मुख्य सामग्री पर जाएँ
इस मॉड्यूल के पाठ

अव्यय परिचय — अविकारी शब्द

अनुमानित समय: 15 मिनट

अव्यय क्या है?

संस्कृत में अधिकांश शब्दों का रूप लिंग, वचन और विभक्ति के अनुसार बदलता है — जैसे रामः, रामम्, रामेण। परन्तु कुछ शब्द ऐसे हैं जो कभी नहीं बदलते — इन्हें अव्यय कहते हैं।

अव्यय = अ + व्यय = जिसमें कोई व्यय (परिवर्तन) न हो

पाणिनि का सूत्र है:

स्वरादिनिपातमव्ययम् (१.१.३७)

अर्थात् ‘स्वर’ आदि गण में पठित निपात अव्यय हैं।

विकारी बनाम अविकारी

विकारी शब्द (बदलते हैं)अविकारी / अव्यय (नहीं बदलते)
रामः → रामम् → रामेणसदा (सदा ही रहता है)
बालकः → बालकौ → बालकाःअत्र (अत्र ही रहता है)
गच्छति → गच्छतः → गच्छन्ति (च ही रहता है)

अव्यय की प्रमुख श्रेणियाँ

अव्यय को चार प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

1. क्रियाविशेषण (Adverbs)

ये अव्यय क्रिया की विशेषता बताते हैं — कब, कहाँ, कैसे:

उपश्रेणीअव्ययअर्थ
कालवाचक (कब?)सदा, अद्य, श्वः, ह्यः, कदाहमेशा, आज, कल (भविष्य), कल (बीता), कब
स्थानवाचक (कहाँ?)अत्र, तत्र, कुत्र, सर्वत्र, यत्रयहाँ, वहाँ, कहाँ, सब जगह, जहाँ
रीतिवाचक (कैसे?)तथा, यथा, कथम्, एवम्वैसे, जैसे, कैसे, इस प्रकार

2. समुच्चयबोधक (Conjunctions)

ये शब्दों या वाक्यों को जोड़ते हैं:

अव्ययअर्थउदाहरण
औररामः कृष्णः
वायाचायं वा दुग्धं वा
अपिभीसः अपि गच्छति
तु / किन्तुपरन्तुसः गच्छति, तु अहं न गच्छामि

3. निषेधवाचक (Negatives)

अव्ययअर्थप्रयोग
नहींसः गच्छति
मामत (निषेध)मा गच्छ (मत जाओ)
नहिनहीं (दृढ़)नहि ज्ञानेन सदृशम्

4. विस्मयादिबोधक (Exclamations / Particles)

अव्ययअर्थउदाहरण
अहोओह!/वाह!अहो सुन्दरम्!
हाहाय!हा कष्टम्!
धिक्धिक्कार!धिक् त्वाम्!

कुछ अति-महत्त्वपूर्ण अव्यय

एव (ही / केवल)

सत्यम् एव जयते = सत्य ही जीतता है

‘एव’ शब्द पर बल (emphasis) देता है। यह जिस शब्द के बाद आता है, उसे विशेष बनाता है।

इति (ऐसा / इस प्रकार)

‘धर्मं चर’ इति गुरुः अवदत् = ‘धर्म का आचरण करो’ ऐसा गुरु ने कहा

‘इति’ उद्धरण (quotation) की समाप्ति पर आता है — जैसे हिन्दी में ‘ऐसा कहा’।

अपि (भी / even)

सः अपि आगच्छति = वह भी आता है

वाक्यों में अव्यय — अभ्यास

निम्न वाक्यों में अव्ययों को पहचानें:

रामः सदा अत्र तिष्ठति। सीता च तत्र गच्छति। सः न आगच्छति।

अव्ययश्रेणीअर्थ
सदाकालवाचक क्रियाविशेषणहमेशा
अत्रस्थानवाचक क्रियाविशेषणयहाँ
समुच्चयबोधकऔर
तत्रस्थानवाचक क्रियाविशेषणवहाँ
निषेधवाचकनहीं

अनुवाद: राम हमेशा यहाँ रहता है। और सीता वहाँ जाती है। वह नहीं आता है।

याद रखें

  1. अव्यय = अविकारी शब्द — लिंग, वचन, विभक्ति से कोई परिवर्तन नहीं
  2. चार प्रमुख श्रेणियाँ: क्रियाविशेषण (कब/कहाँ/कैसे), समुच्चयबोधक (जोड़ने वाले), निषेधवाचक (न/मा), विस्मयादिबोधक (अहो/हा)
  3. एव = ही, इति = ऐसा, अपि = भी — ये तीन अत्यन्त प्रचलित अव्यय हैं
  4. संस्कृत वाक्य में अव्ययों की भरमार होती है — इन्हें पहचानना पठन का मूल कौशल है

अभ्यास

प्रश्न 1 / 80 सही

'अव्यय' का शाब्दिक अर्थ क्या है?