व्यञ्जन सन्धि — व्यञ्जनों का मेल
अनुमानित समय: 20 मिनट
व्यञ्जन सन्धि क्या है?
जब व्यञ्जन के बाद कोई स्वर या व्यञ्जन आता है और उसमें ध्वनि-परिवर्तन होता है, तो उसे व्यञ्जन सन्धि कहते हैं।
1. जश्त्व सन्धि (घोषीकरण)
किसी अघोष वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद घोष वर्ण या स्वर आने पर अघोष → घोष हो जाता है:
| अघोष | → घोष | उदाहरण |
|---|---|---|
| क् | ग् | वाक् + ईशः = वागीशः |
| च् | ज् | अच् + अन्तः = अजन्तः |
| ट् | ड् | षट् + आननः = षडाननः |
| त् | द् | सत् + आचारः = सदाचारः |
| प् | ब् | अप् + जम् = अब्जम् |
नियम
- पहले शब्द का अन्तिम वर्ण वर्ग का 1 या 2 (अघोष) हो
- दूसरे शब्द का आदि वर्ण वर्ग का 3, 4, 5 (घोष) या स्वर हो
- तो पहला वर्ण अपने वर्ग के तीसरे (घोष अल्पप्राण) में बदल जाता है
2. अनुस्वार सन्धि
म् के बाद कोई भी व्यञ्जन आने पर:
- म् → अनुस्वार (ं) लिखा जा सकता है
- या म् → उस वर्ग का नासिक्य बन सकता है
| मूल | अनुस्वार | वर्ग नासिक्य | अर्थ |
|---|---|---|---|
| सम् + गमः | संगमः | सङ्गमः | मिलन |
| सम् + चयः | संचयः | सञ्चयः | एकत्रीकरण |
| सम् + तोषः | संतोषः | सन्तोषः | संतुष्टि |
| सम् + न्यासः | संन्यासः | सन्न्यासः | त्याग |
| सम् + पूर्णः | संपूर्णः | सम्पूर्णः | पूर्ण |
3. श्चुत्व सन्धि
त/थ/द/ध/न के बाद श/च/छ/ज/झ/ञ आने पर:
- त → च, द → ज, न → ञ
| मूल | सन्धि | उदाहरण |
|---|---|---|
| सत् + चित् | सच्चित् | (त्+च = च्+च) |
| उत् + ज्वलः | उज्ज्वलः | (त्+ज = ज्+ज) |
उदाहरण सारणी
| सन्धि शब्द | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| वागीशः | वाक् + ईशः | जश्त्व (क्→ग्) |
| सदाचारः | सत् + आचारः | जश्त्व (त्→द्) |
| षडाननः | षट् + आननः | जश्त्व (ट्→ड्) |
| संगमः | सम् + गमः | अनुस्वार |
| संस्कृतम् | सम् + कृतम् | अनुस्वार |
| सज्जनः | सत् + जनः | जश्त्व + श्चुत्व |
मूल पाठ में प्रयोग
इन शब्दों में व्यञ्जन सन्धि पहचानें:
सज्जनः सदाचारं करोति। संस्कृतं वागीशस्य भाषा अस्ति।
| सन्धि शब्द | विच्छेद | नियम |
|---|---|---|
| सज्जनः | सत् + जनः | जश्त्व (त्→ज्) |
| सदाचारम् | सत् + आचारम् | जश्त्व (त्→द्) |
| संस्कृतम् | सम् + कृतम् | अनुस्वार |
| वागीशस्य | वाक् + ईशस्य | जश्त्व (क्→ग्) |
अनुवाद: सज्जन सदाचार करता है। संस्कृत वाणी के ईश्वर की भाषा है।
याद रखें
- जश्त्व — अघोष + घोष/स्वर → अघोष का घोष रूप (क→ग, त→द, प→ब)
- अनुस्वार — म् + व्यञ्जन → ं (या वर्ग नासिक्य)
- श्चुत्व — त-वर्ग + च-वर्ग → च-वर्ग + च-वर्ग
- सन्धि पहचानना पठन का सबसे महत्त्वपूर्ण कौशल है
अभ्यास
प्रश्न 1 / 80 सही
जश्त्व सन्धि में क्या होता है?