सम्बोधन — पुकार (हे!)
सम्बोधन = किसी को पुकारना, बुलाना, सम्बोधित करना। संस्कृत में इसे कभी-कभी ‘अष्टमी विभक्ति’ भी कहते हैं, परन्तु अधिकतर इसे प्रथमा विभक्ति का ही उपभेद माना जाता है।
कुञ्जी: सम्बोधन = “हे! अरे! भो!” — किसी को बुलाना
सम्बोधन का मूल नियम
सम्बोधन के रूप प्रथमा विभक्ति के बहुत समान हैं:
| वचन | सम्बोधन रूप | नियम |
|---|
| एकवचन | कुछ परिवर्तन | शब्द प्रकार पर निर्भर |
| द्विवचन | प्रथमा द्विवचन के समान | कोई अन्तर नहीं |
| बहुवचन | प्रथमा बहुवचन के समान | कोई अन्तर नहीं |
अर्थात् — मुख्य अन्तर केवल एकवचन में है। द्विवचन और बहुवचन में सम्बोधन = प्रथमा।
विभिन्न शब्द प्रकारों में सम्बोधन
अकारान्त पुल्लिङ्ग (राम, देव, बालक)
| प्रथमा | सम्बोधन | परिवर्तन |
|---|
| एकवचन | रामः | हे राम! | विसर्ग हटता है |
| द्विवचन | रामौ | हे रामौ! | समान |
| बहुवचन | रामाः | हे रामाः! | समान |
अकारान्त नपुंसकलिङ्ग (फल, वन)
| प्रथमा | सम्बोधन | परिवर्तन |
|---|
| एकवचन | फलम् | हे फल! | -म् हटता है |
| द्विवचन | फले | हे फले! | समान |
| बहुवचन | फलानि | हे फलानि! | समान |
आकारान्त स्त्रीलिङ्ग (लता, सीता, विद्या)
| प्रथमा | सम्बोधन | परिवर्तन |
|---|
| एकवचन | लता | हे लते! | आ → ए |
| द्विवचन | लते | हे लते! | समान |
| बहुवचन | लताः | हे लताः! | समान |
ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग (नदी, देवी, गौरी)
| प्रथमा | सम्बोधन | परिवर्तन |
|---|
| एकवचन | नदी | हे नदि! | ई → इ (ह्रस्व) |
| द्विवचन | नद्यौ | हे नद्यौ! | समान |
| बहुवचन | नद्यः | हे नद्यः! | समान |
उकारान्त पुल्लिङ्ग (गुरु, साधु, शिशु)
| प्रथमा | सम्बोधन | परिवर्तन |
|---|
| एकवचन | गुरुः | हे गुरो! | उ → ओ (गुण) |
| द्विवचन | गुरू | हे गुरू! | समान |
| बहुवचन | गुरवः | हे गुरवः! | समान |
ऋकारान्त पुल्लिङ्ग (पितृ, भ्रातृ)
| प्रथमा | सम्बोधन | परिवर्तन |
|---|
| एकवचन | पिता | हे पितः! | आ → अः (ऋ → अ) |
| द्विवचन | पितरौ | हे पितरौ! | समान |
| बहुवचन | पितरः | हे पितरः! | समान |
सम्बोधन एकवचन — सारांश सारणी
| शब्द प्रकार | मूल रूप | सम्बोधन एक. | नियम |
|---|
| पुं. अकारान्त | रामः | हे राम! | विसर्ग हटाओ |
| पुं. अकारान्त | देवः | हे देव! | विसर्ग हटाओ |
| नपुं. अकारान्त | फलम् | हे फल! | -म् हटाओ |
| स्त्री. आकारान्त | लता | हे लते! | आ → ए |
| स्त्री. आकारान्त | सीता | हे सीते! | आ → ए |
| स्त्री. ईकारान्त | देवी | हे देवि! | ई → इ (ह्रस्व) |
| पुं. उकारान्त | गुरु | हे गुरो! | उ → ओ (गुण) |
| पुं. ऋकारान्त | पिता | हे पितः! | आ → अः |
’हे’ के अतिरिक्त अन्य सम्बोधन शब्द
| शब्द | प्रयोग | उदाहरण |
|---|
| हे | सामान्य/आदरयुक्त | हे राम! |
| भो / भोः | सामान्य/आत्मीय | भो बालक! |
| रे | अनादर/तुच्छता | रे दुष्ट! |
| अरे | आश्चर्य/विस्मय | अरे! |
प्रसिद्ध सम्बोधन वाक्य
| वाक्य | अर्थ |
|---|
| हे राम! | हे राम! |
| हे देवि! | हे देवी! |
| भो मित्र! | अरे मित्र! |
| हे गुरो! नमस्ते | हे गुरुजी! आपको नमस्कार |
| हे सीते! कुत्र गच्छसि? | हे सीता! कहाँ जाती हो? |
| हे बालकाः! अत्र आगच्छत | हे बालको! यहाँ आओ |
अभ्यास वाक्य
- हे राम! अत्र आगच्छ। — हे राम! यहाँ आओ। (सम्बोधन)
- हे देवि! रक्ष माम्। — हे देवी! मेरी रक्षा करो। (सम्बोधन)
- हे गुरो! ज्ञानम् देहि। — हे गुरुजी! ज्ञान दीजिए। (सम्बोधन)
- भो बालकाः! पठत। — अरे बालको! पढ़ो। (सम्बोधन)
- हे सीते! सुन्दरा त्वम्। — हे सीता! तुम सुन्दर हो। (सम्बोधन)
- हे पितः! नमस्ते। — हे पिताजी! नमस्कार। (सम्बोधन)
मूल पाठ में प्रयोग
हे बालक! अत्र आगच्छ। हे गुरो! मम प्रश्नम् शृणु। हे देवि! अस्मान् रक्ष।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|
| बालक | हे बालक | सम्बोधन एकवचन (विसर्ग रहित) |
| गुरो | हे गुरु | सम्बोधन एकवचन (उ → ओ गुण) |
| देवि | हे देवी | सम्बोधन एकवचन (ई → इ ह्रस्व) |
| अस्मान् | हमें | द्वितीया बहुवचन (कर्म) |
अनुवाद: हे बालक! यहाँ आओ। हे गुरुजी! मेरा प्रश्न सुनिए। हे देवी! हमारी रक्षा करो।
याद रखें
- सम्बोधन = पुकार/बुलाना — हे, भो, रे के साथ
- द्विवचन और बहुवचन = प्रथमा — कोई अन्तर नहीं
- एकवचन में परिवर्तन: अकारान्त → विसर्ग हटाओ, आकारान्त → ए, ईकारान्त → इ, उकारान्त → ओ
- प्रसिद्ध: हे राम! हे देवि! हे गुरो! हे सीते! हे पितः!
- सम्बोधन कारक नहीं — यह प्रथमा का उपभेद है, पर व्यावहारिक महत्त्व बहुत है