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इस मॉड्यूल के पाठ

स्वर — संस्कृत के मूल स्वर

अनुमानित समय: 15 मिनट

स्वर क्या हैं?

संस्कृत वर्णमाला के वे वर्ण जिनका उच्चारण बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता से होता है, स्वर कहलाते हैं। ये संस्कृत भाषा की नींव हैं।

स्वरों के प्रकार

संस्कृत में स्वर तीन प्रकार के होते हैं:

1. ह्रस्व स्वर (लघु स्वर)

इनके उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता है:

स्वरउच्चारण
मुख खुलकर, कण्ठ से
तालु से, ओठ फैलाकर
ओठ गोल करके
जीभ मोड़कर, मूर्धा से
जीभ को दाँतों के पास

2. दीर्घ स्वर

इनके उच्चारण में दो मात्राओं का समय लगता है:

ह्रस्वदीर्घ

3. संयुक्त स्वर

दो स्वरों के मेल से बने स्वर:

संयुक्त स्वरनिर्माण
अ + इ
अ + ए
अ + उ
अ + ओ

सम्पूर्ण स्वर तालिका

क्रमस्वरप्रकारमात्रा
1ह्रस्व1
2दीर्घ2
3ह्रस्व1
4दीर्घ2
5ह्रस्व1
6दीर्घ2
7ह्रस्व1
8दीर्घ2
9ह्रस्व1
10संयुक्त2
11संयुक्त2
12संयुक्त2
13संयुक्त2

उदाहरण शब्द

  • मर (अमर — जो न मरे)
  • कर (आकर — आकर)
  • दम् (इदम् — यह)
  • श्वर (ईश्वर — भगवान्)
  • दक (उदक — जल)
  • र्जा (ऊर्जा — शक्ति)
  • षि (ऋषि — ऋषि)
  • कम् (एकम् — एक)
  • रावत (ऐरावत — इन्द्र का हाथी)
  • षधि (ओषधि — औषधि)
  • दार्य (औदार्य — उदारता)

मूल पाठ में प्रयोग

इन शब्दों को पढ़ें और पहचानें कि प्रत्येक शब्द का आदि (पहला) स्वर किस प्रकार का है:

शब्दअर्थआदि स्वरप्रकार
अमरजो न मरेह्रस्व
आकाशआकाशदीर्घ
इदम्यहह्रस्व
ईश्वरभगवानदीर्घ
उदयउदयह्रस्व
ऊर्जाशक्तिदीर्घ
ऋषिऋषिह्रस्व
एकम्एकसंयुक्त
ओषधिऔषधिसंयुक्त

ध्यान दें — शब्द के पहले अक्षर से ही स्वर का प्रकार पहचाना जा सकता है।

याद रखें

  1. ह्रस्व स्वर = 1 मात्रा, दीर्घ/संयुक्त = 2 मात्रा
  2. हर ह्रस्व स्वर का एक दीर्घ रूप है (अ→आ, इ→ई, उ→ऊ, ऋ→ॠ)
  3. संयुक्त स्वर सदैव दीर्घ होते हैं

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

संस्कृत में कुल कितने मूल स्वर हैं?