  3. वृद्धि — अ/आ + ए/ऐ = ऐ, अ/आ + ओ/औ = औ
  4. सन्धि-विच्छेद = सन्धि को तोड़कर मूल शब्द पहचानना — यह पठन का मूल कौशल है

श्लोक अभ्यास

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। — भगवद्गीता 2.47

मूल शब्दसन्धि रूपसन्धि प्रकार
कर्मणि + एवकर्मण्येवयण् सन्धि (इ + ए = ये)
एव + अधिकारःएवाधिकारःदीर्घ सन्धि (अ + अ = आ)
ते + माते मा(सन्धि नहीं — विराम)

यह श्लोक स्वर सन्धि के व्यावहारिक प्रयोग का उत्तम उदाहरण है।

अभ्यास

प्रश्न 1 / 100 सही

'सन्धि' का शाब्दिक अर्थ क्या है?