चुरादि गण — लट् लकार
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चुरादि गण — दसवाँ गण
चुरादि गण = दसवाँ और अन्तिम गण (10th conjugation class)। ‘चुरादि’ = चुर् + आदि = ‘चुर्’ धातु (चोरी करना) से शुरू होने वाला समूह।
चुरादि गण की विशेषता — ‘-अय-’ विकरण
चुरादि गण में दो बदलाव होते हैं:
- धातु स्वर की वृद्धि (strengthening)
- ‘-अय-’ विकरण (णिच् प्रत्यय) जुड़ता है
| बदलाव | उदाहरण |
|---|---|
| वृद्धि: उ → ओ | चुर् → चोर- |
| वृद्धि: अ → आ | गण् → गाण- (व्यवहार में ‘गण-’ ही प्रचलित) |
| + अय | चोर- + अय = चोरय- |
संरचना: धातु (वृद्धि) + अय + पुरुष प्रत्यय
प्रमुख चुरादि धातुएँ
| धातु | अर्थ | लट् प्र.पु.ए. |
|---|---|---|
| चुर् | चोरी करना | चोरयति |
| गण् | गिनना | गणयति |
| कथ् | कहना | कथयति |
| चिन्त् | सोचना | चिन्तयति |
| पूज् | पूजा करना | पूजयति |
| सेव् | सेवा करना | सेवयति |
चुर् धातु — लट् लकार (9 रूप)
चुर् → चोर (वृद्धि) + अय = चोरय-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष (वह/वे) | चोरयति | चोरयतः | चोरयन्ति |
| मध्यम पुरुष (तू/तुम) | चोरयसि | चोरयथः | चोरयथ |
| उत्तम पुरुष (मैं/हम) | चोरयामि | चोरयावः | चोरयामः |
गण् धातु — लट् लकार
गण् + अय = गणय-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | गणयति | गणयतः | गणयन्ति |
| मध्यम पुरुष | गणयसि | गणयथः | गणयथ |
| उत्तम पुरुष | गणयामि | गणयावः | गणयामः |
कथ् धातु — लट् लकार
कथ् + अय = कथय-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | कथयति | कथयतः | कथयन्ति |
| मध्यम पुरुष | कथयसि | कथयथः | कथयथ |
| उत्तम पुरुष | कथयामि | कथयावः | कथयामः |
चिन्त् धातु — लट् लकार
चिन्त् + अय = चिन्तय-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | चिन्तयति | चिन्तयतः | चिन्तयन्ति |
| मध्यम पुरुष | चिन्तयसि | चिन्तयथः | चिन्तयथ |
| उत्तम पुरुष | चिन्तयामि | चिन्तयावः | चिन्तयामः |
चार गणों की तुलना (प्र.पु.ए.)
| गण | धातु | विकरण | रूप |
|---|---|---|---|
| भ्वादि (1st) | भू | -अ- (+ गुण) | भवति |
| दिवादि (4th) | नश् | -य- | नश्यति |
| तुदादि (6th) | तुद् | -अ- (बिना गुण) | तुदति |
| चुरादि (10th) | चुर् | -अय- (+ वृद्धि) | चोरयति |
चारों में पुरुष प्रत्यय (-ति, -सि, -मि…) एक समान हैं। अन्तर केवल विकरण और स्वर परिवर्तन में है।
चुरादि गण की विशेष बात
चुरादि गण के रूप णिजन्त (causative) रूपों जैसे दिखते हैं। वास्तव में, किसी भी धातु का causative (प्रेरणार्थक) रूप ‘-अय-’ से बनता है — ठीक चुरादि जैसा:
| सामान्य | प्रेरणार्थक (causative) |
|---|---|
| पठति (वह पढ़ता है) | पाठयति (वह पढ़ाता है) |
| गच्छति (वह जाता है) | गमयति (वह भेजता है) |
चुरादि गण की धातुओं का मूल रूप ही ‘-अय-’ वाला होता है।
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| चोरः धनं चोरयति | चोर धन चुराता है |
| गुरुः कथां कथयति | गुरु कथा कहते हैं |
| छात्रः अंकान् गणयति | छात्र अंक गिनता है |
| विद्वान् सदा चिन्तयति | विद्वान सदा सोचता/चिन्तन करता है |
| भक्तः देवं पूजयति | भक्त देव की पूजा करता है |
मूल पाठ में प्रयोग
गुरुः छात्रेभ्यः कथां कथयति। छात्राः तां कथां चिन्तयन्ति। एकः छात्रः श्लोकान् गणयति। सर्वे गुरुं पूजयन्ति।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| कथयति | (वह) कहता है | कथ्, लट्, प्र.पु.ए. |
| चिन्तयन्ति | (वे सब) सोचते हैं | चिन्त्, लट्, प्र.पु.ब. |
| गणयति | (वह) गिनता है | गण्, लट्, प्र.पु.ए. |
| पूजयन्ति | (वे सब) पूजा करते हैं | पूज्, लट्, प्र.पु.ब. |
अनुवाद: गुरु छात्रों को कथा कहते हैं। छात्र उस कथा पर चिन्तन करते हैं। एक छात्र श्लोकों को गिनता है। सब गुरु की पूजा करते हैं।
याद रखें
- चुरादि गण = दसवाँ गण। विकरण = ‘-अय-’ (णिच्)
- धातु स्वर की वृद्धि + अय: चुर् (उ→ओ) + अय = चोरय-
- रूप प्रेरणार्थक (causative) जैसे दिखते हैं — ‘-अय-’ दोनों में समान
- प्रमुख धातुएँ: चोरयति (चुराता है), गणयति (गिनता है), कथयति (कहता है), चिन्तयति (सोचता है)
अभ्यास
चुरादि गण कौन-सा गण है?