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इस मॉड्यूल के पाठ

वि, आ, अति, सु, दुस्

अनुमानित समय: 15 मिनट

वि उपसर्ग — अलग / विशेष

वि उपसर्ग का मुख्य अर्थ है — अलग होना, विशिष्ट होना, तीव्रता

शब्दविग्रहअर्थ
विगच्छतिवि + गच्छतिदूर चला जाता है
विजयःवि + जयःविशेष जय, विजय
विशेषःवि + शेषःजो भिन्न/विशिष्ट हो
विद्यावि + द्या (ज्ञा)विशेष ज्ञान
विचारःवि + चारःसम्यक् मनन

उदाहरण वाक्य

संस्कृतअर्थ
सः विगच्छतिवह दूर चला जाता है
विजयः अस्तिविजय है
विद्या विशेषा अस्तिविद्या विशेष है

आ उपसर्ग — ओर / तक / सम्यक्

उपसर्ग का अर्थ है — की ओर, तक, सम्पूर्णतया। यह उपसर्ग पिछले पाठों में भी आया था (आगच्छति = आता है)।

शब्दविग्रहअर्थ
आगच्छतिआ + गच्छति(यहाँ) आता है
आचार्यःआ + चार्यःजो सम्यक् आचरण सिखाए
आहारःआ + हारः(मुख तक) लाना = भोजन
आरम्भःआ + रम्भःप्रारम्भ

उदाहरण वाक्य

संस्कृतअर्थ
आचार्यः आगच्छतिआचार्य आता है
आहारः सुलभः अस्तिभोजन सुलभ है
आरम्भः शुभः अस्तिप्रारम्भ शुभ है

अति उपसर्ग — पार / अधिक

अति का अर्थ है — पार, अत्यधिक, beyond

शब्दविग्रहअर्थ
अतिक्रमतिअति + क्रमतिसीमा पार करता है, उल्लंघन करता है
अतिशयःअति + शयःअत्यधिक, बहुत अधिक
अतिथिःअति + इथिःजो (तिथि) पार कर आया हो = अतिथि
अतिरिक्तम्अति + रिक्तम्अधिक, बचा हुआ

उदाहरण वाक्य

संस्कृतअर्थ
सः सीमाम् अतिक्रमतिवह सीमा का उल्लंघन करता है
तस्य ज्ञानम् अतिशयम् अस्तिउसका ज्ञान अत्यधिक है

सु उपसर्ग — अच्छा / सरल

सु का अर्थ है — अच्छा, सरल, सुन्दर

शब्दविग्रहअर्थ
सुलभम्सु + लभम्सरलता से प्राप्य
सुगमम्सु + गमम्सरल, आसान
सुजनःसु + जनःअच्छा व्यक्ति, सज्जन
सुकरम्सु + करम्आसान काम
सुन्दरम्सु + उन्दरम्सुन्दर

उदाहरण वाक्य

संस्कृतअर्थ
एतत् कार्यं सुकरम् अस्तियह कार्य आसान है
सुजनः सर्वत्र पूज्यःसज्जन सब जगह पूज्य है

दुस् / दुर् उपसर्ग — बुरा / कठिन

दुस् (व्यञ्जन से पहले) और दुर् (स्वर से पहले) का अर्थ है — बुरा, कठिन, दूषित

ध्यान दें — सन्धि नियम:

  • दुस् + क/ख/प/फदुष् (विसर्ग सन्धि): दुष्करम्
  • दुस् + ल/ग/जदुर्: दुर्लभम्, दुर्गमम्, दुर्जनः
शब्दविग्रहअर्थ
दुर्लभम्दुर् + लभम्कठिनता से प्राप्य
दुर्गमम्दुर् + गमम्कठिन, दुर्गम
दुर्जनःदुर् + जनःबुरा व्यक्ति, दुष्ट
दुष्करम्दुस् + करम्कठिन काम
दुर्गःदुर् + गःजहाँ जाना कठिन हो = किला

उदाहरण वाक्य

संस्कृतअर्थ
एतत् कार्यं दुष्करम् अस्तियह कार्य कठिन है
दुर्जनः सर्वत्र निन्द्यःदुर्जन सब जगह निन्दनीय है

सु और दुस् — विपरीत जोड़ियाँ

ये दोनों उपसर्ग एक-दूसरे के विपरीत अर्थ देते हैं:

सु + मूलअर्थदुस्/दुर् + मूलअर्थ
सुलभम्सरलता से प्राप्यदुर्लभम्कठिनता से प्राप्य
सुगमम्आसानदुर्गमम्कठिन
सुजनःसज्जनदुर्जनःदुर्जन
सुकरम्आसान कामदुष्करम्कठिन काम

सम्पूर्ण २२ उपसर्ग — सारणी

संस्कृत में कुल २२ उपसर्ग हैं। इस पाठमाला में अब तक सभी प्रमुख उपसर्ग आ चुके हैं:

उपसर्गमुख्य अर्थउदाहरण
प्रआगे, अधिकप्रगच्छति, प्रणामः
परापीछे, विपरीतपराजयः, पराक्रमः
अपदूर, हटानाअपगच्छति, अपमानम्
सम्साथ, सम्यक्सम्गच्छति, संस्कृतम्
अनुपीछे-पीछेअनुगच्छति, अनुवादः
अवनीचेअवगच्छति, अवतारः
निस्/निर्बाहर, बिनानिर्गच्छति, निर्मलम्
निः/निर्बिनानिराशा, निर्भयः
दुस्/दुर्बुरा, कठिनदुर्लभम्, दुर्गमम्
विअलग, विशेषविगच्छति, विशेषः
ओर, तकआगच्छति, आचार्यः
निभीतर, नीचेनिवासः, निग्रहः
अधिऊपर, अधिकअधिगच्छति, अधिकारः
अपि(शब्द-योजन)अपिधानम्
अतिपार, अधिकअतिक्रमति, अतिशयः
सुअच्छा, सरलसुलभम्, सुगमम्
उत्/उद्ऊपरउत्तिष्ठति, उद्यानम्
अभिसामने, ओरअभिगच्छति, अभिनन्दनम्
प्रतिवापस, प्रत्येकप्रतिगच्छति, प्रतिदिनम्
परिचारों ओरपरिगच्छति, परिवारः
उपपास, निकटउपगच्छति, उपदेशः

याद रखें

  1. वि = अलग/विशेष — विगच्छति, विशेषः, विद्या
  2. = ओर/तक/सम्यक् — आगच्छति, आचार्यः, आहारः
  3. अति = पार/अत्यधिक — अतिक्रमति, अतिशयः
  4. सु और दुस्/दुर् विपरीत उपसर्ग हैं — सुलभ↔दुर्लभ, सुगम↔दुर्गम
  5. दुस् व्यञ्जन से पहले सन्धि नियमानुसार दुष्/दुर् बनता है

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

'विगच्छति' का अर्थ क्या है?