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इस मॉड्यूल के पाठ

मति शब्द — इकारान्त स्त्रीलिङ्ग

अनुमानित समय: 20 मिनट

मति शब्द रूप (इकारान्त स्त्रीलिङ्ग)

अभी तक आपने ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग (नदी) सीखा। अब इकारान्त (ह्रस्व इ) स्त्रीलिङ्ग सीखेंगे।

मति शब्द इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों का प्रतिनिधि है। इसका अर्थ है ‘बुद्धि’। इसके रूप सीखने से गति, श्रुति, कृति, भक्ति, शक्ति, प्रीति, रीति, स्थिति, स्मृति आदि सभी इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप आ जाते हैं।

इकारान्त बनाम ईकारान्त — मूल अन्तर

विशेषताइकारान्त (मति)ईकारान्त (नदी)
अन्तिम स्वर (ह्रस्व) (दीर्घ)
प्रथमा एक.मति (विसर्ग)नदी (बिना विसर्ग)
सप्तमी एक.मतनद्याम्
प्रथमा बहु.मतयःनद्य

ध्यान दें: दोनों में यण् सन्धि होती है (इ/ई → य्), परन्तु रूपों में कई अन्तर हैं।

सम्पूर्ण मति शब्द रूप

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमा (कर्ता)मतिःमतीमतयः
द्वितीया (कर्म)मतिम्मतीमतीः
तृतीया (करण)मत्यामतिभ्याम्मतिभिः
चतुर्थी (सम्प्रदान)मत्यैमतिभ्याम्मतिभ्यः
पञ्चमी (अपादान)मत्याःमतिभ्याम्मतिभ्यः
षष्ठी (सम्बन्ध)मत्याःमत्योःमतीनाम्
सप्तमी (अधिकरण)मतौमत्योःमतिषु
सम्बोधनहे मते!हे मती!हे मतयः!

नदी (ईकारान्त) बनाम मति (इकारान्त) — विस्तृत तुलना

विभक्तिमति (इकारान्त)नदी (ईकारान्त)अन्तर?
प्रथमा एक.मतिनदीभिन्न
द्वितीया एक.मतिम्नदीम्समान प्रकार
तृतीया एक.मत्यनद्यसमान प्रकार
चतुर्थी एक.मत्यनद्यसमान प्रकार
पञ्चमी एक.मत्याःनद्याःसमान प्रकार
षष्ठी एक.मत्याःनद्याःसमान प्रकार
सप्तमी एक.मतनद्याम्भिन्न
प्रथमा बहु.मतयःनद्यभिन्न
द्वितीया बहु.मतीःनदीःसमान
षष्ठी बहु.मतीनाम्नदीनाम्समान

सारांश: तृतीया से षष्ठी एकवचन तक रूप समान प्रकार के हैं (यण् सन्धि)। मुख्य अन्तर प्रथमा एकवचन, सप्तमी एकवचन, और प्रथमा बहुवचन में है।

पुल्लिङ्ग इकारान्त (कवि) बनाम स्त्रीलिङ्ग इकारान्त (मति)

पुल्लिङ्ग इकारान्त शब्दों (कवि, मुनि, ऋषि) के रूप मति से भिन्न हैं:

विभक्तिकवि (पुं.)मति (स्त्री.)
प्रथमा एक.कविःमतिः
द्वितीया एक.कविम्मतिम्
तृतीया एक.कविनामत्या
चतुर्थी एक.कवयेमत्यै
पञ्चमी एक.कवेःमत्याः
षष्ठी एक.कवेःमत्याः
सप्तमी एक.कवौमतौ

ध्यान दें: प्रथमा और द्वितीया एकवचन समान हैं। तृतीया से आगे रूप भिन्न हैं — पुल्लिङ्ग में गुण (इ → ए) और स्त्रीलिङ्ग में यण् सन्धि (इ → य्)।

समान शब्द (इकारान्त स्त्रीलिङ्ग)

शब्दअर्थप्रथमा एक.तृतीया एक.प्रथमा बहु.
मतिबुद्धिमतिःमत्यामतयः
गतिगति/चालगतिःगत्यागतयः
श्रुतिवेद/सुननाश्रुतिःश्रुत्याश्रुतयः
कृतिकृति/रचनाकृतिःकृत्याकृतयः
भक्तिभक्तिभक्तिःभक्त्याभक्तयः
शक्तिशक्तिशक्तिःशक्त्याशक्तयः
प्रीतिप्रेमप्रीतिःप्रीत्याप्रीतयः
रीतिरीति/ढंगरीतिःरीत्यारीतयः

अभ्यास वाक्य

  1. मतिः तीक्ष्णा अस्ति। — बुद्धि तीव्र है। (प्रथमा)
  2. बालकः मतिम् प्रयुङ्क्ते। — बालक बुद्धि का प्रयोग करता है। (द्वितीया)
  3. मत्या कार्यं करोति। — बुद्धि से काम करता है। (तृतीया)
  4. विद्या गत्यै भवति। — विद्या उन्नति के लिए होती है। (चतुर्थी)
  5. मत्याः फलम् सुखम्। — बुद्धि का फल सुख है। (षष्ठी)
  6. मतौ स्थिरता आवश्यकी। — बुद्धि में स्थिरता आवश्यक है। (सप्तमी)

मूल पाठ में प्रयोग

इन वाक्यों में मति शब्द के रूप पहचानें:

सा मत्या कार्यं करोति। मतिः तस्याः तीक्ष्णा अस्ति। मतौ सदा स्थिरता भवेत्।

शब्दअर्थव्याकरण
मत्याबुद्धि सेतृतीया एकवचन (करण)
कार्यम्काम कोद्वितीया एकवचन (कर्म)
मतिःबुद्धिप्रथमा एकवचन (कर्ता)
तस्याःउसकीषष्ठी एकवचन (सम्बन्ध)
मतौबुद्धि मेंसप्तमी एकवचन (अधिकरण)

अनुवाद: वह बुद्धि से काम करती है। उसकी बुद्धि तीक्ष्ण है। बुद्धि में सदा स्थिरता होनी चाहिए।

याद रखें

  1. प्रथमा एकवचन = मतिः (विसर्गान्त) — नदी से भिन्न
  2. तृतीया से आगे इ → य् (यण् सन्धि) — मत्या, मत्यै, मत्याः
  3. सप्तमी एकवचन = मतौ (न कि मत्याम्) — नदी में नद्याम् होता है
  4. प्रथमा बहुवचन = मतयः (इ → अयः) — नदी में नद्यः
  5. गति, भक्ति, शक्ति, प्रीति — सभी इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द इसी प्रकार चलते हैं

अभ्यास

प्रश्न 1 / 80 सही

'मति' शब्द का प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप क्या है?