वि उपसर्ग — अलग / विशेष
वि उपसर्ग का मुख्य अर्थ है — अलग होना, विशिष्ट होना, तीव्रता।
| शब्द | विग्रह | अर्थ |
|---|
| विगच्छति | वि + गच्छति | दूर चला जाता है |
| विजयः | वि + जयः | विशेष जय, विजय |
| विशेषः | वि + शेषः | जो भिन्न/विशिष्ट हो |
| विद्या | वि + द्या (ज्ञा) | विशेष ज्ञान |
| विचारः | वि + चारः | सम्यक् मनन |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|
| सः विगच्छति | वह दूर चला जाता है |
| विजयः अस्ति | विजय है |
| विद्या विशेषा अस्ति | विद्या विशेष है |
आ उपसर्ग — ओर / तक / सम्यक्
आ उपसर्ग का अर्थ है — की ओर, तक, सम्पूर्णतया। यह उपसर्ग पिछले पाठों में भी आया था (आगच्छति = आता है)।
| शब्द | विग्रह | अर्थ |
|---|
| आगच्छति | आ + गच्छति | (यहाँ) आता है |
| आचार्यः | आ + चार्यः | जो सम्यक् आचरण सिखाए |
| आहारः | आ + हारः | (मुख तक) लाना = भोजन |
| आरम्भः | आ + रम्भः | प्रारम्भ |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|
| आचार्यः आगच्छति | आचार्य आता है |
| आहारः सुलभः अस्ति | भोजन सुलभ है |
| आरम्भः शुभः अस्ति | प्रारम्भ शुभ है |
अति उपसर्ग — पार / अधिक
अति का अर्थ है — पार, अत्यधिक, beyond।
| शब्द | विग्रह | अर्थ |
|---|
| अतिक्रमति | अति + क्रमति | सीमा पार करता है, उल्लंघन करता है |
| अतिशयः | अति + शयः | अत्यधिक, बहुत अधिक |
| अतिथिः | अति + इथिः | जो (तिथि) पार कर आया हो = अतिथि |
| अतिरिक्तम् | अति + रिक्तम् | अधिक, बचा हुआ |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|
| सः सीमाम् अतिक्रमति | वह सीमा का उल्लंघन करता है |
| तस्य ज्ञानम् अतिशयम् अस्ति | उसका ज्ञान अत्यधिक है |
सु उपसर्ग — अच्छा / सरल
सु का अर्थ है — अच्छा, सरल, सुन्दर।
| शब्द | विग्रह | अर्थ |
|---|
| सुलभम् | सु + लभम् | सरलता से प्राप्य |
| सुगमम् | सु + गमम् | सरल, आसान |
| सुजनः | सु + जनः | अच्छा व्यक्ति, सज्जन |
| सुकरम् | सु + करम् | आसान काम |
| सुन्दरम् | सु + उन्दरम् | सुन्दर |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|
| एतत् कार्यं सुकरम् अस्ति | यह कार्य आसान है |
| सुजनः सर्वत्र पूज्यः | सज्जन सब जगह पूज्य है |
दुस् / दुर् उपसर्ग — बुरा / कठिन
दुस् (व्यञ्जन से पहले) और दुर् (स्वर से पहले) का अर्थ है — बुरा, कठिन, दूषित।
ध्यान दें — सन्धि नियम:
- दुस् + क/ख/प/फ → दुष् (विसर्ग सन्धि): दुष्करम्
- दुस् + ल/ग/ज → दुर्: दुर्लभम्, दुर्गमम्, दुर्जनः
| शब्द | विग्रह | अर्थ |
|---|
| दुर्लभम् | दुर् + लभम् | कठिनता से प्राप्य |
| दुर्गमम् | दुर् + गमम् | कठिन, दुर्गम |
| दुर्जनः | दुर् + जनः | बुरा व्यक्ति, दुष्ट |
| दुष्करम् | दुस् + करम् | कठिन काम |
| दुर्गः | दुर् + गः | जहाँ जाना कठिन हो = किला |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|
| एतत् कार्यं दुष्करम् अस्ति | यह कार्य कठिन है |
| दुर्जनः सर्वत्र निन्द्यः | दुर्जन सब जगह निन्दनीय है |
सु और दुस् — विपरीत जोड़ियाँ
ये दोनों उपसर्ग एक-दूसरे के विपरीत अर्थ देते हैं:
| सु + मूल | अर्थ | दुस्/दुर् + मूल | अर्थ |
|---|
| सुलभम् | सरलता से प्राप्य | दुर्लभम् | कठिनता से प्राप्य |
| सुगमम् | आसान | दुर्गमम् | कठिन |
| सुजनः | सज्जन | दुर्जनः | दुर्जन |
| सुकरम् | आसान काम | दुष्करम् | कठिन काम |
सम्पूर्ण २२ उपसर्ग — सारणी
संस्कृत में कुल २२ उपसर्ग हैं। इस पाठमाला में अब तक सभी प्रमुख उपसर्ग आ चुके हैं:
| उपसर्ग | मुख्य अर्थ | उदाहरण |
|---|
| प्र | आगे, अधिक | प्रगच्छति, प्रणामः |
| परा | पीछे, विपरीत | पराजयः, पराक्रमः |
| अप | दूर, हटाना | अपगच्छति, अपमानम् |
| सम् | साथ, सम्यक् | सम्गच्छति, संस्कृतम् |
| अनु | पीछे-पीछे | अनुगच्छति, अनुवादः |
| अव | नीचे | अवगच्छति, अवतारः |
| निस्/निर् | बाहर, बिना | निर्गच्छति, निर्मलम् |
| निः/निर् | बिना | निराशा, निर्भयः |
| दुस्/दुर् | बुरा, कठिन | दुर्लभम्, दुर्गमम् |
| वि | अलग, विशेष | विगच्छति, विशेषः |
| आ | ओर, तक | आगच्छति, आचार्यः |
| नि | भीतर, नीचे | निवासः, निग्रहः |
| अधि | ऊपर, अधिक | अधिगच्छति, अधिकारः |
| अपि | (शब्द-योजन) | अपिधानम् |
| अति | पार, अधिक | अतिक्रमति, अतिशयः |
| सु | अच्छा, सरल | सुलभम्, सुगमम् |
| उत्/उद् | ऊपर | उत्तिष्ठति, उद्यानम् |
| अभि | सामने, ओर | अभिगच्छति, अभिनन्दनम् |
| प्रति | वापस, प्रत्येक | प्रतिगच्छति, प्रतिदिनम् |
| परि | चारों ओर | परिगच्छति, परिवारः |
| उप | पास, निकट | उपगच्छति, उपदेशः |
याद रखें
- वि = अलग/विशेष — विगच्छति, विशेषः, विद्या
- आ = ओर/तक/सम्यक् — आगच्छति, आचार्यः, आहारः
- अति = पार/अत्यधिक — अतिक्रमति, अतिशयः
- सु और दुस्/दुर् विपरीत उपसर्ग हैं — सुलभ↔दुर्लभ, सुगम↔दुर्गम
- दुस् व्यञ्जन से पहले सन्धि नियमानुसार दुष्/दुर् बनता है