कारक परिचय — कारक और विभक्ति
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कारक क्या है?
कारक का शाब्दिक अर्थ है — ‘करने वाला’। वाक्य में क्रिया की सिद्धि (completion) में जो तत्त्व सहायक होते हैं, उन्हें कारक कहते हैं।
एक सरल उदाहरण:
रामः दण्डेन सर्पम् ताडयति। (राम दण्ड से साँप को मारता है।)
इस वाक्य में:
- रामः = करने वाला (कर्ता)
- सर्पम् = जिस पर क्रिया हो रही है (कर्म)
- दण्डेन = जिस साधन से क्रिया हो रही है (करण)
- ताडयति = क्रिया (मारता है)
छह कारक
संस्कृत में 6 कारक होते हैं। प्रत्येक कारक एक निश्चित विभक्ति में प्रकट होता है:
| कारक | विभक्ति | हिन्दी अर्थ | प्रश्न | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| कर्ता | प्रथमा | —ने | कौन करता है? | रामः गच्छति (राम जाता है) |
| कर्म | द्वितीया | —को | किसे/क्या? | रामः ग्रामम् गच्छति (गाँव को) |
| करण | तृतीया | —से/द्वारा | किससे/कैसे? | हस्तेन लिखति (हाथ से) |
| सम्प्रदान | चतुर्थी | —के लिए | किसके लिए? | गुरवे नमः (गुरु के लिए) |
| अपादान | पञ्चमी | —से (अलग) | कहाँ से? | वृक्षात् पतति (वृक्ष से गिरता) |
| अधिकरण | सप्तमी | —में/पर | कहाँ/कब? | गृहे तिष्ठति (घर में बैठता) |
षष्ठी विभक्ति — कारक नहीं!
षष्ठी विभक्ति (सम्बन्ध — का/के/की) को कारक नहीं माना जाता, क्योंकि यह क्रिया से सीधे सम्बन्धित नहीं है — यह केवल दो शब्दों के बीच सम्बन्ध बताती है:
रामस्य पुस्तकम् = राम का पुस्तक
यहाँ ‘रामस्य’ सीधे किसी क्रिया से नहीं जुड़ा — यह केवल पुस्तक और राम का सम्बन्ध बताता है।
करण बनाम अपादान — ‘से’ का अन्तर
हिन्दी में दोनों के लिए ‘से’ प्रयुक्त होता है, परन्तु संस्कृत में भिन्न विभक्तियाँ हैं:
| करण (तृतीया) | अपादान (पञ्चमी) | |
|---|---|---|
| अर्थ | साधन / instrument | अलगाव / separation |
| प्रश्न | किससे? (by means of) | कहाँ से? (from where) |
| उदाहरण | कलमेन लिखति | विद्यालयात् आगच्छति |
| हिन्दी | कलम से लिखता है | विद्यालय से आता है |
कुञ्जी: करण = ‘tool/instrument से’, अपादान = ‘place/source से (अलग होकर)‘
कारक पहचानने की विधि
वाक्य में कारक पहचानने के लिए क्रिया से प्रश्न पूछें:
| प्रश्न | कारक | विभक्ति |
|---|---|---|
| कौन करता है? | कर्ता | प्रथमा |
| क्या/किसे करता है? | कर्म | द्वितीया |
| किससे/कैसे करता है? | करण | तृतीया |
| किसके लिए करता है? | सम्प्रदान | चतुर्थी |
| कहाँ से (अलग)? | अपादान | पञ्चमी |
| कहाँ/कब? | अधिकरण | सप्तमी |
अभ्यास — कारक पहचानें
वाक्य 1: बालकः हस्तेन फलम् वृक्षात् गृहे खादति।
(बालक हाथ से फल वृक्ष से (तोड़कर) घर में खाता है।)
| शब्द | कारक | विभक्ति | कैसे पहचाना? |
|---|---|---|---|
| बालकः | कर्ता | प्रथमा | कौन खाता है? → बालक |
| हस्तेन | करण | तृतीया | किससे खाता है? → हाथ से |
| फलम् | कर्म | द्वितीया | क्या खाता है? → फल |
| वृक्षात् | अपादान | पञ्चमी | कहाँ से? → वृक्ष से |
| गृहे | अधिकरण | सप्तमी | कहाँ खाता है? → घर में |
वाक्य 2: गुरुः शिष्याय ज्ञानम् ददाति।
(गुरु शिष्य के लिए ज्ञान देता है।)
| शब्द | कारक | विभक्ति | कैसे पहचाना? |
|---|---|---|---|
| गुरुः | कर्ता | प्रथमा | कौन देता है? → गुरु |
| शिष्याय | सम्प्रदान | चतुर्थी | किसके लिए? → शिष्य के लिए |
| ज्ञानम् | कर्म | द्वितीया | क्या देता है? → ज्ञान |
वाक्य 3: नद्याम् बालकाः क्रीडन्ति।
(नदी में बालक खेलते हैं।)
| शब्द | कारक | विभक्ति | कैसे पहचाना? |
|---|---|---|---|
| नद्याम् | अधिकरण | सप्तमी | कहाँ खेलते हैं? → नदी में |
| बालकाः | कर्ता | प्रथमा | कौन खेलते हैं? → बालक |
मूल पाठ में प्रयोग
इस वाक्य में सभी कारक पहचानें:
बालकः विद्यालये गुरोः समीपे पुस्तकेन विद्याम् पठति।
| शब्द | अर्थ | कारक | विभक्ति |
|---|---|---|---|
| बालकः | बालक (ने) | कर्ता | प्रथमा |
| विद्यालये | विद्यालय में | अधिकरण | सप्तमी |
| गुरोः | गुरु के | सम्बन्ध | षष्ठी |
| समीपे | समीप/पास में | अधिकरण | सप्तमी |
| पुस्तकेन | पुस्तक से | करण | तृतीया |
| विद्याम् | विद्या को | कर्म | द्वितीया |
अनुवाद: बालक विद्यालय में गुरु के समीप पुस्तक से विद्या पढ़ता है।
सारांश सारणी
| कारक | विभक्ति | चिह्न (राम) | प्रश्न | हिन्दी |
|---|---|---|---|---|
| कर्ता | प्रथमा | रामः | कौन? | —ने |
| कर्म | द्वितीया | रामम् | क्या/किसे? | —को |
| करण | तृतीया | रामेण | किससे? | —से (साधन) |
| सम्प्रदान | चतुर्थी | रामाय | किसके लिए? | —के लिए |
| अपादान | पञ्चमी | रामात् | कहाँ से? | —से (अलग) |
| (सम्बन्ध) | षष्ठी | रामस्य | किसका? | —का/के/की |
| अधिकरण | सप्तमी | रामे | कहाँ/कब? | —में/पर |
याद रखें
- 6 कारक = कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, अधिकरण
- षष्ठी (सम्बन्ध) कारक नहीं है — यह शब्दों के बीच सम्बन्ध बताती है
- करण = साधन से (तृतीया), अपादान = अलग होकर से (पञ्चमी) — दोनों ‘से’ हैं, अर्थ भिन्न
- कारक पहचानने के लिए क्रिया से प्रश्न पूछें — कौन, क्या, किससे, किसके लिए, कहाँ से, कहाँ
- विभक्ति रूप शब्द-रूप पाठों में सीखा, अब कारक = वह अर्थ जो विभक्ति प्रकट करती है
अभ्यास
'कारक' का शाब्दिक अर्थ क्या है?