अव्यय परिचय — अविकारी शब्द
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अव्यय क्या है?
संस्कृत में अधिकांश शब्दों का रूप लिंग, वचन और विभक्ति के अनुसार बदलता है — जैसे रामः, रामम्, रामेण। परन्तु कुछ शब्द ऐसे हैं जो कभी नहीं बदलते — इन्हें अव्यय कहते हैं।
अव्यय = अ + व्यय = जिसमें कोई व्यय (परिवर्तन) न हो
पाणिनि का सूत्र है:
स्वरादिनिपातमव्ययम् (१.१.३७)
अर्थात् ‘स्वर’ आदि गण में पठित निपात अव्यय हैं।
विकारी बनाम अविकारी
| विकारी शब्द (बदलते हैं) | अविकारी / अव्यय (नहीं बदलते) |
|---|---|
| रामः → रामम् → रामेण | सदा (सदा ही रहता है) |
| बालकः → बालकौ → बालकाः | अत्र (अत्र ही रहता है) |
| गच्छति → गच्छतः → गच्छन्ति | च (च ही रहता है) |
अव्यय की प्रमुख श्रेणियाँ
अव्यय को चार प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
1. क्रियाविशेषण (Adverbs)
ये अव्यय क्रिया की विशेषता बताते हैं — कब, कहाँ, कैसे:
| उपश्रेणी | अव्यय | अर्थ |
|---|---|---|
| कालवाचक (कब?) | सदा, अद्य, श्वः, ह्यः, कदा | हमेशा, आज, कल (भविष्य), कल (बीता), कब |
| स्थानवाचक (कहाँ?) | अत्र, तत्र, कुत्र, सर्वत्र, यत्र | यहाँ, वहाँ, कहाँ, सब जगह, जहाँ |
| रीतिवाचक (कैसे?) | तथा, यथा, कथम्, एवम् | वैसे, जैसे, कैसे, इस प्रकार |
2. समुच्चयबोधक (Conjunctions)
ये शब्दों या वाक्यों को जोड़ते हैं:
| अव्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| च | और | रामः कृष्णः च |
| वा | या | चायं वा दुग्धं वा |
| अपि | भी | सः अपि गच्छति |
| तु / किन्तु | परन्तु | सः गच्छति, तु अहं न गच्छामि |
3. निषेधवाचक (Negatives)
| अव्यय | अर्थ | प्रयोग |
|---|---|---|
| न | नहीं | सः न गच्छति |
| मा | मत (निषेध) | मा गच्छ (मत जाओ) |
| नहि | नहीं (दृढ़) | नहि ज्ञानेन सदृशम् |
4. विस्मयादिबोधक (Exclamations / Particles)
| अव्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अहो | ओह!/वाह! | अहो सुन्दरम्! |
| हा | हाय! | हा कष्टम्! |
| धिक् | धिक्कार! | धिक् त्वाम्! |
कुछ अति-महत्त्वपूर्ण अव्यय
एव (ही / केवल)
सत्यम् एव जयते = सत्य ही जीतता है
‘एव’ शब्द पर बल (emphasis) देता है। यह जिस शब्द के बाद आता है, उसे विशेष बनाता है।
इति (ऐसा / इस प्रकार)
‘धर्मं चर’ इति गुरुः अवदत् = ‘धर्म का आचरण करो’ ऐसा गुरु ने कहा
‘इति’ उद्धरण (quotation) की समाप्ति पर आता है — जैसे हिन्दी में ‘ऐसा कहा’।
अपि (भी / even)
सः अपि आगच्छति = वह भी आता है
वाक्यों में अव्यय — अभ्यास
निम्न वाक्यों में अव्ययों को पहचानें:
रामः सदा अत्र तिष्ठति। सीता च तत्र गच्छति। सः न आगच्छति।
| अव्यय | श्रेणी | अर्थ |
|---|---|---|
| सदा | कालवाचक क्रियाविशेषण | हमेशा |
| अत्र | स्थानवाचक क्रियाविशेषण | यहाँ |
| च | समुच्चयबोधक | और |
| तत्र | स्थानवाचक क्रियाविशेषण | वहाँ |
| न | निषेधवाचक | नहीं |
अनुवाद: राम हमेशा यहाँ रहता है। और सीता वहाँ जाती है। वह नहीं आता है।
याद रखें
- अव्यय = अविकारी शब्द — लिंग, वचन, विभक्ति से कोई परिवर्तन नहीं
- चार प्रमुख श्रेणियाँ: क्रियाविशेषण (कब/कहाँ/कैसे), समुच्चयबोधक (जोड़ने वाले), निषेधवाचक (न/मा), विस्मयादिबोधक (अहो/हा)
- एव = ही, इति = ऐसा, अपि = भी — ये तीन अत्यन्त प्रचलित अव्यय हैं
- संस्कृत वाक्य में अव्ययों की भरमार होती है — इन्हें पहचानना पठन का मूल कौशल है
अभ्यास
'अव्यय' का शाब्दिक अर्थ क्या है?