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इस मॉड्यूल के पाठ

तव्य, अनीय, य — विध्यर्थ कृदन्त

अनुमानित समय: 15 मिनट

तव्य, अनीय, य — विध्यर्थ कृदन्त (Gerundives)

ये तीनों प्रत्यय विधि (obligation/necessity) का अर्थ देते हैं — “करना चाहिए”, “करने योग्य”, “must/should be done”।

तीनों प्रत्ययों की तुलना

प्रत्ययरूपउदाहरण (कृ धातु)अर्थ
तव्यनियमितकर्तव्यःकरना चाहिए
अनीयनियमितकरणीयःकरने योग्य
अनियमित (धातु बदलती है)कार्यःकरने योग्य

तीनों का अर्थ लगभग समान है। ‘य’ प्रत्यय में धातु का रूप अधिक बदलता है।

1. तव्य प्रत्यय

सबसे नियमित (regular) — धातु + तव्य:

धातुतव्य रूपअर्थ
कृकर्तव्यःकरना चाहिए
गम्गन्तव्यम्जाना चाहिए
पठ्पठितव्यःपढ़ना चाहिए
वच्वक्तव्यम्बोलना चाहिए
दादातव्यम्देना चाहिए
श्रुश्रोतव्यम्सुनना चाहिए

2. अनीय प्रत्यय

धातु + अनीय:

धातुअनीय रूपअर्थ
कृकरणीयःकरने योग्य
दृश्दर्शनीयःदेखने योग्य
श्रुश्रवणीयम्सुनने योग्य
मन्मननीयम्मनन करने योग्य
पूज्पूजनीयःपूजा के योग्य
स्मृस्मरणीयःस्मरण के योग्य

3. य (ण्यत्/यत्) प्रत्यय

धातु + — धातु में आन्तरिक परिवर्तन (वृद्धि आदि) होता है:

धातुय रूपअर्थ
कृकार्यःकरने योग्य
पापेयम्पीने योग्य
दादेयम्देने योग्य
ज्ञाज्ञेयम्जानने योग्य
भूभाव्यम्होने योग्य
गम्गम्यम्जाने योग्य / समझने योग्य
वच्वाच्यम्बोलने योग्य
पठ्पाठ्यम्पढ़ने योग्य

ये विशेषण हैं

तीनों कृदन्त विशेषण की तरह decline होते हैं:

लिंगतव्यअनीय
पुल्लिंगकर्तव्यःकरणीयःकार्यः
स्त्रीलिंगकर्तव्याकरणीयाकार्या
नपुंसकलिंगकर्तव्यम्करणीयम्कार्यम्

वाक्यों में प्रयोग

धर्मः कर्तव्यः। धर्म करना चाहिए।

सत्यं वक्तव्यम्। सत्य बोलना चाहिए।

गीता श्रवणीया / श्रोतव्या। गीता सुनने योग्य है।

सः दर्शनीयः पुरुषः अस्ति। वह देखने योग्य (दर्शनीय) पुरुष है।

जलं पेयम्, विषं न पेयम्। जल पीने योग्य है, विष नहीं।

कार्यं कर्तव्यम् एव। कार्य (कर्तव्य) करना ही चाहिए।

गीता से प्रसिद्ध उदाहरण

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (2.47) कर्म में ही तेरा अधिकार है (कर्तव्य)।

अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते। (6.35) अभ्यास और वैराग्य से (मन) वश में किया जाने योग्य है।

याद रखें

  1. तव्य, अनीय, य — तीनों का अर्थ “करना चाहिए / करने योग्य”
  2. तीनों विशेषण हैं — लिंग-वचन-विभक्ति बदलती है
  3. तव्य सबसे नियमित, में धातु अधिक बदलती है
  4. ये हिन्दी के “-नीय”, “-योग्य”, “-ने चाहिए” के समकक्ष हैं
  5. कर्तव्य, कार्य, करणीय — ये तीनों ‘कृ’ धातु से बने प्रसिद्ध शब्द हैं

अभ्यास

प्रश्न 1 / 60 सही

तव्य, अनीय, य — इन तीनों प्रत्ययों का सामान्य अर्थ क्या है?