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इस मॉड्यूल के पाठ

आ-उपसर्ग और भक्षय् धातु — आना और खाना

अनुमानित समय: 15 मिनट

आ-उपसर्ग — ‘जाना’ से ‘आना’

गम् धातु का अर्थ है ‘जाना’। इसके आगे उपसर्ग लगाने से अर्थ ‘आना’ हो जाता है:

पुरुषसर्वनामवर्तमान (लट्)भविष्यत् (लृट्)
गम् (जाना)
प्रथम पुरुषसःगच्छतिगमिष्यति
मध्यम पुरुषत्वम्गच्छसिगमिष्यसि
उत्तम पुरुषअहम्गच्छामिगमिष्यामि
आगम् (आना)
प्रथम पुरुषसःआगच्छतिआगमिष्यति
मध्यम पुरुषत्वम्आगच्छसिआगमिष्यसि
उत्तम पुरुषअहम्आगच्छामिआगमिष्यामि

ध्यान दें — रूप बिलकुल वैसे ही बनते हैं, बस आगे जुड़ जाता है।

उदाहरण वाक्य

संस्कृतअर्थ
सः आगच्छतिवह आता है
त्वं कदा आगमिष्यसि?तू कब आएगा?
यदा त्वं वनं गमिष्यसि तदा अहम् अपि आगमिष्यामिजब तू वन को जाएगा तब मैं भी आऊँगा

अपि, नहि, च — अव्यय

शब्दअर्थप्रयोग
अपिभीअहम् अपि आगमिष्यामि — मैं भी आऊँगा
नहिनहींसः नहि आगमिष्यति — वह नहीं आएगा
औरप्रातः गमिष्यामि सायं आगमिष्यामि — सवेरे जाऊँगा और शाम को आऊँगा

‘च’ सदा दूसरे शब्द या वाक्यांश के बाद आता है (हिन्दी के ‘और’ की तरह नहीं, जो बीच में आता है)।

भक्षय् धातु — खाना

सर्वनामपुरुषवर्तमान (लट्)अर्थभविष्यत् (लृट्)अर्थ
सःप्रथम पुरुषभक्षयतिवह खाता हैभक्षयिष्यतिवह खाएगा
त्वम्मध्यम पुरुषभक्षयसितू खाता हैभक्षयिष्यसितू खाएगा
अहम्उत्तम पुरुषभक्षयामिमैं खाता हूँभक्षयिष्यामिमैं खाऊँगा

भोजन शब्द

शब्दअर्थ
अन्नम्अन्न
फलम्फल
मोदकम्लड्डू
ओदनम्चावल
मुद्गौदनम्खिचड़ी
आम्रम्आम

उदाहरण वाक्य

संस्कृतअर्थ
सः अन्नं भक्षयतिवह अन्न खाता है
त्वं मोदकं भक्षयसितू लड्डू खाता है
अहं फलं भक्षयामिमैं फल खाता हूँ
सः ओदनं भक्षयिष्यतिवह चावल खाएगा
अहं मुद्गौदनं भक्षयिष्यामिमैं खिचड़ी खाऊँगा

संयुक्त वाक्य — ‘च’ का प्रयोग

से दो क्रियाओं को जोड़ सकते हैं:

संस्कृतअर्थ
अहं प्रातः गमिष्यामि सायं च आगमिष्यामिमैं सवेरे जाऊँगा और शाम को आऊँगा
अहं तत्र गमिष्यामि फलं च भक्षयिष्यामिमैं वहाँ जाऊँगा और फल खाऊँगा
सः गृहं गमिष्यति मोदकं च भक्षयिष्यतिवह घर जाएगा और लड्डू खाएगा

मूल पाठ में प्रयोग

इन वाक्यों को पढ़ें — यहाँ केवल वही व्याकरण प्रयुक्त है जो अब तक सीखा है:

सः प्रातः नगरं गच्छति फलं च भक्षयति। सायं सः गृहम् आगच्छति।

शब्दअर्थव्याकरण
सःवहप्रथम पुरुष सर्वनाम
प्रातःसवेरेकाल-वाचक अव्यय
नगरम्नगर कोद्वितीया विभक्ति
गच्छति(वह) जाता हैगम् धातु, लट्, प्रथम पुरुष
फलम्फल कोद्वितीया विभक्ति
औरसमुच्चयबोधक अव्यय
भक्षयति(वह) खाता हैभक्षय् धातु, लट्, प्रथम पुरुष
सायम्शाम कोकाल-वाचक अव्यय
गृहम्घर कोद्वितीया विभक्ति
आगच्छति(वह) आता हैआगम् धातु, लट्, प्रथम पुरुष

अन्वय: सः प्रातः नगरम् गच्छति फलम् च भक्षयति। सायम् सः गृहम् आगच्छति।

अनुवाद: वह सवेरे नगर जाता है और फल खाता है। शाम को वह घर आता है।

याद रखें

  1. आ + गम् = आगम् — ‘आ’ उपसर्ग ‘जाना’ को ‘आना’ में बदलता है
  2. भक्षय् धातु के रूप: भक्षय-ति/-सि/-मि (वर्तमान), भक्षयिष्य-ति/-सि/-मि (भविष्यत्)
  3. = और — सदा दूसरे शब्द/वाक्यांश के बाद आता है
  4. अपि = भी, नहि = नहीं — ये भी अव्यय हैं

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

'आगच्छति' का क्या अर्थ है?