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इस मॉड्यूल के पाठ

चुरादि गण — लट् लकार

अनुमानित समय: 18 मिनट

चुरादि गण — दसवाँ गण

चुरादि गण = दसवाँ और अन्तिम गण (10th conjugation class)। ‘चुरादि’ = चुर् + आदि = ‘चुर्’ धातु (चोरी करना) से शुरू होने वाला समूह।

चुरादि गण की विशेषता — ‘-अय-’ विकरण

चुरादि गण में दो बदलाव होते हैं:

  1. धातु स्वर की वृद्धि (strengthening)
  2. ‘-अय-’ विकरण (णिच् प्रत्यय) जुड़ता है
बदलावउदाहरण
वृद्धि: उ → ओचुर् → चोर-
वृद्धि: अ → आगण् → गाण- (व्यवहार में ‘गण-’ ही प्रचलित)
+ अयचोर- + अय = चोरय-

संरचना: धातु (वृद्धि) + अय + पुरुष प्रत्यय

प्रमुख चुरादि धातुएँ

धातुअर्थलट् प्र.पु.ए.
चुर्चोरी करनाचोरयति
गण्गिननागणयति
कथ्कहनाकथयति
चिन्त्सोचनाचिन्तयति
पूज्पूजा करनापूजयति
सेव्सेवा करनासेवयति

चुर् धातु — लट् लकार (9 रूप)

चुर् → चोर (वृद्धि) + अय = चोरय-

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुष (वह/वे)चोरयतिचोरयतःचोरयन्ति
मध्यम पुरुष (तू/तुम)चोरयसिचोरयथःचोरयथ
उत्तम पुरुष (मैं/हम)चोरयामिचोरयावःचोरयामः

गण् धातु — लट् लकार

गण् + अय = गणय-

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषगणयतिगणयतःगणयन्ति
मध्यम पुरुषगणयसिगणयथःगणयथ
उत्तम पुरुषगणयामिगणयावःगणयामः

कथ् धातु — लट् लकार

कथ् + अय = कथय-

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषकथयतिकथयतःकथयन्ति
मध्यम पुरुषकथयसिकथयथःकथयथ
उत्तम पुरुषकथयामिकथयावःकथयामः

चिन्त् धातु — लट् लकार

चिन्त् + अय = चिन्तय-

एकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषचिन्तयतिचिन्तयतःचिन्तयन्ति
मध्यम पुरुषचिन्तयसिचिन्तयथःचिन्तयथ
उत्तम पुरुषचिन्तयामिचिन्तयावःचिन्तयामः

चार गणों की तुलना (प्र.पु.ए.)

गणधातुविकरणरूप
भ्वादि (1st)भू-अ- (+ गुण)भवति
दिवादि (4th)नश्-य-नश्ति
तुदादि (6th)तुद्-अ- (बिना गुण)तुदति
चुरादि (10th)चुर्-अय- (+ वृद्धि)चोरयति

चारों में पुरुष प्रत्यय (-ति, -सि, -मि…) एक समान हैं। अन्तर केवल विकरण और स्वर परिवर्तन में है।

चुरादि गण की विशेष बात

चुरादि गण के रूप णिजन्त (causative) रूपों जैसे दिखते हैं। वास्तव में, किसी भी धातु का causative (प्रेरणार्थक) रूप ‘-अय-’ से बनता है — ठीक चुरादि जैसा:

सामान्यप्रेरणार्थक (causative)
पठति (वह पढ़ता है)पाठयति (वह पढ़ाता है)
गच्छति (वह जाता है)गमयति (वह भेजता है)

चुरादि गण की धातुओं का मूल रूप ही ‘-अय-’ वाला होता है।

उदाहरण वाक्य

संस्कृतअर्थ
चोरः धनं चोरयतिचोर धन चुराता है
गुरुः कथां कथयतिगुरु कथा कहते हैं
छात्रः अंकान् गणयतिछात्र अंक गिनता है
विद्वान् सदा चिन्तयतिविद्वान सदा सोचता/चिन्तन करता है
भक्तः देवं पूजयतिभक्त देव की पूजा करता है

मूल पाठ में प्रयोग

गुरुः छात्रेभ्यः कथां कथयति। छात्राः तां कथां चिन्तयन्ति। एकः छात्रः श्लोकान् गणयति। सर्वे गुरुं पूजयन्ति।

शब्दअर्थव्याकरण
कथयति(वह) कहता हैकथ्, लट्, प्र.पु.ए.
चिन्तयन्ति(वे सब) सोचते हैंचिन्त्, लट्, प्र.पु.ब.
गणयति(वह) गिनता हैगण्, लट्, प्र.पु.ए.
पूजयन्ति(वे सब) पूजा करते हैंपूज्, लट्, प्र.पु.ब.

अनुवाद: गुरु छात्रों को कथा कहते हैं। छात्र उस कथा पर चिन्तन करते हैं। एक छात्र श्लोकों को गिनता है। सब गुरु की पूजा करते हैं।

याद रखें

  1. चुरादि गण = दसवाँ गण। विकरण = ‘-अय-’ (णिच्)
  2. धातु स्वर की वृद्धि + अय: चुर् (उ→ओ) + अय = चोरय-
  3. रूप प्रेरणार्थक (causative) जैसे दिखते हैं — ‘-अय-’ दोनों में समान
  4. प्रमुख धातुएँ: चोरयति (चुराता है), गणयति (गिनता है), कथयति (कहता है), चिन्तयति (सोचता है)

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

चुरादि गण कौन-सा गण है?