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इस मॉड्यूल के पाठ

वाच्य परिवर्तन अभ्यास

अनुमानित समय: 18 मिनट

वाच्य परिवर्तन — सम्पूर्ण पुनरावलोकन

इस पाठ में हम तीनों वाच्यों के बीच परिवर्तन (conversion) का अभ्यास करेंगे।

तीनों वाच्यों का सार

कर्तृवाच्यकर्मवाच्यभाववाच्य
प्रधानकर्ताकर्मभाव/क्रिया
कर्ताप्रथमातृतीयातृतीया
कर्मद्वितीयाप्रथमा(नहीं)
क्रियाकर्ता के अनुसारकर्म के अनुसारसदैव प्र.पु.ए.
पदपरस्मै/आत्मनेआत्मनेपदआत्मनेपद
धातु प्रकारसभीसकर्मकअकर्मक

परिवर्तन चरण

कर्तृवाच्य → कर्मवाच्य (सकर्मक धातु)

  1. कर्ता: प्रथमा → तृतीया
  2. कर्म: द्वितीया → प्रथमा
  3. क्रिया: धातु + य + आत्मनेपद (कर्म के वचन के अनुसार)

रामः ग्रन्थं पठतिरामेण ग्रन्थः पठ्यते

कर्तृवाच्य → भाववाच्य (अकर्मक धातु)

  1. कर्ता: प्रथमा → तृतीया
  2. कोई कर्म नहीं
  3. क्रिया: धातु + य + ते (सदैव एकवचन)

बालकाः हसन्तिबालकैः हस्यते

कर्मवाच्य → कर्तृवाच्य

  1. कर्ता: तृतीया → प्रथमा
  2. कर्म: प्रथमा → द्वितीया
  3. क्रिया: मूल धातु + परस्मैपद (कर्ता के वचन के अनुसार)

रामेण ग्रन्थः पठ्यतेरामः ग्रन्थं पठति

अभ्यास — सकर्मक धातुएँ

पठ् (पढ़ना) — सकर्मक

कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
छात्रः पाठं पठतिछात्रेण पाठः पठ्यते
छात्रौ पाठं पठतःछात्राभ्यां पाठः पठ्यते
छात्राः पाठं पठन्तिछात्रैः पाठः पठ्यते

ध्यान दें — कर्मवाच्य में क्रिया कर्म (पाठः, एकवचन) के अनुसार है, कर्ता के वचन के अनुसार नहीं।

लिख् (लिखना) — सकर्मक

कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
सः पत्रं लिखतितेन पत्रं लिख्यते
सा पत्राणि लिखतितया पत्राणि लिख्यन्ते

अभ्यास — अकर्मक धातुएँ

गम् (जाना) — अकर्मक

कर्तृवाच्यभाववाच्य
सः गच्छतितेन गम्यते
तौ गच्छतःताभ्याम् गम्यते
ते गच्छन्तितैः गम्यते

सभी भाववाच्य वाक्यों में क्रिया गम्यते (एकवचन) ही है!

हस् (हँसना) — अकर्मक

कर्तृवाच्यभाववाच्य
बालकः हसतिबालकेन हस्यते
बालकाः हसन्तिबालकैः हस्यते

मिश्रित अभ्यास — वाच्य पहचानिए

वाक्यवाच्यकारण
गुरुः शिष्यं पाठयतिकर्तृवाच्यकर्ता प्रथमा में, क्रिया कर्ता के अनुसार
गुरुणा शिष्यः पाठ्यतेकर्मवाच्यकर्ता तृतीया, कर्म प्रथमा, सकर्मक
तेन हस्यतेभाववाच्यकर्ता तृतीया, कोई कर्म नहीं, अकर्मक
वेदाः अध्यीयन्तेकर्मवाच्यवेदाः = कर्म प्रथमा में, कर्ता अज्ञात
अत्र स्थीयतेभाववाच्यकर्ता अज्ञात, अकर्मक, एकवचन

विशेष ध्यान देने योग्य बातें

1. कुछ धातुएँ सकर्मक और अकर्मक दोनों हो सकती हैं

  • गम् — सामान्यतः अकर्मक (भाववाच्य): तेन गम्यते
  • लेकिन ‘ग्रामं गच्छति’ में कर्म (ग्राम) है → कर्मवाच्य: तेन ग्रामः गम्यते

2. कर्मवाच्य और भाववाच्य में क्रिया-निर्माण एक ही है

दोनों में धातु + य + आत्मनेपद। अन्तर यह है:

  • कर्मवाच्य: क्रिया कर्म के वचन के अनुसार
  • भाववाच्य: क्रिया सदैव एकवचन

3. कर्ता का लोप

कर्मवाच्य और भाववाच्य में कर्ता का लोप हो सकता है:

  • कथ्यते (कहा जाता है) — कर्ता अज्ञात
  • श्रूयते (सुना जाता है) — कर्ता अज्ञात
  • अत्र गम्यते (यहाँ जाया जाता है) — कर्ता अज्ञात

सारांश सूत्र

कर्तृवाच्य: कर्ता (प्र.) + कर्म (द्वि.) + क्रिया (कर्ता-अनुसार)
कर्मवाच्य: कर्ता (तृ.) + कर्म (प्र.) + धातु+य+ते (कर्म-अनुसार)
भाववाच्य: कर्ता (तृ.) + धातु+य+ते (सदैव एकवचन)

याद रखें

  1. सकर्मक धातु → कर्तृवाच्य या कर्मवाच्य
  2. अकर्मक धातु → कर्तृवाच्य या भाववाच्य
  3. कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के वचन के अनुसार, भाववाच्य में सदैव एकवचन
  4. दोनों passive वाच्यों में कर्ता तृतीया में, क्रिया आत्मनेपद में
  5. संस्कृत में passive का प्रयोग बहुत अधिक होता है — इसे अच्छी तरह समझना आवश्यक है

अभ्यास

प्रश्न 1 / 80 सही

'शिष्यः श्लोकं पठति' (कर्तृवाच्य) का कर्मवाच्य क्या होगा?