मुख्य सामग्री पर जाएँ
इस मॉड्यूल के पाठ

भ्वादि गण — विधिलिङ् लकार

अनुमानित समय: 18 मिनट

विधिलिङ् लकार — सम्भावना / कर्तव्य

विधिलिङ् लकार = potential / optative mood। इसका प्रयोग इन अर्थों में होता है:

  1. कर्तव्य (duty): नरः सत्यं वदेत् = मनुष्य को सत्य बोलना चाहिए
  2. सम्भावना (possibility): सः आगच्छेत् = वह आ सकता है
  3. इच्छा / सलाह (wish/advice): त्वं पठेः = तुझे पढ़ना चाहिए
  4. विनम्र अनुरोध: भवान् उपविशेत् = आप बैठें (कृपया)

विधिलिङ् लकार कैसे बनता है?

धातु अंश + (विकरण) + पुरुष प्रत्यय

‘ई’ विकरण (यासुट्) प्रत्ययों के साथ मिलकर ये विशेष रूप देता है:

विधिलिङ् प्रत्यय सारणी

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुष-एत्-एताम्-एयुः
मध्यम पुरुष-एः-एतम्-एत
उत्तम पुरुष-एयम्-एव-एम

ध्यान दें — सभी प्रत्ययों में ‘ए’ स्वर उपस्थित है। यही विधिलिङ् की पहचान है।

गम् धातु — विधिलिङ् (9 रूप)

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुष (वह/वे)गच्छेत्गच्छेताम्गच्छेयुः
मध्यम पुरुष (तू/तुम)गच्छेःगच्छेतम्गच्छेत
उत्तम पुरुष (मैं/हम)गच्छेयम्गच्छेवगच्छेम

पठ् धातु — विधिलिङ्

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपठेत्पठेताम्पठेयुः
मध्यम पुरुषपठेःपठेतम्पठेत
उत्तम पुरुषपठेयम्पठेवपठेम

भू धातु — विधिलिङ्

भू → अंश: भव-

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषभवेत्भवेताम्भवेयुः
मध्यम पुरुषभवेःभवेतम्भवेत
उत्तम पुरुषभवेयम्भवेवभवेम

चार लकारों की तुलना — गम् धातु (प्र.पु.)

लट् (वर्तमान)लृट् (भविष्यत्)लङ् (भूत)विधिलिङ्
एकवचनगच्छतिगमिष्यतिअगच्छत्गच्छेत्
द्विवचनगच्छतःगमिष्यतःअगच्छताम्गच्छेताम्
बहुवचनगच्छन्तिगमिष्यन्तिअगच्छन्गच्छेयुः

विधिलिङ् के प्रमुख प्रयोग — उदाहरण

कर्तव्य (Should / Ought to)

संस्कृतअर्थ
नरः सत्यं वदेत्मनुष्य को सत्य बोलना चाहिए
छात्रः प्रतिदिनं पठेत्छात्र को प्रतिदिन पढ़ना चाहिए
जनाः धर्मं चरेयुःलोगों को धर्म का आचरण करना चाहिए

सम्भावना (Possibility)

संस्कृतअर्थ
सः श्वः आगच्छेत्वह कल आ सकता है
वर्षा भवेत्वर्षा हो सकती है

इच्छा / आशा (Wish)

संस्कृतअर्थ
सर्वे सुखिनः भवेयुःसब सुखी हों
अहं विद्वान् भवेयम्मैं विद्वान बनूँ (काश)

मूल पाठ में प्रयोग

छात्रः प्रतिदिनं विद्यालयं गच्छेत्। तत्र सः एकाग्रमनसा पठेत्। गुरोः वचनं सदा मन्येत।

शब्दअर्थव्याकरण
गच्छेत्(उसे) जाना चाहिएगम्, विधिलिङ्, प्र.पु.ए.
एकाग्रमनसाएकाग्र मन सेतृतीया विभक्ति
पठेत्(उसे) पढ़ना चाहिएपठ्, विधिलिङ्, प्र.पु.ए.
मन्येत(उसे) मानना चाहिएमन्, विधिलिङ्, प्र.पु.ए.

अनुवाद: छात्र को प्रतिदिन विद्यालय जाना चाहिए। वहाँ उसे एकाग्र मन से पढ़ना चाहिए। गुरु के वचन को सदा मानना चाहिए।

याद रखें

  1. विधिलिङ् = चाहिए / सम्भावना / कर्तव्य / इच्छा
  2. पहचान: सभी रूपों में ‘ए’ स्वर — गच्छत्, पठयुः, भवयम्
  3. प्रत्यय: -एत्/-एताम्/-एयुः (प्र.पु.), -एः/-एतम्/-एत (म.पु.), -एयम्/-एव/-एम (उ.पु.)
  4. सुभाषितों और नीतिवचनों में विधिलिङ् का बहुत प्रयोग होता है — “नरः सत्यं वदेत्

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

विधिलिङ् लकार किस अर्थ में प्रयोग होता है?