स्थान और काल — गन्तव्य एवं समय
अनुमानित समय: 15 मिनट
गन्तव्य शब्द
पिछले पाठ में हमने गम् धातु सीखी। अब सीखें — कहाँ जाता है?
ये सभी शब्द द्वितीया विभक्ति (कर्म कारक) में हैं — ‘को’ के अर्थ में।
ध्यान दें — गृहम् को गृहं भी लिखा जाता है। व्यञ्जन से पहले म् को अनुस्वार (ं) लिखना संस्कृत में सामान्य है। दोनों का अर्थ एक ही है:
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| गृहम् | घर को |
| नगरम् | नगर को |
| ग्रामम् | गाँव को |
| आपणम् | बाज़ार को |
| पाठशालाम् | पाठशाला को |
| उद्यानम् | बाग को |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| अहं गृहं गच्छामि | मैं घर को जाता हूँ |
| सः ग्रामं गच्छति | वह गाँव को जाता है |
| त्वं पाठशालां गच्छसि किम्? | तू पाठशाला को जाता है क्या? |
| किं सः ग्रामं गच्छति? | क्या वह गाँव को जाता है? |
| किं त्वम् आपणं गच्छसि? | क्या तू बाज़ार को जाता है? |
काल-वाचक शब्द
समय-बोधक अव्यय
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्रातः | सवेरे |
| मध्याह्ने | दोपहर में |
| सायम् | शाम को |
| दिवा | दिन में |
| रात्रौ | रात्रि में |
| अद्य | आज |
| श्वः | कल (आने वाला) |
| ह्यः | कल (बीता हुआ) |
| परश्वः | परसों |
सम्बन्धवाचक काल-शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कदा | कब |
| यदा | जब |
| तदा | तब |
| सदा / सर्वदा / सदैव | हमेशा |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः सायम् उद्यानं गच्छति | वह शाम को बाग जाता है |
| अद्य अहं पाठशालां न गच्छामि | आज मैं पाठशाला नहीं जाता |
| कदा सः नगरं गच्छति? | कब वह नगर को जाता है? |
| अहं सदैव प्रातः उद्यानं गच्छामि | मैं सदा प्रातःकाल बाग जाता हूँ |
| सः दिवा नगरं गच्छति | वह दिन में नगर जाता है |
| अहं रात्रौ गृहं गच्छामि | मैं रात्रि में घर जाता हूँ |
भविष्यत् काल — गम् धातु
अब तक हमने वर्तमान काल (गच्छति) सीखा। अब भविष्यत् काल (जाएगा):
| सर्वनाम | पुरुष | वर्तमान (लट्) | भविष्यत् (लृट्) | अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| सः | प्रथम पुरुष | गच्छति | गमिष्यति | वह जाएगा |
| त्वम् | मध्यम पुरुष | गच्छसि | गमिष्यसि | तू जाएगा |
| अहम् | उत्तम पुरुष | गच्छामि | गमिष्यामि | मैं जाऊँगा |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः श्वः नगरं गमिष्यति | वह कल नगर जाएगा |
| त्वं परश्वः ग्रामं गमिष्यसि किम्? | तू परसों गाँव जाएगा क्या? |
| अहं श्वः प्रातः उद्यानं गमिष्यामि | मैं कल सवेरे बाग जाऊँगा |
यदि…तर्हि — शर्त वाक्य
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| यदि | यदि / अगर |
| तर्हि | तो |
| यथा | जैसे |
| तथा | वैसे |
| कथम् | कैसे |
उदाहरण वाक्य
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| यदि त्वं गमिष्यसि तर्हि अहं गमिष्यामि | अगर तू जाएगा तो मैं जाऊँगा |
| यदि त्वं न गमिष्यसि तर्हि अहं न गमिष्यामि | अगर तू नहीं जाएगा तो मैं नहीं जाऊँगा |
| यथा त्वं गच्छसि तथा सः गच्छति | जैसे तू जाता है वैसे वह जाता है |
मूल पाठ में प्रयोग
इन वाक्यों को पढ़ें — यहाँ केवल वही व्याकरण प्रयुक्त है जो अब तक सीखा है:
सः श्वः नगरं गमिष्यति। यदि त्वं प्रातः गमिष्यसि तर्हि अहम् अपि गमिष्यामि।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| सः | वह | प्रथम पुरुष सर्वनाम |
| श्वः | कल (आने वाला) | काल-वाचक अव्यय |
| नगरम् | नगर को | द्वितीया विभक्ति |
| गमिष्यति | (वह) जाएगा | गम् धातु, लृट्, प्रथम पुरुष |
| यदि | अगर | शर्तवाचक अव्यय |
| त्वम् | तू | मध्यम पुरुष सर्वनाम |
| प्रातः | सवेरे | काल-वाचक अव्यय |
| गमिष्यसि | (तू) जाएगा | गम् धातु, लृट्, मध्यम पुरुष |
| तर्हि | तो | शर्तवाचक अव्यय |
| अपि | भी | अव्यय |
| गमिष्यामि | (मैं) जाऊँगा | गम् धातु, लृट्, उत्तम पुरुष |
अन्वय: सः श्वः नगरम् गमिष्यति। यदि त्वम् प्रातः गमिष्यसि तर्हि अहम् अपि गमिष्यामि।
अनुवाद: वह कल नगर जाएगा। अगर तू सवेरे जाएगा तो मैं भी जाऊँगा।
याद रखें
- गन्तव्य (कर्म) शब्दों में -म् प्रत्यय है — गृहम्, नगरम्, ग्रामम्
- भविष्यत् काल में गम् → गमिष्य- + पुरुष प्रत्यय (-ति, -सि, -मि)
- कदा-यदा-तदा-सदा — काल-वाचक ‘-दा’ प्रत्यय, जैसे स्थान-वाचक ‘-त्र’ प्रत्यय
- यदि…तर्हि शर्त वाक्य बनाते हैं — ‘अगर…तो’
अभ्यास
प्रश्न 1 / 90 सही
'गृहम्' का अर्थ क्या है?