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इस मॉड्यूल के पाठ

देव शब्द — अकारान्त पुल्लिङ्ग

अनुमानित समय: 15 मिनट

देव शब्द रूप (अकारान्त पुल्लिङ्ग)

देव शब्द ‘राम’ की भाँति अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्द है। इसके रूप सीखने से बालक, नर, गज, वृक्ष, ग्राम, लोक आदि सभी अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों के रूप आ जाते हैं।

राम और देव — प्रत्यय समान हैं

राम शब्द के रूप आप पिछले पाठ में सीख चुके हैं। देव शब्द में वही प्रत्यय लगते हैं। केवल एक छोटा अन्तर है — तृतीया एकवचन में:

  • राम → रामएण (ण-त्व नियम: र के बाद ण)
  • देव → देवएन (कोई र नहीं, इसलिए न)

सम्पूर्ण देव शब्द रूप

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमा (कर्ता)देवःदेवौदेवाः
द्वितीया (कर्म)देवम्देवौदेवान्
तृतीया (करण)देवेनदेवाभ्याम्देवैः
चतुर्थी (सम्प्रदान)देवायदेवाभ्याम्देवेभ्यः
पञ्चमी (अपादान)देवात्देवाभ्याम्देवेभ्यः
षष्ठी (सम्बन्ध)देवस्यदेवयोःदेवानाम्
सप्तमी (अधिकरण)देवेदेवयोःदेवेषु
सम्बोधनहे देव!हे देवौ!हे देवाः!

राम बनाम देव — तुलना सारणी

विभक्तिरामदेवअन्तर
प्रथमा एक.रामःदेवःसमान
द्वितीया एक.रामम्देवम्समान
तृतीया एक.रामएणदेवएनण/न
चतुर्थी एक.रामायदेवायसमान
पञ्चमी एक.रामात्देवात्समान
षष्ठी एक.रामस्यदेवस्यसमान
षष्ठी बहु.रामाणाम्देवानाम्ण/न

ण-त्व नियम: यदि शब्द में ‘र’ या ‘ष’ हो तो ‘न’ → ‘ण’ बन जाता है। ‘राम’ में ‘र’ है, इसलिए रामेण, रामाणाम्। ‘देव’ में ‘र’ नहीं है, इसलिए देवेन, देवानाम्।

समान शब्दों के रूप

ये शब्द भी देव की भाँति चलते हैं (अकारान्त पुल्लिङ्ग):

शब्दअर्थतृतीया एक.षष्ठी बहु.
बालकबालकबालकेनबालकानाम्
नरमनुष्यनरेणनराणाम्
गजहाथीगजेनगजानाम्
वृक्षपेड़वृक्षेणवृक्षाणाम्
ग्रामगाँवग्रामेणग्रामाणाम्
लोकसंसारलोकेनलोकानाम्

ध्यान दें: ‘नर’, ‘वृक्ष’, ‘ग्राम’ में ‘र’ है → ण (नरेण, वृक्षेण, ग्रामेण)। ‘बालक’, ‘गज’, ‘लोक’ में र नहीं → न (बालकेन, गजेन, लोकेन)।

अभ्यास वाक्य

  1. देवः स्वर्गे वसति। — देव स्वर्ग में रहता है।
  2. देवम् नमामि। — मैं देव को नमस्कार करता हूँ।
  3. देवेन वरः दत्तः। — देव द्वारा वर दिया गया।
  4. देवाय पुष्पम् अर्पयामि। — देव के लिए पुष्प अर्पित करता हूँ।
  5. देवस्य कृपा अस्ति। — देव की कृपा है।
  6. देवेषु विष्णुः श्रेष्ठः। — देवों में विष्णु श्रेष्ठ हैं।

मूल पाठ में प्रयोग

इन वाक्यों में देव शब्द के रूप पहचानें:

देवः स्वर्गात् पृथिवीम् आगच्छति। देवस्य रथः देवाभ्यां सेवितः।

शब्दअर्थव्याकरण
देवःदेवप्रथमा विभक्ति, एकवचन (कर्ता)
स्वर्गात्स्वर्ग सेपञ्चमी विभक्ति, एकवचन (अपादान)
पृथिवीम्पृथ्वी कोद्वितीया विभक्ति, एकवचन (कर्म)
देवस्यदेव काषष्ठी विभक्ति, एकवचन (सम्बन्ध)
देवाभ्याम्दो देवों द्वारातृतीया विभक्ति, द्विवचन (करण)

अनुवाद: देव स्वर्ग से पृथ्वी पर आता है। देव का रथ दो देवों द्वारा सेवित है।

याद रखें

  1. देव शब्द = राम शब्द — प्रत्यय समान हैं
  2. अन्तर केवल ण-त्व नियम के कारण: रामेण/देवेन, रामाणाम्/देवानाम्
  3. द्विवचन में तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी — तीनों देवाभ्याम्
  4. द्विवचन में षष्ठी और सप्तमी — दोनों देवयोः
  5. बहुवचन में चतुर्थी और पञ्चमी — दोनों देवेभ्यः

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

'देव' शब्द का प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप क्या है?