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पञ्चमी विभक्ति — अपादान कारक

अनुमानित समय: 20 मिनट

पञ्चमी विभक्ति — अपादान कारक

पञ्चमी विभक्ति वाक्य में अपादान कारक प्रकट करती है। अपादान = जहाँ से अलग होना (separation) — कोई वस्तु या व्यक्ति किसी स्थान/व्यक्ति से अलग हो रहा है।

कुञ्जी: अपादान = “कहाँ से? किससे अलग?” का उत्तर

पञ्चमी विभक्ति के चिह्न

शब्द प्रकारएकवचनद्विवचनबहुवचन
पुं. अकारान्त (राम)रामात्रामाभ्याम्रामेभ्यः
पुं. उकारान्त (गुरु)गुरोःगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
स्त्री. आकारान्त (लता)लतायाःलताभ्याम्लताभ्यः
स्त्री. ईकारान्त (नदी)नद्याःनदीभ्याम्नदीभ्यः
नपुं. अकारान्त (फल)फलात्फलाभ्याम्फलेभ्यः

ध्यान दें: द्विवचन में पञ्चमी = तृतीया = चतुर्थी (-भ्याम्)। बहुवचन में पञ्चमी = चतुर्थी (-भ्यः/-एभ्यः)।

पञ्चमी विभक्ति के प्रयोग

1. अपादान — अलगाव (Separation)

सबसे मूलभूत प्रयोग — जहाँ से कोई अलग हो:

वाक्यअपादानअर्थ
वृक्षात् पत्रम् पततिवृक्षात्वृक्ष से पत्र गिरता है
ग्रामात् आगच्छतिग्रामात्गाँव से आता है
गृहात् निर्गच्छतिगृहात्घर से निकलता है
पर्वतात् नदी प्रवहतिपर्वतात्पर्वत से नदी बहती है

सूत्र: “ध्रुवम् अपाये अपादानम्” — जो स्थिर रहे (ध्रुव) और जिससे अलगाव हो, वह अपादान है।

2. भय (Fear)

‘भी’ (डरना), ‘भय’ (डर) शब्दों के साथ जिससे डर हो = पञ्चमी:

वाक्यअर्थ
बालकः सर्पात् बिभेतिबालक साँप से डरता है
चोरात् भयम् अस्तिचोर से डर है
मृत्योः बिभेतिमृत्यु से डरता है

3. रक्षण (Protection)

‘रक्ष्’ (रक्षा करना), ‘त्रै’ (बचाना) धातुओं के साथ जिससे रक्षा = पञ्चमी:

वाक्यअर्थ
पापात् रक्षतिपाप से बचाता है
शत्रोः त्रायतेशत्रु से रक्षा करता है
गुरुः शिष्यम् अज्ञानात् रक्षतिगुरु शिष्य को अज्ञान से बचाता है

4. तुलना (Comparison)

जिससे तुलना हो वह पञ्चमी में:

वाक्यअर्थ
रामः कृष्णात् बलवान्राम कृष्ण से बलवान है
हिमालयः विन्ध्यात् उन्नतःहिमालय विन्ध्य से ऊँचा है
विद्या धनात् श्रेष्ठाविद्या धन से श्रेष्ठ है

ध्यान दें: तुलना में ‘तर’ प्रत्यय (comparative) भी प्रयुक्त हो सकता है — ‘कृष्णात् बलवत्तरः’ (कृष्ण से अधिक बलवान)

5. विशेष धातुओं के साथ

कुछ विशेष धातुओं और शब्दों के साथ:

शब्द/धातुउदाहरणअर्थ
जन् (उत्पन्न)प्रकृतेः जायतेप्रकृति से उत्पन्न
पृथक् (अलग)समूहात् पृथक्समूह से अलग
बहिः (बाहर)गृहात् बहिःघर से बाहर
(तक)समुद्रात् आ हिमालयम्समुद्र से हिमालय तक

करण (तृतीया) बनाम अपादान (पञ्चमी) — विस्तृत अन्तर

हिन्दी में दोनों के लिए ‘से’ प्रयुक्त होता है। कैसे पहचानें?

प्रश्नकरण (तृतीया)अपादान (पञ्चमी)
क्या अलगाव है?नहींहाँ
क्या साधन है?हाँनहीं
उदाहरणकलम से लिखतावृक्ष से गिरता
अर्थby means ofaway from

कुञ्जी: यदि ‘से’ का अर्थ ‘tool/instrument’ है → तृतीया। यदि ‘from/away from’ है → पञ्चमी।

अभ्यास — अपादान पहचानें

वाक्य 1: बालकः विद्यालयात् गृहम् आगच्छति।

(बालक विद्यालय से घर आता है।)

शब्दविभक्तिकारक
बालकःप्रथमाकर्ता
विद्यालयात्पञ्चमीअपादान
गृहम्द्वितीयाकर्म (गन्तव्य)

वाक्य 2: गङ्गा हिमालयात् प्रवहति।

(गङ्गा हिमालय से बहती है।)

शब्दविभक्तिकारक
गङ्गाप्रथमाकर्ता
हिमालयात्पञ्चमीअपादान

मूल पाठ में प्रयोग

गङ्गा हिमालयात् प्रवहति। बालकः सर्पात् बिभेति। गुरुः शिष्यम् अज्ञानात् रक्षति। विद्या धनात् श्रेष्ठा।

शब्दअर्थव्याकरण
हिमालयात्हिमालय सेपञ्चमी एकवचन (अपादान)
सर्पात्साँप सेपञ्चमी एकवचन (भय)
अज्ञानात्अज्ञान सेपञ्चमी एकवचन (रक्षण)
धनात्धन सेपञ्चमी एकवचन (तुलना)

अनुवाद: गङ्गा हिमालय से बहती है। बालक साँप से डरता है। गुरु शिष्य को अज्ञान से बचाता है। विद्या धन से श्रेष्ठ है।

याद रखें

  1. पञ्चमी = अपादान — “कहाँ से? किससे अलग?” का उत्तर
  2. भय (डरना) → जिससे भय हो = पञ्चमी — सर्पात् बिभेति
  3. रक्षण (बचाना) → जिससे बचाये = पञ्चमी — पापात् रक्षति
  4. तुलना (comparison) → जिससे तुलना = पञ्चमी — धनात् श्रेष्ठा
  5. करण (तृतीया) = साधन से, अपादान (पञ्चमी) = अलगाव से

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

पञ्चमी विभक्ति का मुख्य कारक कौन-सा है?