तुदादि गण — लट् लकार
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तुदादि गण — छठा गण
तुदादि गण = छठा गण (6th conjugation class)। ‘तुदादि’ = तुद् + आदि = ‘तुद्’ धातु (पीड़ा देना) से शुरू होने वाला समूह।
तुदादि गण की विशेषता
तुदादि गण में भी ‘-अ-’ विकरण जुड़ता है, भ्वादि गण की तरह। परन्तु महत्त्वपूर्ण अन्तर है:
| गण | विकरण | गुण? | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| भ्वादि (1st) | -अ- (शप्) | हाँ, गुण होता है | भू → भवति (ऊ → ओ → अव) |
| तुदादि (6th) | -अ- (शप्) | नहीं, गुण नहीं | तुद् → तुदति (कोई बदलाव नहीं) |
भ्वादि में धातु स्वर का गुण होता है, तुदादि में धातु जैसी-की-तैसी रहती है।
प्रमुख तुदादि धातुएँ
| धातु | अर्थ | लट् प्र.पु.ए. |
|---|---|---|
| तुद् | पीड़ा देना | तुदति |
| लिख् | लिखना | लिखति |
| विश् | प्रवेश करना | विशति |
| सृज् | रचना करना | सृजति |
| मुच् | छोड़ना | मुञ्चति |
| कृष् | खींचना | कृषति |
| स्पृश् | छूना | स्पृशति |
तुद् धातु — लट् लकार (9 रूप)
तुद् + अ = तुद-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष (वह/वे) | तुदति | तुदतः | तुदन्ति |
| मध्यम पुरुष (तू/तुम) | तुदसि | तुदथः | तुदथ |
| उत्तम पुरुष (मैं/हम) | तुदामि | तुदावः | तुदामः |
लिख् धातु — लट् लकार
लिख् + अ = लिख-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | लिखति | लिखतः | लिखन्ति |
| मध्यम पुरुष | लिखसि | लिखथः | लिखथ |
| उत्तम पुरुष | लिखामि | लिखावः | लिखामः |
विश् धातु — लट् लकार
विश् + अ = विश-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | विशति | विशतः | विशन्ति |
| मध्यम पुरुष | विशसि | विशथः | विशथ |
| उत्तम पुरुष | विशामि | विशावः | विशामः |
सृज् धातु — लट् लकार
सृज् + अ = सृज-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | सृजति | सृजतः | सृजन्ति |
| मध्यम पुरुष | सृजसि | सृजथः | सृजथ |
| उत्तम पुरुष | सृजामि | सृजावः | सृजामः |
तीन गणों की तुलना (प्र.पु.)
| भ्वादि: भू | दिवादि: नश् | तुदादि: तुद् | |
|---|---|---|---|
| एकवचन | भवति | नश्यति | तुदति |
| द्विवचन | भवतः | नश्यतः | तुदतः |
| बहुवचन | भवन्ति | नश्यन्ति | तुदन्ति |
- भ्वादि: गुण (भू → भव) + -अ-
- दिवादि: -य- विकरण
- तुदादि: -अ- विकरण, बिना गुण
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| छात्रः पत्रं लिखति | छात्र पत्र लिखता है |
| जनाः गृहं विशन्ति | लोग घर में प्रवेश करते हैं |
| ब्रह्मा विश्वं सृजति | ब्रह्मा विश्व की रचना करता है |
| सः माम् तुदति | वह मुझे पीड़ा देता है |
मूल पाठ में प्रयोग
छात्रः विद्यालयं विशति। सः आसने उपविशति। गुरोः वचनं श्रुत्वा पुस्तकं लिखति। सायं गृहं प्रविशति।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| विशति | (वह) प्रवेश करता है | विश्, लट्, प्र.पु.ए. |
| उपविशति | (वह) बैठता है | उपविश्, लट्, प्र.पु.ए. |
| लिखति | (वह) लिखता है | लिख्, लट्, प्र.पु.ए. |
| प्रविशति | (वह) प्रवेश करता है | प्रविश्, लट्, प्र.पु.ए. |
अनुवाद: छात्र विद्यालय में प्रवेश करता है। वह आसन पर बैठता है। गुरु के वचन सुनकर पुस्तक में लिखता है। शाम को घर प्रवेश करता है।
याद रखें
- तुदादि गण = छठा गण। विकरण = ‘-अ-’ (भ्वादि जैसा, पर बिना गुण)
- धातु + अ + पुरुष प्रत्यय: तुद् + अ + ति = तुदति (गुण नहीं!)
- भ्वादि में गुण होता है (भू → भव), तुदादि में नहीं (तुद् → तुद)
- प्रमुख धातुएँ: लिखति (लिखता है), विशति (प्रवेश करता है), सृजति (रचता है), तुदति (पीड़ा देता है)
अभ्यास
प्रश्न 1 / 90 सही
तुदादि गण कौन-सा गण है?