निषेध वाक्य — 'न' और 'मा'
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‘न’ — नहीं
पिछले पाठों में हमने ‘न’ शब्द का परिचय पाया था। अब इसे विस्तार से सीखें।
न = नहीं। यह अव्यय है — इसका रूप कभी नहीं बदलता। यह सामान्य कथन-वाक्यों में निषेध (negation) के लिए प्रयुक्त होता है।
‘न’ का स्थान
न सदा क्रिया से ठीक पहले आता है:
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| सः न गच्छति | वह नहीं जाता |
| अहं न जानामि | मैं नहीं जानता |
| त्वं न पठसि | तू नहीं पढ़ता |
| सः तत्र न गच्छति | वह वहाँ नहीं जाता |
| सा न आगच्छति | वह (स्त्री) नहीं आती |
’न’ का प्रयोग — सभी कालों में
न का प्रयोग लट् (वर्तमान), लृट् (भविष्यत्), और लङ् (भूत काल) तीनों में होता है:
| काल | उदाहरण | अर्थ |
|---|---|---|
| वर्तमान (लट्) | सः न गच्छति | वह नहीं जाता |
| भविष्यत् (लृट्) | सः न गमिष्यति | वह नहीं जाएगा |
| भूत काल (लङ्) | सः न अगच्छत् | वह नहीं गया |
’मा’ — मत (निषेधात्मक आज्ञा)
मा = मत / Don’t! यह आज्ञात्मक निषेध के लिए प्रयुक्त होता है — जब किसी को कुछ करने से रोकना हो।
नियम
मा का प्रयोग लुङ् लकार (आज्ञार्थ भूत) या लोट् लकार (आज्ञार्थ) के साथ होता है — लट् लकार के साथ नहीं:
| संस्कृत | अर्थ | लकार |
|---|---|---|
| मा गमः | मत जा | लुङ् |
| मा वद | मत बोल | लोट् |
| मा भैषीः | मत डर | लुङ् |
| मा कुरु | मत कर | लोट् |
| मा शोच | मत दुःख कर | लोट् |
’न’ बनाम ‘मा’ — तुलना
| न (नहीं) | मा (मत) | |
|---|---|---|
| प्रकार | सामान्य निषेध (कथन) | आज्ञात्मक निषेध (आदेश) |
| लकार | लट्, लृट्, लङ् | लुङ्, लोट् |
| उदाहरण | सः न गच्छति | मा गमः |
| अर्थ | वह नहीं जाता | (तू) मत जा |
दोहरा निषेध — न…न
न…न = neither…nor (न यह, न वह):
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| न अहं जानामि न सः जानाति | न मैं जानता हूँ न वह जानता है |
| न तत्र न अत्र | न वहाँ न यहाँ |
| सः न गच्छति न आगच्छति | वह न जाता है न आता है |
| न सुखं न दुःखम् | न सुख न दुःख |
अन्य निषेधात्मक शब्द
| शब्द | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| नहि | नहीं (बलपूर्वक) | सः नहि गच्छति |
| न कदापि / कदापि न | कभी नहीं | सः कदापि न गच्छति |
| न कुत्रापि | कहीं नहीं | सः न कुत्रापि गच्छति |
| न कोऽपि | कोई नहीं | न कोऽपि गच्छति |
| न किमपि | कुछ नहीं | न किमपि अस्ति |
प्रश्न-निषेध मिश्रण
प्रश्नवाचक शब्द और ‘न’ को एक साथ प्रयोग कर सकते हैं:
| संस्कृत | अर्थ |
|---|---|
| किं सः न गच्छति? | क्या वह नहीं जाता? |
| कस्मात् न गच्छसि? | (तू) क्यों नहीं जाता? |
| कदा सः न गच्छति? | कब वह नहीं जाता? |
‘न’ का स्थान — वाक्य-संरचना
न सदा उस शब्द के ठीक पहले आता है जिसका निषेध करना है:
| संस्कृत | अर्थ | किसका निषेध? |
|---|---|---|
| सः न गच्छति | वह नहीं जाता | क्रिया का निषेध |
| न सः गच्छति | वह नहीं जाता (बल ‘वह’ पर) | कर्ता पर बल |
| सः तत्र न गच्छति | वह वहाँ नहीं जाता | क्रिया का निषेध |
| सः न तत्र गच्छति | वह वहाँ नहीं (अन्यत्र) जाता | स्थान का निषेध |
मूल पाठ में प्रयोग
सः प्रातः गच्छति। अहं न गच्छामि। कस्मात् न गच्छसि? मा पृच्छ। सः न जानाति अहं न जानामि।
| शब्द | अर्थ | व्याकरण |
|---|---|---|
| सः | वह | प्रथम पुरुष सर्वनाम |
| प्रातः | सवेरे | काल-वाचक अव्यय |
| गच्छति | (वह) जाता है | गम् धातु, लट्, प्र. पु. |
| अहम् | मैं | उत्तम पुरुष सर्वनाम |
| न | नहीं | नकारात्मक अव्यय |
| गच्छामि | (मैं) जाता हूँ | गम् धातु, लट्, उ. पु. |
| कस्मात् | क्यों | किम् शब्द, पञ्चमी विभक्ति |
| मा | मत | निषेधात्मक आज्ञा अव्यय |
| पृच्छ | पूछ | प्रच्छ् धातु, लोट्, म. पु. |
| जानाति | जानता है | ज्ञा धातु, लट्, प्र. पु. |
अन्वय: सः प्रातः गच्छति। अहम् न गच्छामि। कस्मात् न गच्छसि? मा पृच्छ। सः न जानाति, अहम् न जानामि।
अनुवाद: वह सवेरे जाता है। मैं नहीं जाता। क्यों नहीं जाता? मत पूछ। न वह जानता है, न मैं जानता हूँ।
याद रखें
- न = नहीं — सामान्य कथन में, लट्/लृट्/लङ् के साथ
- मा = मत — आज्ञात्मक निषेध में, लुङ्/लोट् के साथ
- न…न = neither…nor — दोहरा निषेध
- ‘न’ सदा उस शब्द के ठीक पहले आता है जिसका निषेध हो
- कदापि न = कभी नहीं, न कोऽपि = कोई नहीं, न किमपि = कुछ नहीं
संवाद अभ्यास
गुरुः — किं त्वं संस्कृतं जानासि? शिष्यः — न, अहं संस्कृतं न जानामि। किन्तु अधुना पठामि। गुरुः — किं रामः अत्र अस्ति? शिष्यः — न, रामः अत्र नास्ति। सः गृहे अस्ति। गुरुः — किं बालकाः न पठन्ति? शिष्यः — न, ते पठन्ति। ते आलस्यं न कुर्वन्ति।
अभ्यास
'सः न गच्छति' में 'न' का क्या कार्य है?