निषेधवाचक अव्यय — न, मा, नहि
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निषेधवाचक अव्यय क्या हैं?
निषेधवाचक अव्यय वे शब्द हैं जो क्रिया या कथन का निषेध (negation) करते हैं — ‘नहीं’, ‘मत’।
संस्कृत में तीन प्रमुख निषेधवाचक अव्यय हैं: न, मा, नहि। प्रत्येक का प्रयोग भिन्न सन्दर्भ में होता है।
1. न (नहीं / not)
‘न’ सबसे सामान्य और सबसे अधिक प्रयुक्त निषेधवाचक अव्यय है। इसका अर्थ है ‘नहीं’।
प्रयोग: ‘न’ प्रायः क्रिया से पहले
सः न गच्छति। = वह नहीं जाता। अहं न जानामि। = मैं नहीं जानता। ते न आगच्छन्ति। = वे नहीं आते।
‘न’ किसी भी काल (tense) में
| काल | उदाहरण | अर्थ |
|---|---|---|
| वर्तमान (लट्) | सः न गच्छति | वह नहीं जाता |
| भूतकाल (लङ्) | सः न अगच्छत् | वह नहीं गया |
| भविष्यत् (लृट्) | सः न गमिष्यति | वह नहीं जाएगा |
’न’ विशेषण / संज्ञा से पहले
‘न’ केवल क्रिया का ही नहीं, किसी भी शब्द का निषेध कर सकता है:
न सुन्दरम् = सुन्दर नहीं न सत्यम् = सत्य नहीं न धर्मः = धर्म नहीं
न…न (neither…nor)
दोहरे निषेध के लिए ‘न…न’ का प्रयोग:
न सुखं न दुःखम्। = न सुख, न दुःख। (Neither happiness nor sorrow.) न अत्र न तत्र। = न यहाँ, न वहाँ।
2. मा (मत / don’t — prohibition)
‘मा’ निषेधाज्ञा (prohibition) के लिए प्रयुक्त होता है — ‘मत करो’, ‘ऐसा न करो’।
महत्त्वपूर्ण भेद: ‘न’ बनाम ‘मा'
| 'न’ (नहीं) | ‘मा’ (मत) |
|---|---|
| तथ्य का निषेध (negation of fact) | आज्ञा का निषेध (prohibition) |
| सः न गच्छति (वह नहीं जाता — तथ्य) | मा गच्छ (मत जाओ — आज्ञा) |
| सभी लकारों के साथ | लोट् या लुङ् लकार के साथ |
’मा’ + लोट् लकार (imperative)
मा गच्छ। = मत जाओ। मा वद। = मत बोलो। मा कुरु। = मत करो। मा भैषीः। = मत डरो। (भी + लुङ्)
गीता से प्रसिद्ध उदाहरण
मा शुचः। (गीता 18.66) = शोक मत करो। मा ते व्यथा मा च विमूढभावो। (गीता 11.49) = तुझे व्यथा न हो और मूढ़ भाव भी न हो।
3. नहि (निश्चय ही नहीं / certainly not)
‘नहि’ (= न + हि) दृढ़ / बलपूर्वक निषेध के लिए प्रयुक्त होता है — ‘निश्चय ही नहीं’ (certainly not, indeed not)।
उदाहरण
नहि ज्ञानेन सदृशं पवित्रम् इह विद्यते। (गीता 4.38) निश्चय ही ज्ञान के समान पवित्र इस लोक में कुछ नहीं है।
नहि कश्चित् क्षणम् अपि जातु तिष्ठति अकर्मकृत्। (गीता 3.5) निश्चय ही कोई भी एक क्षण भी कर्म किए बिना नहीं रहता।
‘न’ बनाम ‘नहि’ — बल का अन्तर
| ’न’ (सामान्य) | ‘नहि’ (दृढ़) |
|---|---|
| सः न जानाति = वह नहीं जानता | नहि कोऽपि जानाति = निश्चय ही कोई नहीं जानता |
| न अस्ति = नहीं है | नहि अस्ति = निश्चय ही नहीं है |
सारांश सारणी
| अव्यय | अर्थ | प्रयोग | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| न | नहीं | सामान्य निषेध, सभी लकारों के साथ | सः न गच्छति |
| मा | मत | निषेधाज्ञा, लोट्/लुङ् के साथ | मा गच्छ |
| नहि | निश्चय ही नहीं | दृढ़ निषेध, बलपूर्वक | नहि ज्ञानेन सदृशम् |
अभ्यास — सही अव्यय चुनें
| वाक्य | भरें | उत्तर |
|---|---|---|
| वह नहीं पढ़ता | सः ___ पठति | न |
| यहाँ मत बैठो | अत्र ___ उपविश | मा |
| निश्चय ही कोई नहीं जानता | ___ कोऽपि जानाति | नहि |
| मैं नहीं जाऊँगा | अहं ___ गमिष्यामि | न |
| शोक मत करो | ___ शुचः | मा |
याद रखें
- न = ‘नहीं’ — सामान्य निषेध, सभी काल/लकारों में, क्रिया से पहले
- मा = ‘मत’ — निषेधाज्ञा (prohibition), केवल लोट्/लुङ् लकार में
- नहि = ‘निश्चय ही नहीं’ — दृढ़ / बलपूर्वक निषेध
- न…न = ‘न यह न वह’ (neither…nor)
- वर्तमान/भूत/भविष्य में ‘नहीं’ = न, आदेश में ‘मत’ = मा
अभ्यास
सामान्य निषेध (general negation) के लिए कौन-सा अव्यय प्रयुक्त होता है?