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सम्बोधन — पुकार (हे!)

अनुमानित समय: 15 मिनट

सम्बोधन — पुकार (हे!)

सम्बोधन = किसी को पुकारना, बुलाना, सम्बोधित करना। संस्कृत में इसे कभी-कभी ‘अष्टमी विभक्ति’ भी कहते हैं, परन्तु अधिकतर इसे प्रथमा विभक्ति का ही उपभेद माना जाता है।

कुञ्जी: सम्बोधन = “हे! अरे! भो!” — किसी को बुलाना

सम्बोधन का मूल नियम

सम्बोधन के रूप प्रथमा विभक्ति के बहुत समान हैं:

वचनसम्बोधन रूपनियम
एकवचनकुछ परिवर्तनशब्द प्रकार पर निर्भर
द्विवचनप्रथमा द्विवचन के समानकोई अन्तर नहीं
बहुवचनप्रथमा बहुवचन के समानकोई अन्तर नहीं

अर्थात् — मुख्य अन्तर केवल एकवचन में है। द्विवचन और बहुवचन में सम्बोधन = प्रथमा।

विभिन्न शब्द प्रकारों में सम्बोधन

अकारान्त पुल्लिङ्ग (राम, देव, बालक)

प्रथमासम्बोधनपरिवर्तन
एकवचनरामःहे राम!विसर्ग हटता है
द्विवचनरामौहे रामौ!समान
बहुवचनरामाःहे रामाः!समान

अकारान्त नपुंसकलिङ्ग (फल, वन)

प्रथमासम्बोधनपरिवर्तन
एकवचनफलम्हे फल!-म् हटता है
द्विवचनफलेहे फले!समान
बहुवचनफलानिहे फलानि!समान

आकारान्त स्त्रीलिङ्ग (लता, सीता, विद्या)

प्रथमासम्बोधनपरिवर्तन
एकवचनलताहे लते!आ → ए
द्विवचनलतेहे लते!समान
बहुवचनलताःहे लताः!समान

ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग (नदी, देवी, गौरी)

प्रथमासम्बोधनपरिवर्तन
एकवचननदीहे नदि!ई → इ (ह्रस्व)
द्विवचननद्यौहे नद्यौ!समान
बहुवचननद्यःहे नद्यः!समान

उकारान्त पुल्लिङ्ग (गुरु, साधु, शिशु)

प्रथमासम्बोधनपरिवर्तन
एकवचनगुरुःहे गुरो!उ → ओ (गुण)
द्विवचनगुरूहे गुरू!समान
बहुवचनगुरवःहे गुरवः!समान

ऋकारान्त पुल्लिङ्ग (पितृ, भ्रातृ)

प्रथमासम्बोधनपरिवर्तन
एकवचनपिताहे पितः!आ → अः (ऋ → अ)
द्विवचनपितरौहे पितरौ!समान
बहुवचनपितरःहे पितरः!समान

सम्बोधन एकवचन — सारांश सारणी

शब्द प्रकारमूल रूपसम्बोधन एक.नियम
पुं. अकारान्तरामहे राम!विसर्ग हटाओ
पुं. अकारान्तदेवहे देव!विसर्ग हटाओ
नपुं. अकारान्तफलम्हे फल!-म् हटाओ
स्त्री. आकारान्तलतहे लत!आ → ए
स्त्री. आकारान्तसीतहे सीत!आ → ए
स्त्री. ईकारान्तदेवहे देवि!ई → इ (ह्रस्व)
पुं. उकारान्तगुरहे गुर!उ → ओ (गुण)
पुं. ऋकारान्तपिताहे पितः!आ → अः

’हे’ के अतिरिक्त अन्य सम्बोधन शब्द

शब्दप्रयोगउदाहरण
हेसामान्य/आदरयुक्तहे राम!
भो / भोःसामान्य/आत्मीयभो बालक!
रेअनादर/तुच्छतारे दुष्ट!
अरेआश्चर्य/विस्मयअरे!

प्रसिद्ध सम्बोधन वाक्य

वाक्यअर्थ
हे राम!हे राम!
हे देवि!हे देवी!
भो मित्र!अरे मित्र!
हे गुरो! नमस्तेहे गुरुजी! आपको नमस्कार
हे सीते! कुत्र गच्छसि?हे सीता! कहाँ जाती हो?
हे बालकाः! अत्र आगच्छतहे बालको! यहाँ आओ

अभ्यास वाक्य

  1. हे राम! अत्र आगच्छ। — हे राम! यहाँ आओ। (सम्बोधन)
  2. हे देवि! रक्ष माम्। — हे देवी! मेरी रक्षा करो। (सम्बोधन)
  3. हे गुरो! ज्ञानम् देहि। — हे गुरुजी! ज्ञान दीजिए। (सम्बोधन)
  4. भो बालकाः! पठत। — अरे बालको! पढ़ो। (सम्बोधन)
  5. हे सीते! सुन्दरा त्वम्। — हे सीता! तुम सुन्दर हो। (सम्बोधन)
  6. हे पितः! नमस्ते। — हे पिताजी! नमस्कार। (सम्बोधन)

मूल पाठ में प्रयोग

हे बालक! अत्र आगच्छ। हे गुरो! मम प्रश्नम् शृणु। हे देवि! अस्मान् रक्ष।

शब्दअर्थव्याकरण
बालकहे बालकसम्बोधन एकवचन (विसर्ग रहित)
गुरोहे गुरुसम्बोधन एकवचन (उ → ओ गुण)
देविहे देवीसम्बोधन एकवचन (ई → इ ह्रस्व)
अस्मान्हमेंद्वितीया बहुवचन (कर्म)

अनुवाद: हे बालक! यहाँ आओ। हे गुरुजी! मेरा प्रश्न सुनिए। हे देवी! हमारी रक्षा करो।

याद रखें

  1. सम्बोधन = पुकार/बुलाना — हे, भो, रे के साथ
  2. द्विवचन और बहुवचन = प्रथमा — कोई अन्तर नहीं
  3. एकवचन में परिवर्तन: अकारान्त → विसर्ग हटाओ, आकारान्त → ए, ईकारान्त → इ, उकारान्त → ओ
  4. प्रसिद्ध: हे राम! हे देवि! हे गुरो! हे सीते! हे पितः!
  5. सम्बोधन कारक नहीं — यह प्रथमा का उपभेद है, पर व्यावहारिक महत्त्व बहुत है

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

सम्बोधन विभक्ति का प्रयोग कब होता है?