तद् शब्द — वह/वे (तृतीय पुरुष)
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तद् शब्द — संस्कृत का सर्वप्रमुख सर्वनाम
तद् (वह / वे) संस्कृत का सबसे महत्त्वपूर्ण सर्वनाम है। यह तृतीय पुरुष (third person) के लिए प्रयुक्त होता है और तीनों लिंगों — पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग — में रूपान्तर करता है।
संस्कृत में सर्वनाम (pronoun) की विशेषता है कि इसमें सम्बोधन विभक्ति नहीं होती। सर्वनाम से किसी को सीधे नहीं पुकारा जाता।
तद् शब्द — पुल्लिंग (Masculine)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सः | तौ | ते |
| द्वितीया | तम् | तौ | तान् |
| तृतीया | तेन | ताभ्याम् | तैः |
| चतुर्थी | तस्मै | ताभ्याम् | तेभ्यः |
| पञ्चमी | तस्मात् | ताभ्याम् | तेभ्यः |
| षष्ठी | तस्य | तयोः | तेषाम् |
| सप्तमी | तस्मिन् | तयोः | तेषु |
तद् शब्द — स्त्रीलिंग (Feminine)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सा | ते | ताः |
| द्वितीया | ताम् | ते | ताः |
| तृतीया | तया | ताभ्याम् | ताभिः |
| चतुर्थी | तस्यै | ताभ्याम् | ताभ्यः |
| पञ्चमी | तस्याः | ताभ्याम् | ताभ्यः |
| षष्ठी | तस्याः | तयोः | तासाम् |
| सप्तमी | तस्याम् | तयोः | तासु |
तद् शब्द — नपुंसकलिंग (Neuter)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | तत् | ते | तानि |
| द्वितीया | तत् | ते | तानि |
| तृतीया | तेन | ताभ्याम् | तैः |
| चतुर्थी | तस्मै | ताभ्याम् | तेभ्यः |
| पञ्चमी | तस्मात् | ताभ्याम् | तेभ्यः |
| षष्ठी | तस्य | तयोः | तेषाम् |
| सप्तमी | तस्मिन् | तयोः | तेषु |
ध्यान देने योग्य बातें
- प्रथमा एकवचन विशेष: पुल्लिंग में ‘सः’ और स्त्रीलिंग में ‘सा’ — ये ‘त’ से नहीं बल्कि ‘स’ से आरम्भ होते हैं। शेष सभी रूप ‘त’ से आरम्भ होते हैं।
- नपुंसकलिंग: तृतीया से सप्तमी तक के रूप पुल्लिंग के समान ही होते हैं। केवल प्रथमा और द्वितीया में अन्तर है।
- सर्वनाम में सम्बोधन नहीं: सर्वनामों में सम्बोधन विभक्ति नहीं होती।
उदाहरण वाक्य
- सः बालकः पठति। — वह बालक पढ़ता है।
- सा बालिका गच्छति। — वह बालिका जाती है।
- तत् पुस्तकम् अत्र अस्ति। — वह पुस्तक यहाँ है।
- तम् पश्य। — उसे देखो।
- तेन सह गच्छ। — उसके साथ जाओ।
- तस्मै फलं देहि। — उसके लिए फल दो।
- तस्य गृहम् सुन्दरम्। — उसका घर सुन्दर है।
- तेषु बालकेषु सः श्रेष्ठः। — उन बालकों में वह श्रेष्ठ है।
याद रखें
- तद् शब्द का प्रथमा एकवचन अनियमित है: सः (पुं), सा (स्त्री), तत् (नपुं)
- नपुंसकलिंग में प्रथमा = द्वितीया (तत्/ते/तानि)
- तृतीया से सप्तमी तक नपुंसकलिंग = पुल्लिंग
- स्त्रीलिंग में चतुर्थी-पञ्चमी-षष्ठी एकवचन पर ध्यान दें: तस्यै, तस्याः, तस्याः
- यद्, एतद् आदि सर्वनाम भी तद् के समान ही चलते हैं — तद् सीखना सबसे महत्त्वपूर्ण है
अभ्यास
प्रश्न 1 / 80 सही
तद् शब्द पुल्लिंग प्रथमा एकवचन का रूप क्या है?