मुख्य सामग्री पर जाएँ
इस मॉड्यूल के पाठ

सन्धि समग्र अभ्यास

अनुमानित समय: 20 मिनट

सन्धि समग्र अभ्यास

इस पाठ में हम सभी तीन प्रकार की सन्धियों (स्वर, व्यञ्जन, विसर्ग) का मिश्रित अभ्यास करेंगे।

अभ्यास 1: सन्धि-विच्छेद करें

गीता के प्रथम श्लोक से अभ्यास करें:

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥

सन्धि शब्दविच्छेदसन्धि प्रकार
समवेताः + युयुत्सवःसमवेता युयुत्सवःविसर्ग (आः + य → आ)
पाण्डवाः + च + एवपाण्डवाश्चैवविसर्ग (ः+च→श्) + वृद्धि (अ+ए→ऐ)

अभ्यास 2: गीता के अन्य श्लोकों से

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। (2.47)

सन्धि शब्दविच्छेदसन्धि प्रकार
कर्मणि + एवकर्मण्येवयण् (इ + ए → य् + ए)
एव + अधिकारःएवाधिकारःसवर्ण दीर्घ (अ + अ → आ)
अधिकारः + तेअधिकारस्तेविसर्ग (ः + त → स् + त)

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। (2.48)

सन्धि शब्दविच्छेदसन्धि प्रकार
योगस्थः + कुरुयोगस्थः कुरुविसर्ग यथावत् (ः + क)

अभ्यास 3: सन्धि करें

विच्छेदसन्धिनियम
गुरु + उपदेशःगुरूपदेशःसवर्ण दीर्घ (उ + उ = ऊ)
अति + एवअत्येवयण् (इ + ए = य् + ए)
सत् + चरित्रम्सच्चरित्रम्श्चुत्व (त् + च = च् + च)
हरिः + चरतिहरिश्चरतिविसर्ग (ः + च = श् + च)
वाक् + दानम्वाग्दानम्जश्त्व (क् + द = ग् + द)
प्रति + आगमनम्प्रत्यागमनम्यण् (इ + आ = य् + आ)
सत् + मार्गःसन्मार्गःअनुनासिक (त् + म = न् + म)
रामः + वनंरामो वनम्विसर्ग (अः + व = ओ + व)

सम्पूर्ण सन्धि सन्दर्भ तालिका

स्वर सन्धि

नियमसूत्र (पाणिनि)परिवर्तनउदाहरण
सवर्ण दीर्घअकः सवर्णे दीर्घःअ+अ→आ, इ+इ→ई, उ+उ→ऊहिमालयः
गुणआद्गुणःअ/आ+इ/ई→ए, +उ/ऊ→ओ, +ऋ→अर्देवेन्द्रः
वृद्धिवृद्धिरेचिअ/आ+ए/ऐ→ऐ, +ओ/औ→औएकैकम्
यण्इको यणचिइ/ई→य्, उ/ऊ→व्, ऋ→र्इत्याह
अयादिएचोऽयवायावःए→अय्, ओ→अव्, ऐ→आय्, औ→आव्नयनम्
पूर्वरूपएङः पदान्तात्ए/ओ + अ → ए/ओ (ऽ)सोऽपि

व्यञ्जन सन्धि

नियमपरिवर्तनउदाहरण
जश्त्वप्रथम → तृतीय (घोष से पहले)वागीशः, सदाचारः
श्चुत्वतवर्ग + चवर्ग → चवर्गसच्चित्, उच्छेदः
ष्टुत्वतवर्ग + टवर्ग → टवर्गतट्टीका
अनुनासिकव्यञ्जन + नासिक्य → नासिक्यउन्नतिः, जगन्नाथः
छत्वस्वर + छ → स्वर + च्छआच्छादयति

विसर्ग सन्धि

नियमपरिवर्तनउदाहरण
उत्व/रुत्वअः + घोष → ओरामो गच्छति
अः + अ→ ओऽरामोऽस्ति
ः + श/चवर्ग→ श्रामश्च
ः + ष/टवर्ग→ ष्धनुष्टङ्कारः
ः + स/तवर्ग→ स्नमस्ते
मूल-र् विसर्ग + घोष→ र्पुनरागमनम्
आः + घोष→ आ (लोप)देवा गच्छन्ति
ः + क/ख/प/फ→ ः (यथावत्)मनःपूतम्

याद रखें

  1. सन्धि-विच्छेद पठन का मूल कौशल है — बिना इसके संस्कृत पाठ समझना कठिन
  2. गीता/सुभाषित पढ़ते समय हर शब्द में सन्धि खोजने का अभ्यास करें
  3. तीन प्रकार में से पहले पहचानें — स्वर, व्यञ्जन, या विसर्ग
  4. ऊपर की सन्दर्भ तालिका को बार-बार देखें जब तक नियम स्वतः याद न हो जाएँ
  5. अभ्यास ही सन्धि-ज्ञान का एकमात्र मार्ग है

अभ्यास

प्रश्न 1 / 90 सही

'इत्याह' का सन्धि-विच्छेद क्या है?