मति शब्द — इकारान्त स्त्रीलिङ्ग
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मति शब्द रूप (इकारान्त स्त्रीलिङ्ग)
अभी तक आपने ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग (नदी) सीखा। अब इकारान्त (ह्रस्व इ) स्त्रीलिङ्ग सीखेंगे।
मति शब्द इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों का प्रतिनिधि है। इसका अर्थ है ‘बुद्धि’। इसके रूप सीखने से गति, श्रुति, कृति, भक्ति, शक्ति, प्रीति, रीति, स्थिति, स्मृति आदि सभी इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों के रूप आ जाते हैं।
इकारान्त बनाम ईकारान्त — मूल अन्तर
| विशेषता | इकारान्त (मति) | ईकारान्त (नदी) |
|---|---|---|
| अन्तिम स्वर | इ (ह्रस्व) | ई (दीर्घ) |
| प्रथमा एक. | मतिः (विसर्ग) | नदी (बिना विसर्ग) |
| सप्तमी एक. | मतौ | नद्याम् |
| प्रथमा बहु. | मतयः | नद्यः |
ध्यान दें: दोनों में यण् सन्धि होती है (इ/ई → य्), परन्तु रूपों में कई अन्तर हैं।
सम्पूर्ण मति शब्द रूप
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा (कर्ता) | मतिः | मती | मतयः |
| द्वितीया (कर्म) | मतिम् | मती | मतीः |
| तृतीया (करण) | मत्या | मतिभ्याम् | मतिभिः |
| चतुर्थी (सम्प्रदान) | मत्यै | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| पञ्चमी (अपादान) | मत्याः | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| षष्ठी (सम्बन्ध) | मत्याः | मत्योः | मतीनाम् |
| सप्तमी (अधिकरण) | मतौ | मत्योः | मतिषु |
| सम्बोधन | हे मते! | हे मती! | हे मतयः! |
नदी (ईकारान्त) बनाम मति (इकारान्त) — विस्तृत तुलना
| विभक्ति | मति (इकारान्त) | नदी (ईकारान्त) | अन्तर? |
|---|---|---|---|
| प्रथमा एक. | मतिः | नदी | भिन्न |
| द्वितीया एक. | मतिम् | नदीम् | समान प्रकार |
| तृतीया एक. | मत्या | नद्या | समान प्रकार |
| चतुर्थी एक. | मत्यै | नद्यै | समान प्रकार |
| पञ्चमी एक. | मत्याः | नद्याः | समान प्रकार |
| षष्ठी एक. | मत्याः | नद्याः | समान प्रकार |
| सप्तमी एक. | मतौ | नद्याम् | भिन्न |
| प्रथमा बहु. | मतयः | नद्यः | भिन्न |
| द्वितीया बहु. | मतीः | नदीः | समान |
| षष्ठी बहु. | मतीनाम् | नदीनाम् | समान |
सारांश: तृतीया से षष्ठी एकवचन तक रूप समान प्रकार के हैं (यण् सन्धि)। मुख्य अन्तर प्रथमा एकवचन, सप्तमी एकवचन, और प्रथमा बहुवचन में है।
पुल्लिङ्ग इकारान्त (कवि) बनाम स्त्रीलिङ्ग इकारान्त (मति)
पुल्लिङ्ग इकारान्त शब्दों (कवि, मुनि, ऋषि) के रूप मति से भिन्न हैं:
| विभक्ति | कवि (पुं.) | मति (स्त्री.) |
|---|---|---|
| प्रथमा एक. | कविः | मतिः |
| द्वितीया एक. | कविम् | मतिम् |
| तृतीया एक. | कविना | मत्या |
| चतुर्थी एक. | कवये | मत्यै |
| पञ्चमी एक. | कवेः | मत्याः |
| षष्ठी एक. | कवेः | मत्याः |
| सप्तमी एक. | कवौ | मतौ |
ध्यान दें: प्रथमा और द्वितीया एकवचन समान हैं। तृतीया से आगे रूप भिन्न हैं — पुल्लिङ्ग में गुण (इ → ए) और स्त्रीलिङ्ग में यण् सन्धि (इ → य्)।
समान शब्द (इकारान्त स्त्रीलिङ्ग)
| शब्द | अर्थ | प्रथमा एक. | तृतीया एक. | प्रथमा बहु. |
|---|---|---|---|---|
| मति | बुद्धि | मतिः | मत्या | मतयः |
| गति | गति/चाल | गतिः | गत्या | गतयः |
| श्रुति | वेद/सुनना | श्रुतिः | श्रुत्या | श्रुतयः |
| कृति | कृति/रचना | कृतिः | कृत्या | कृतयः |
| भक्ति | भक्ति | भक्तिः | भक्त्या | भक्तयः |
| शक्ति | शक्ति | शक्तिः | शक्त्या | शक्तयः |
| प्रीति | प्रेम | प्रीतिः | प्रीत्या | प्रीतयः |
| रीति | रीति/ढंग | रीतिः | रीत्या | रीतयः |
अभ्यास वाक्य
- मतिः तीक्ष्णा अस्ति। — बुद्धि तीव्र है। (प्रथमा)
- बालकः मतिम् प्रयुङ्क्ते। — बालक बुद्धि का प्रयोग करता है। (द्वितीया)
- मत्या कार्यं करोति। — बुद्धि से काम करता है। (तृतीया)
- विद्या गत्यै भवति। — विद्या उन्नति के लिए होती है। (चतुर्थी)
- मत्याः फलम् सुखम्। — बुद्धि का फल सुख है। (षष्ठी)
- मतौ स्थिरता आवश्यकी। — बुद्धि में स्थिरता आवश्यक है। (सप्तमी)
मूल पाठ में प्रयोग
इन वाक्यों में मति शब्द के रूप पहचानें:
सा मत्या कार्यं करोति। मतिः तस्याः तीक्ष्णा अस्ति। मतौ सदा स्थिरता भवेत्।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| मत्या | बुद्धि से | तृतीया एकवचन (करण) |
| कार्यम् | काम को | द्वितीया एकवचन (कर्म) |
| मतिः | बुद्धि | प्रथमा एकवचन (कर्ता) |
| तस्याः | उसकी | षष्ठी एकवचन (सम्बन्ध) |
| मतौ | बुद्धि में | सप्तमी एकवचन (अधिकरण) |
अनुवाद: वह बुद्धि से काम करती है। उसकी बुद्धि तीक्ष्ण है। बुद्धि में सदा स्थिरता होनी चाहिए।
याद रखें
- प्रथमा एकवचन = मतिः (विसर्गान्त) — नदी से भिन्न
- तृतीया से आगे इ → य् (यण् सन्धि) — मत्या, मत्यै, मत्याः
- सप्तमी एकवचन = मतौ (न कि मत्याम्) — नदी में नद्याम् होता है
- प्रथमा बहुवचन = मतयः (इ → अयः) — नदी में नद्यः
- गति, भक्ति, शक्ति, प्रीति — सभी इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द इसी प्रकार चलते हैं
अभ्यास
'मति' शब्द का प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप क्या है?