मुख्य सामग्री पर जाएँ
इस मॉड्यूल के पाठ

उपसर्ग परिचय — धातु + उपसर्ग

अनुमानित समय: 15 मिनट

उपसर्ग क्या है?

उपसर्ग (verbal prefix) वे शब्दांश हैं जो धातु (verb root) के पहले जुड़कर उसके अर्थ को परिवर्तित, विस्तृत या पूर्णतया बदल देते हैं।

उपसर्गेण धात्वर्थो बलादन्यत्र नीयते। प्रहाराहारसंहारविहारपरिहारवत्॥

अर्थात्: उपसर्ग से धातु का अर्थ बलपूर्वक अन्यत्र ले जाया जाता है — जैसे ‘हृ’ धातु से: प्रहार, आहार, संहार, विहार, परिहार — सब भिन्न अर्थ!

एक धातु, अनेक उपसर्ग — अनेक अर्थ

’हृ’ धातु (ले जाना / to carry)

उपसर्ग + हृशब्दअर्थ
प्र + हृप्रहारआगे ले जाना → मारना/प्रहार
+ हृआहारओर ले आना → भोजन/आहार
सम् + हृसंहारसाथ समेटना → संहार/नाश
वि + हृविहारविशेष रूप ले जाना → विहार/भ्रमण
परि + हृपरिहारचारों ओर ले जाना → बचाव/त्याग
उप + हृउपहारपास ले जाना → भेंट/उपहार

’गम्’ धातु (जाना / to go)

उपसर्ग + गम्रूपअर्थ
मूल गम्गच्छतिजाता है
+ गम्आगच्छतिआता है
प्र + गम्प्रगच्छतिआगे बढ़ता है
उद् + गम्उद्गच्छतिऊपर उठता है
अव + गम्अवगच्छतिसमझता है
सम् + गम्संगच्छतेमिलता है
निर् + गम्निर्गच्छतिबाहर निकलता है
अनु + गम्अनुगच्छतिपीछे जाता है
प्रति + गम्प्रतिगच्छतिलौटता है
उप + गम्उपगच्छतिपास जाता है

22 उपसर्गों की पूर्ण सूची

पाणिनि ने प्रादयः (1.4.58) सूत्र में 22 उपसर्ग बताए हैं:

क्र.उपसर्गमूल अर्थप्रचलित शब्द
1प्रआगे, अधिकप्रगति, प्रवेश, प्रकाश
2परादूर, पूर्णतयापराजय, पराभव, पराक्रम
3अपदूर, हटकरअपमान, अपकार, अपवाद
4सम्साथ, भली प्रकारसंगम, संस्कार, सम्पत्ति
5अनुपीछे, अनुसारअनुगमन, अनुभव, अनुवाद
6अवनीचेअवतार, अवगमन, अवलोकन
7निस्/निर्बाहर, बिनानिर्गम, निर्भय, निश्चय
8दुस्/दुर्बुरा, कठिनदुर्गम, दुष्कर, दुर्बल
9विविशेष, अलगविज्ञान, विकास, विजय
10आ(ङ्)ओर, तकआगमन, आकर्षण, आदान
11निनीचे, भीतरनिवास, निवेदन, नियम
12अधिऊपर, अतिरिक्तअधिकार, अध्ययन, अधिपति
13अपिऊपर, भीअपिधान (ढकना)
14अतिअत्यधिक, पारअतिशय, अतिक्रमण, अत्यन्त
15सुअच्छा, सुन्दरसुगम, सुकृत, सुन्दर
16उद्ऊपर, बाहरउद्गम, उद्यम, उत्थान
17अभिओर, सामनेअभिगमन, अभिनन्दन, अभिलाषा
18प्रतिवापस, प्रत्येकप्रतिगमन, प्रतिक्रिया, प्रतिदिन
19परिचारों ओर, पूर्णपरिक्रमा, परिवार, परिणाम
20उपपास, समीपउपदेश, उपवन, उपकार
21आङ्(आ का वैकल्पिक रूप)
22दुस्(दुर् का वैकल्पिक रूप)

उपसर्ग कैसे अर्थ बदलते हैं?

उपसर्ग तीन प्रकार से प्रभाव डालते हैं:

1. अर्थ में दिशा-परिवर्तन

गम् (जाना) → गम् (आना) — दिशा उलट गई

2. अर्थ में विस्तार / सूक्ष्म भेद

गम् (जाना) → प्रगम् (प्रगति करना) — ‘आगे’ का विस्तार

3. अर्थ में पूर्ण परिवर्तन

गम् (जाना) → अवगम् (समझना) — ‘जाना’ से ‘समझना’ — पूर्णतया नया अर्थ!

’कृ’ धातु (करना) — उपसर्गों के साथ

उपसर्ग + कृशब्दअर्थ
प्र + कृप्रकृतिमूल स्वभाव
सम् + कृसंस्कारभली प्रकार करना, शुद्धि
वि + कृविकारविकृत करना, बिगाड़
उप + कृउपकारसहायता करना
अप + कृअपकारबुरा करना, हानि
परि + कृपरिकरचारों ओर करना, तैयारी
+ कृआकाररूप देना
निर् + कृनिराकाररूप रहित

आगामी पाठों में

आगामी पाठों में हम उपसर्गों को विस्तार से पढ़ेंगे:

  1. प्र, परा, अप — आगे, दूर, हटकर
  2. सम्, अनु, अव — साथ, पीछे, नीचे
  3. निस्, नि, उद् — बाहर, भीतर, ऊपर
  4. अभि, अधि, प्रति — सामने, ऊपर, वापस

याद रखें

  1. उपसर्ग = धातु से पहले जुड़ने वाले शब्दांश — अर्थ बदलते हैं
  2. 22 उपसर्ग (पाणिनि): प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, दुस्, वि, आ, नि, अधि, अपि, अति, सु, उद्, अभि, प्रति, परि, उप
  3. एक ही धातु + भिन्न उपसर्ग = भिन्न अर्थ (हृ → प्रहार, आहार, संहार, विहार, उपहार)
  4. उपसर्ग दिशा बदल सकते हैं, विस्तार कर सकते हैं, या पूर्णतया नया अर्थ दे सकते हैं
  5. अनेक हिन्दी शब्द (प्रगति, संस्कार, विज्ञान, उपहार) संस्कृत उपसर्ग + धातु से बने हैं

अभ्यास

प्रश्न 1 / 70 सही

उपसर्ग का मुख्य कार्य क्या है?