लोट् लकार — आज्ञार्थ
लोट् लकार = आज्ञार्थ (imperative mood)। इसका प्रयोग तीन स्थितियों में होता है:
- आज्ञा (command): गच्छ! = जा!
- प्रार्थना (request): कृपया पठतु = कृपया पढ़ें
- आशीर्वाद (blessing): चिरं जीवतु = चिरकाल जीवित रहे
लोट् लकार प्रत्यय सारणी
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|
| प्रथम पुरुष | -तु | -ताम् | -न्तु |
| मध्यम पुरुष | — (शून्य) | -तम् | -त |
| उत्तम पुरुष | -आनि | -आव | -आम |
मध्यम पुरुष एकवचन में मूल प्रत्यय ‘-हि’ है, परन्तु भ्वादि गण में यह प्रायः लुप्त हो जाता है — केवल धातु अंश शेष रहता है।
गम् धातु — लोट् लकार (9 रूप)
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|
| प्रथम पुरुष (वह/वे) | गच्छतु | गच्छताम् | गच्छन्तु |
| मध्यम पुरुष (तू/तुम) | गच्छ | गच्छतम् | गच्छत |
| उत्तम पुरुष (मैं/हम) | गच्छानि | गच्छाव | गच्छाम |
पठ् धातु — लोट् लकार
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|
| प्रथम पुरुष | पठतु | पठताम् | पठन्तु |
| मध्यम पुरुष | पठ | पठतम् | पठत |
| उत्तम पुरुष | पठानि | पठाव | पठाम |
भू धातु — लोट् लकार
भू → अंश: भव-
| एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|
| प्रथम पुरुष | भवतु | भवताम् | भवन्तु |
| मध्यम पुरुष | भव | भवतम् | भवत |
| उत्तम पुरुष | भवानि | भवाव | भवाम |
लोट् के विभिन्न प्रयोग
1. आज्ञा (Command)
| वाक्य | अर्थ |
|---|
| गच्छ | (तू) जा! |
| पठत | (तुम सब) पढ़ो! |
| तत्र तिष्ठ | (तू) वहाँ खड़ा रह! |
2. प्रार्थना / विनम्र अनुरोध (Request)
| वाक्य | अर्थ |
|---|
| कृपया इदं पठतु | कृपया यह पढ़ें |
| भवान् उपविशतु | आप बैठें |
3. आशीर्वाद (Blessing)
| वाक्य | अर्थ |
|---|
| चिरं जीवतु | चिरकाल जीवित रहे |
| सुखी भवतु | सुखी हो |
| विजयी भव | विजयी हो |
4. उत्तम पुरुष — इच्छा / संकल्प
| वाक्य | अर्थ |
|---|
| गच्छानि | मैं जाऊँ (मुझे जाने दो) |
| पठाम | हम पढ़ें (चलो पढ़ते हैं) |
लट् बनाम लोट् — तुलना
| पुरुष + वचन | गम् (लट्) | गम् (लोट्) |
|---|
| प्र.पु.ए. | गच्छति | गच्छतु |
| प्र.पु.द्वि. | गच्छतः | गच्छताम् |
| प्र.पु.ब. | गच्छन्ति | गच्छन्तु |
| म.पु.ए. | गच्छसि | गच्छ |
| म.पु.द्वि. | गच्छथः | गच्छतम् |
| म.पु.ब. | गच्छथ | गच्छत |
| उ.पु.ए. | गच्छामि | गच्छानि |
| उ.पु.द्वि. | गच्छावः | गच्छाव |
| उ.पु.ब. | गच्छामः | गच्छाम |
ध्यान दें — लोट् में धातु अंश वही रहता है। केवल प्रत्यय बदलते हैं: -ति → -तु, -न्ति → -न्तु, -मि → -आनि।
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|
| बालक, संस्कृतं पठ | हे बालक, संस्कृत पढ़! |
| सर्वे बालकाः पठन्तु | सब लड़के पढ़ें |
| गुरुः कथां पठतु | गुरु कथा पढ़ें |
| वयं विद्यालयं गच्छाम | हम विद्यालय चलें |
मूल पाठ में प्रयोग
हे बालक, विद्यालयं गच्छ। तत्र गुरुं नमतु। संस्कृतं पठ। ज्ञानं प्राप्नुहि।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|
| हे बालक | हे लड़के! | सम्बोधन |
| गच्छ | (तू) जा! | गम्, लोट्, म.पु.ए. |
| नमतु | (वह) नमन करे | नम्, लोट्, प्र.पु.ए. |
| पठ | (तू) पढ़! | पठ्, लोट्, म.पु.ए. |
अनुवाद: हे लड़के, विद्यालय जा। वहाँ गुरु को नमन कर। संस्कृत पढ़। ज्ञान प्राप्त कर।
याद रखें
- लोट् लकार = आज्ञार्थ — आज्ञा, प्रार्थना, आशीर्वाद, इच्छा के लिए
- प्रमुख प्रत्यय: -तु/-ताम्/-न्तु (प्र.पु.), शून्य/-तम्/-त (म.पु.), -आनि/-आव/-आम (उ.पु.)
- मध्यम पुरुष एकवचन में प्रायः केवल धातु अंश रहता है: गच्छ, पठ, भव
- प्रथम पुरुष रूप सबसे अधिक प्रयुक्त: गच्छतु, भवतु, पठन्तु
संवाद अभ्यास
गुरुः — हे राम! अत्र आगच्छ।
शिष्यः — आगच्छामि, गुरुदेव।
गुरुः — पुस्तकं पठ।
शिष्यः — आम्, पठामि।
गुरुः — हे बालकाः! सर्वे पठत।
शिष्यः — वयं पठामः, गुरुदेव।
गुरुः — शोभनम्! सदा एवं पठत।