भ्वादि गण — विधिलिङ् लकार
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विधिलिङ् लकार — सम्भावना / कर्तव्य
विधिलिङ् लकार = potential / optative mood। इसका प्रयोग इन अर्थों में होता है:
- कर्तव्य (duty): नरः सत्यं वदेत् = मनुष्य को सत्य बोलना चाहिए
- सम्भावना (possibility): सः आगच्छेत् = वह आ सकता है
- इच्छा / सलाह (wish/advice): त्वं पठेः = तुझे पढ़ना चाहिए
- विनम्र अनुरोध: भवान् उपविशेत् = आप बैठें (कृपया)
विधिलिङ् लकार कैसे बनता है?
धातु अंश + ई (विकरण) + पुरुष प्रत्यय
‘ई’ विकरण (यासुट्) प्रत्ययों के साथ मिलकर ये विशेष रूप देता है:
विधिलिङ् प्रत्यय सारणी
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | -एत् | -एताम् | -एयुः |
| मध्यम पुरुष | -एः | -एतम् | -एत |
| उत्तम पुरुष | -एयम् | -एव | -एम |
ध्यान दें — सभी प्रत्ययों में ‘ए’ स्वर उपस्थित है। यही विधिलिङ् की पहचान है।
गम् धातु — विधिलिङ् (9 रूप)
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष (वह/वे) | गच्छेत् | गच्छेताम् | गच्छेयुः |
| मध्यम पुरुष (तू/तुम) | गच्छेः | गच्छेतम् | गच्छेत |
| उत्तम पुरुष (मैं/हम) | गच्छेयम् | गच्छेव | गच्छेम |
पठ् धातु — विधिलिङ्
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पठेत् | पठेताम् | पठेयुः |
| मध्यम पुरुष | पठेः | पठेतम् | पठेत |
| उत्तम पुरुष | पठेयम् | पठेव | पठेम |
भू धातु — विधिलिङ्
भू → अंश: भव-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | भवेत् | भवेताम् | भवेयुः |
| मध्यम पुरुष | भवेः | भवेतम् | भवेत |
| उत्तम पुरुष | भवेयम् | भवेव | भवेम |
चार लकारों की तुलना — गम् धातु (प्र.पु.)
| लट् (वर्तमान) | लृट् (भविष्यत्) | लङ् (भूत) | विधिलिङ् | |
|---|---|---|---|---|
| एकवचन | गच्छति | गमिष्यति | अगच्छत् | गच्छेत् |
| द्विवचन | गच्छतः | गमिष्यतः | अगच्छताम् | गच्छेताम् |
| बहुवचन | गच्छन्ति | गमिष्यन्ति | अगच्छन् | गच्छेयुः |
विधिलिङ् के प्रमुख प्रयोग — उदाहरण
कर्तव्य (Should / Ought to)
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| नरः सत्यं वदेत् | मनुष्य को सत्य बोलना चाहिए |
| छात्रः प्रतिदिनं पठेत् | छात्र को प्रतिदिन पढ़ना चाहिए |
| जनाः धर्मं चरेयुः | लोगों को धर्म का आचरण करना चाहिए |
सम्भावना (Possibility)
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः श्वः आगच्छेत् | वह कल आ सकता है |
| वर्षा भवेत् | वर्षा हो सकती है |
इच्छा / आशा (Wish)
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सर्वे सुखिनः भवेयुः | सब सुखी हों |
| अहं विद्वान् भवेयम् | मैं विद्वान बनूँ (काश) |
मूल पाठ में प्रयोग
छात्रः प्रतिदिनं विद्यालयं गच्छेत्। तत्र सः एकाग्रमनसा पठेत्। गुरोः वचनं सदा मन्येत।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| गच्छेत् | (उसे) जाना चाहिए | गम्, विधिलिङ्, प्र.पु.ए. |
| एकाग्रमनसा | एकाग्र मन से | तृतीया विभक्ति |
| पठेत् | (उसे) पढ़ना चाहिए | पठ्, विधिलिङ्, प्र.पु.ए. |
| मन्येत | (उसे) मानना चाहिए | मन्, विधिलिङ्, प्र.पु.ए. |
अनुवाद: छात्र को प्रतिदिन विद्यालय जाना चाहिए। वहाँ उसे एकाग्र मन से पढ़ना चाहिए। गुरु के वचन को सदा मानना चाहिए।
याद रखें
- विधिलिङ् = चाहिए / सम्भावना / कर्तव्य / इच्छा
- पहचान: सभी रूपों में ‘ए’ स्वर — गच्छेत्, पठेयुः, भवेयम्
- प्रत्यय: -एत्/-एताम्/-एयुः (प्र.पु.), -एः/-एतम्/-एत (म.पु.), -एयम्/-एव/-एम (उ.पु.)
- सुभाषितों और नीतिवचनों में विधिलिङ् का बहुत प्रयोग होता है — “नरः सत्यं वदेत्”
अभ्यास
प्रश्न 1 / 90 सही
विधिलिङ् लकार किस अर्थ में प्रयोग होता है?