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इस मॉड्यूल के पाठ

निषेध वाक्य — 'न' और 'मा'

अनुमानित समय: 12 मिनट

‘न’ — नहीं

पिछले पाठों में हमने ‘न’ शब्द का परिचय पाया था। अब इसे विस्तार से सीखें।

= नहीं। यह अव्यय है — इसका रूप कभी नहीं बदलता। यह सामान्य कथन-वाक्यों में निषेध (negation) के लिए प्रयुक्त होता है।

‘न’ का स्थान

सदा क्रिया से ठीक पहले आता है:

संस्कृतअर्थ
सः न गच्छतिवह नहीं जाता
अहं न जानामिमैं नहीं जानता
त्वं न पठसितू नहीं पढ़ता
सः तत्र न गच्छतिवह वहाँ नहीं जाता
सा न आगच्छतिवह (स्त्री) नहीं आती

’न’ का प्रयोग — सभी कालों में

का प्रयोग लट् (वर्तमान), लृट् (भविष्यत्), और लङ् (भूत काल) तीनों में होता है:

कालउदाहरणअर्थ
वर्तमान (लट्)सः न गच्छतिवह नहीं जाता
भविष्यत् (लृट्)सः न गमिष्यतिवह नहीं जाएगा
भूत काल (लङ्)सः न अगच्छत्वह नहीं गया

’मा’ — मत (निषेधात्मक आज्ञा)

मा = मत / Don’t! यह आज्ञात्मक निषेध के लिए प्रयुक्त होता है — जब किसी को कुछ करने से रोकना हो।

नियम

मा का प्रयोग लुङ् लकार (आज्ञार्थ भूत) या लोट् लकार (आज्ञार्थ) के साथ होता है — लट् लकार के साथ नहीं:

संस्कृतअर्थलकार
मा गमःमत जालुङ्
मा वदमत बोललोट्
मा भैषीःमत डरलुङ्
मा कुरुमत करलोट्
मा शोचमत दुःख करलोट्

’न’ बनाम ‘मा’ — तुलना

(नहीं)मा (मत)
प्रकारसामान्य निषेध (कथन)आज्ञात्मक निषेध (आदेश)
लकारलट्, लृट्, लङ्लुङ्, लोट्
उदाहरणसः गच्छतिमा गमः
अर्थवह नहीं जाता(तू) मत जा

दोहरा निषेध — न…न

न…न = neither…nor (न यह, न वह):

संस्कृतअर्थ
न अहं जानामि न सः जानातिन मैं जानता हूँ न वह जानता है
न तत्र न अत्रन वहाँ न यहाँ
सः न गच्छति न आगच्छतिवह न जाता है न आता है
न सुखं न दुःखम्न सुख न दुःख

अन्य निषेधात्मक शब्द

शब्दअर्थउदाहरण
नहिनहीं (बलपूर्वक)सः नहि गच्छति
न कदापि / कदापि नकभी नहींसः कदापि न गच्छति
न कुत्रापिकहीं नहींसः न कुत्रापि गच्छति
न कोऽपिकोई नहींन कोऽपि गच्छति
न किमपिकुछ नहींन किमपि अस्ति

प्रश्न-निषेध मिश्रण

प्रश्नवाचक शब्द और ‘न’ को एक साथ प्रयोग कर सकते हैं:

संस्कृतअर्थ
किं सः न गच्छति?क्या वह नहीं जाता?
कस्मात् न गच्छसि?(तू) क्यों नहीं जाता?
कदा सः न गच्छति?कब वह नहीं जाता?

‘न’ का स्थान — वाक्य-संरचना

सदा उस शब्द के ठीक पहले आता है जिसका निषेध करना है:

संस्कृतअर्थकिसका निषेध?
सः न गच्छतिवह नहीं जाताक्रिया का निषेध
न सः गच्छतिवह नहीं जाता (बल ‘वह’ पर)कर्ता पर बल
सः तत्र न गच्छतिवह वहाँ नहीं जाताक्रिया का निषेध
सः न तत्र गच्छतिवह वहाँ नहीं (अन्यत्र) जातास्थान का निषेध

मूल पाठ में प्रयोग

सः प्रातः गच्छति। अहं न गच्छामि। कस्मात् न गच्छसि? मा पृच्छ। सः न जानाति अहं न जानामि।

शब्दअर्थव्याकरण
सःवहप्रथम पुरुष सर्वनाम
प्रातःसवेरेकाल-वाचक अव्यय
गच्छति(वह) जाता हैगम् धातु, लट्, प्र. पु.
अहम्मैंउत्तम पुरुष सर्वनाम
नहींनकारात्मक अव्यय
गच्छामि(मैं) जाता हूँगम् धातु, लट्, उ. पु.
कस्मात्क्योंकिम् शब्द, पञ्चमी विभक्ति
मामतनिषेधात्मक आज्ञा अव्यय
पृच्छपूछप्रच्छ् धातु, लोट्, म. पु.
जानातिजानता हैज्ञा धातु, लट्, प्र. पु.

अन्वय: सः प्रातः गच्छति। अहम् न गच्छामि। कस्मात् न गच्छसि? मा पृच्छ। सः न जानाति, अहम् न जानामि।

अनुवाद: वह सवेरे जाता है। मैं नहीं जाता। क्यों नहीं जाता? मत पूछ। न वह जानता है, न मैं जानता हूँ।

याद रखें

  1. = नहीं — सामान्य कथन में, लट्/लृट्/लङ् के साथ
  2. मा = मत — आज्ञात्मक निषेध में, लुङ्/लोट् के साथ
  3. न…न = neither…nor — दोहरा निषेध
  4. ‘न’ सदा उस शब्द के ठीक पहले आता है जिसका निषेध हो
  5. कदापि न = कभी नहीं, न कोऽपि = कोई नहीं, न किमपि = कुछ नहीं

संवाद अभ्यास

गुरुः — किं त्वं संस्कृतं जानासि? शिष्यः — न, अहं संस्कृतं न जानामि। किन्तु अधुना पठामि। गुरुः — किं रामः अत्र अस्ति? शिष्यः — न, रामः अत्र नास्ति। सः गृहे अस्ति। गुरुः — किं बालकाः न पठन्ति? शिष्यः — न, ते पठन्ति। ते आलस्यं न कुर्वन्ति।

अभ्यास

प्रश्न 1 / 70 सही

'सः न गच्छति' में 'न' का क्या कार्य है?