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इस मॉड्यूल के पाठ

तुदादि गण — लट् लकार

अनुमानित समय: 18 मिनट

तुदादि गण — छठा गण

तुदादि गण = छठा गण (6th conjugation class)। ‘तुदादि’ = तुद् + आदि = ‘तुद्’ धातु (पीड़ा देना) से शुरू होने वाला समूह।

तुदादि गण की विशेषता

तुदादि गण में भी ‘-अ-’ विकरण जुड़ता है, भ्वादि गण की तरह। परन्तु महत्त्वपूर्ण अन्तर है:

गणविकरणगुण?उदाहरण
भ्वादि (1st)-अ- (शप्)हाँ, गुण होता हैभू → भवति (ऊ → ओ → अव)
तुदादि (6th)-अ- (शप्)नहीं, गुण नहींतुद् → तुदति (कोई बदलाव नहीं)

भ्वादि में धातु स्वर का गुण होता है, तुदादि में धातु जैसी-की-तैसी रहती है।

प्रमुख तुदादि धातुएँ

धातुअर्थलट् प्र.पु.ए.
तुद्पीड़ा देनातुदति
लिख्लिखनालिखति
विश्प्रवेश करनाविशति
सृज्रचना करनासृजति
मुच्छोड़नामुञ्चति
कृष्खींचनाकृषति
स्पृश्छूनास्पृशति

तुद् धातु — लट् लकार (9 रूप)

तुद् + अ = तुद-

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुष (वह/वे)तुदतितुदतःतुदन्ति
मध्यम पुरुष (तू/तुम)तुदसितुदथःतुदथ
उत्तम पुरुष (मैं/हम)तुदामितुदावःतुदामः

लिख् धातु — लट् लकार

लिख् + अ = लिख-

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषलिखतिलिखतःलिखन्ति
मध्यम पुरुषलिखसिलिखथःलिखथ
उत्तम पुरुषलिखामिलिखावःलिखामः

विश् धातु — लट् लकार

विश् + अ = विश-

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषविशतिविशतःविशन्ति
मध्यम पुरुषविशसिविशथःविशथ
उत्तम पुरुषविशामिविशावःविशामः

सृज् धातु — लट् लकार

सृज् + अ = सृज-

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषसृजतिसृजतःसृजन्ति
मध्यम पुरुषसृजसिसृजथःसृजथ
उत्तम पुरुषसृजामिसृजावःसृजामः

तीन गणों की तुलना (प्र.पु.)

भ्वादि: भूदिवादि: नश्तुदादि: तुद्
एकवचनभवतिनश्तितुदति
द्विवचनभवतःनश्तःतुदतः
बहुवचनभवन्तिनश्न्तितुदन्ति
  • भ्वादि: गुण (भू → भव) + -अ-
  • दिवादि: -य- विकरण
  • तुदादि: -अ- विकरण, बिना गुण

उदाहरण वाक्य

संस्कृतअर्थ
छात्रः पत्रं लिखतिछात्र पत्र लिखता है
जनाः गृहं विशन्तिलोग घर में प्रवेश करते हैं
ब्रह्मा विश्वं सृजतिब्रह्मा विश्व की रचना करता है
सः माम् तुदतिवह मुझे पीड़ा देता है

मूल पाठ में प्रयोग

छात्रः विद्यालयं विशति। सः आसने उपविशति। गुरोः वचनं श्रुत्वा पुस्तकं लिखति। सायं गृहं प्रविशति।

शब्दअर्थव्याकरण
विशति(वह) प्रवेश करता हैविश्, लट्, प्र.पु.ए.
उपविशति(वह) बैठता हैउपविश्, लट्, प्र.पु.ए.
लिखति(वह) लिखता हैलिख्, लट्, प्र.पु.ए.
प्रविशति(वह) प्रवेश करता हैप्रविश्, लट्, प्र.पु.ए.

अनुवाद: छात्र विद्यालय में प्रवेश करता है। वह आसन पर बैठता है। गुरु के वचन सुनकर पुस्तक में लिखता है। शाम को घर प्रवेश करता है।

याद रखें

  1. तुदादि गण = छठा गण। विकरण = ‘-अ-’ (भ्वादि जैसा, पर बिना गुण)
  2. धातु + अ + पुरुष प्रत्यय: तुद् + अ + ति = तुदति (गुण नहीं!)
  3. भ्वादि में गुण होता है (भू → भव), तुदादि में नहीं (तुद् → तुद)
  4. प्रमुख धातुएँ: लिखति (लिखता है), विशति (प्रवेश करता है), सृजति (रचता है), तुदति (पीड़ा देता है)

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

तुदादि गण कौन-सा गण है?