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तृतीया विभक्ति — करण कारक

अनुमानित समय: 20 मिनट

तृतीया विभक्ति — करण कारक

तृतीया विभक्ति वाक्य में करण कारक प्रकट करती है। करण = क्रिया का साधन (instrument) — जिसकी सहायता से क्रिया सम्पन्न होती है।

कुञ्जी: करण = “किससे/कैसे/किसके द्वारा?” का उत्तर

तृतीया विभक्ति के चिह्न

शब्द प्रकारएकवचनद्विवचनबहुवचन
पुं. अकारान्त (राम)रामेणरामाभ्याम्रामैः
पुं. उकारान्त (गुरु)गुरुणागुरुभ्याम्गुरुभिः
स्त्री. आकारान्त (लता)लतयालताभ्याम्लताभिः
स्त्री. ईकारान्त (नदी)नद्यानदीभ्याम्नदीभिः
नपुं. अकारान्त (फल)फलेनफलाभ्याम्फलैः

ध्यान दें: द्विवचन में तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी — तीनों समान (-भ्याम्)।

तृतीया विभक्ति के प्रयोग

1. करण कारक — साधन (Instrument)

सबसे मूलभूत प्रयोग — क्रिया करने का साधन/उपकरण:

वाक्यकरणअर्थ
बालकः कलमेन लिखतिकलमेनकलम से लिखता है
कृषकः हलेन कर्षतिहलेनहल से जोतता है
सः नेत्रेण पश्यतिनेत्रेणआँख से देखता है
मनसा चिन्तयतिमनसामन से सोचता है

2. ‘सह’ योग — साथ (Accompaniment)

‘सह’ (साथ), ‘साकम्’ (साथ), ‘सार्धम्’ (साथ) अव्ययों के साथ तृतीया:

वाक्यअर्थ
रामेण सह सीता गच्छतिराम के साथ सीता जाती है
मित्रेण साकम् क्रीडतिमित्र के साथ खेलता है
गुरुणा सार्धम् पठतिगुरु के साथ पढ़ता है

ध्यान दें: ‘सह’ के साथ हमेशा तृतीया। ‘सह’ को वाक्य में कहीं भी रखा जा सकता है — रामेण सह गच्छति = सह रामेण गच्छति।

3. ‘विना’ योग — बिना (Without)

‘विना’ (बिना) अव्यय के साथ भी तृतीया:

वाक्यअर्थ
जलेन विना जीवनम् न सम्भवतिजल बिना जीवन सम्भव नहीं
विद्यया विना नरः पशुःविद्या बिना मनुष्य पशु है

विशेष: ‘विना’ के साथ द्वितीया या पञ्चमी भी प्रयुक्त हो सकती है, परन्तु तृतीया सर्वाधिक प्रचलित है।

4. कर्मवाच्य (Passive Voice) में कर्ता

कर्मवाच्य (passive) वाक्यों में कर्ता तृतीया में आता है:

कर्तृवाच्य (Active)कर्मवाच्य (Passive)
रामः रावणम् हन्तिरामेण रावणः हतः
गुरुः शिष्यम् पाठयतिगुरुणा शिष्यः पाठितः

अर्थ: “राम रावण को मारता है” → “राम द्वारा रावण मारा गया”

5. हेतु (Cause/Reason)

कारण बताने के लिए भी तृतीया:

वाक्यअर्थ
दुःखेन रोदितिदुःख से रोता है
भयेन कम्पतेभय से काँपता है
विद्यया विनम्रः भवतिविद्या के कारण विनम्र होता है

करण बनाम अपादान — ‘से’ का अन्तर (पुनः)

करण (तृतीया)अपादान (पञ्चमी)
अर्थसाधन / by means ofअलगाव / separation from
प्रश्नकिससे करता है?कहाँ से अलग?
उदाहरणकलमेन लिखतिवृक्षात् पतति
हिन्दीकलम से लिखता हैवृक्ष से गिरता है

अभ्यास — करण पहचानें

वाक्य 1: बालकः हस्ताभ्यां जलम् पिबति।

(बालक दोनों हाथों से जल पीता है।)

शब्दविभक्तिकारक
बालकःप्रथमाकर्ता
हस्ताभ्याम्तृतीया द्वि.करण
जलम्द्वितीयाकर्म

वाक्य 2: रामेण बाणेन रावणः हतः।

(राम द्वारा बाण से रावण मारा गया।)

शब्दविभक्तिकारक
रामेणतृतीयाकर्मवाच्य कर्ता
बाणेनतृतीयाकरण (साधन)
रावणःप्रथमाकर्मवाच्य कर्म

मूल पाठ में प्रयोग

रामेण सह लक्ष्मणः वनम् गच्छति। तौ पादाभ्याम् चलतः। रामेण बाणेन रावणः हतः।

शब्दअर्थव्याकरण
रामेण सहराम के साथतृतीया एकवचन (सह-योग)
पादाभ्याम्दोनों पैरों सेतृतीया द्विवचन (करण)
रामेणराम द्वारातृतीया एकवचन (कर्मवाच्य कर्ता)
बाणेनबाण सेतृतीया एकवचन (करण)

अनुवाद: राम के साथ लक्ष्मण वन को जाता है। वे दोनों पैरों से चलते हैं। राम द्वारा बाण से रावण मारा गया।

याद रखें

  1. तृतीया = करण — “किससे/कैसे/किसके द्वारा?” का उत्तर
  2. सह/साकम्/सार्धम् (साथ) → तृतीया — रामेण सह
  3. विना (बिना) → तृतीया — विद्यया विना
  4. कर्मवाच्य (passive) में कर्ता → तृतीया — रामेण कृतम्
  5. करण = साधन से, अपादान = अलग से — दोनों ‘से’ हैं, अर्थ भिन्न

श्लोक अभ्यास

विद्यया अमृतमश्नुते।

शब्दअर्थव्याकरण
विद्ययाविद्या से / विद्या के द्वारास्त्रीलिंग, तृतीया, एकवचन
अमृतम्मोक्ष / अमरतानपुंसकलिंग, द्वितीया, एकवचन
अश्नुतेप्राप्त करता हैअश् धातु, लट्, प्रथम पुरुष, एकवचन

इस श्लोक में विद्यया तृतीया विभक्ति (करण कारक) का उत्तम उदाहरण है — “विद्या के द्वारा अमृत प्राप्त होता है।”

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

तृतीया विभक्ति का मुख्य कारक कौन-सा है?