आ-उपसर्ग और भक्षय् धातु — आना और खाना
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आ-उपसर्ग — ‘जाना’ से ‘आना’
गम् धातु का अर्थ है ‘जाना’। इसके आगे आ उपसर्ग लगाने से अर्थ ‘आना’ हो जाता है:
| पुरुष | सर्वनाम | वर्तमान (लट्) | भविष्यत् (लृट्) |
|---|---|---|---|
| गम् (जाना) | |||
| प्रथम पुरुष | सः | गच्छति | गमिष्यति |
| मध्यम पुरुष | त्वम् | गच्छसि | गमिष्यसि |
| उत्तम पुरुष | अहम् | गच्छामि | गमिष्यामि |
| आगम् (आना) | |||
| प्रथम पुरुष | सः | आगच्छति | आगमिष्यति |
| मध्यम पुरुष | त्वम् | आगच्छसि | आगमिष्यसि |
| उत्तम पुरुष | अहम् | आगच्छामि | आगमिष्यामि |
ध्यान दें — रूप बिलकुल वैसे ही बनते हैं, बस आगे आ जुड़ जाता है।
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः आगच्छति | वह आता है |
| त्वं कदा आगमिष्यसि? | तू कब आएगा? |
| यदा त्वं वनं गमिष्यसि तदा अहम् अपि आगमिष्यामि | जब तू वन को जाएगा तब मैं भी आऊँगा |
अपि, नहि, च — अव्यय
| शब्द | अर्थ | प्रयोग |
|---|---|---|
| अपि | भी | अहम् अपि आगमिष्यामि — मैं भी आऊँगा |
| नहि | नहीं | सः नहि आगमिष्यति — वह नहीं आएगा |
| च | और | प्रातः गमिष्यामि सायं च आगमिष्यामि — सवेरे जाऊँगा और शाम को आऊँगा |
‘च’ सदा दूसरे शब्द या वाक्यांश के बाद आता है (हिन्दी के ‘और’ की तरह नहीं, जो बीच में आता है)।
भक्षय् धातु — खाना
| सर्वनाम | पुरुष | वर्तमान (लट्) | अर्थ | भविष्यत् (लृट्) | अर्थ |
|---|---|---|---|---|---|
| सः | प्रथम पुरुष | भक्षयति | वह खाता है | भक्षयिष्यति | वह खाएगा |
| त्वम् | मध्यम पुरुष | भक्षयसि | तू खाता है | भक्षयिष्यसि | तू खाएगा |
| अहम् | उत्तम पुरुष | भक्षयामि | मैं खाता हूँ | भक्षयिष्यामि | मैं खाऊँगा |
भोजन शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अन्नम् | अन्न |
| फलम् | फल |
| मोदकम् | लड्डू |
| ओदनम् | चावल |
| मुद्गौदनम् | खिचड़ी |
| आम्रम् | आम |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः अन्नं भक्षयति | वह अन्न खाता है |
| त्वं मोदकं भक्षयसि | तू लड्डू खाता है |
| अहं फलं भक्षयामि | मैं फल खाता हूँ |
| सः ओदनं भक्षयिष्यति | वह चावल खाएगा |
| अहं मुद्गौदनं भक्षयिष्यामि | मैं खिचड़ी खाऊँगा |
संयुक्त वाक्य — ‘च’ का प्रयोग
च से दो क्रियाओं को जोड़ सकते हैं:
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| अहं प्रातः गमिष्यामि सायं च आगमिष्यामि | मैं सवेरे जाऊँगा और शाम को आऊँगा |
| अहं तत्र गमिष्यामि फलं च भक्षयिष्यामि | मैं वहाँ जाऊँगा और फल खाऊँगा |
| सः गृहं गमिष्यति मोदकं च भक्षयिष्यति | वह घर जाएगा और लड्डू खाएगा |
मूल पाठ में प्रयोग
इन वाक्यों को पढ़ें — यहाँ केवल वही व्याकरण प्रयुक्त है जो अब तक सीखा है:
सः प्रातः नगरं गच्छति फलं च भक्षयति। सायं सः गृहम् आगच्छति।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| सः | वह | प्रथम पुरुष सर्वनाम |
| प्रातः | सवेरे | काल-वाचक अव्यय |
| नगरम् | नगर को | द्वितीया विभक्ति |
| गच्छति | (वह) जाता है | गम् धातु, लट्, प्रथम पुरुष |
| फलम् | फल को | द्वितीया विभक्ति |
| च | और | समुच्चयबोधक अव्यय |
| भक्षयति | (वह) खाता है | भक्षय् धातु, लट्, प्रथम पुरुष |
| सायम् | शाम को | काल-वाचक अव्यय |
| गृहम् | घर को | द्वितीया विभक्ति |
| आगच्छति | (वह) आता है | आगम् धातु, लट्, प्रथम पुरुष |
अन्वय: सः प्रातः नगरम् गच्छति फलम् च भक्षयति। सायम् सः गृहम् आगच्छति।
अनुवाद: वह सवेरे नगर जाता है और फल खाता है। शाम को वह घर आता है।
याद रखें
- आ + गम् = आगम् — ‘आ’ उपसर्ग ‘जाना’ को ‘आना’ में बदलता है
- भक्षय् धातु के रूप: भक्षय-ति/-सि/-मि (वर्तमान), भक्षयिष्य-ति/-सि/-मि (भविष्यत्)
- च = और — सदा दूसरे शब्द/वाक्यांश के बाद आता है
- अपि = भी, नहि = नहीं — ये भी अव्यय हैं
अभ्यास
प्रश्न 1 / 90 सही
'आगच्छति' का क्या अर्थ है?