कृदन्त परिचय — धातु से शब्द निर्माण
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कृदन्त क्या हैं?
संस्कृत में धातु (verb root) में कृत् प्रत्यय जोड़कर जो शब्द बनते हैं, उन्हें कृदन्त कहते हैं। ये शब्द संज्ञा, विशेषण या अव्यय के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
कृदन्त = कृत् + अन्त = जिसके अन्त में कृत् प्रत्यय हो
उदाहरण:
- गम् (जाना) + क्त → गतः (गया हुआ) — विशेषण
- कृ (करना) + क्त्वा → कृत्वा (करके) — अव्यय
- पठ् (पढ़ना) + तुमुन् → पठितुम् (पढ़ने के लिए) — अव्यय
कृत् प्रत्यय vs तद्धित प्रत्यय
| विषय | कृत् प्रत्यय | तद्धित प्रत्यय |
|---|---|---|
| किसमें लगता है? | धातु (verb root) | संज्ञा/विशेषण |
| उदाहरण | गम् + क्त = गतः | धन + वत् = धनवान् |
| क्या बनता है? | कृदन्त | तद्धितान्त |
कृत् प्रत्ययों का वर्गीकरण
1. वर्तमान कृदन्त (Present Participles)
| प्रत्यय | पद | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| शतृ | परस्मैपद | …ता हुआ (active) | गच्छन् (जाता हुआ) |
| शानच् | आत्मनेपद | …ता हुआ (middle) | सेवमानः (सेवा करता हुआ) |
2. पूर्वकालिक कृदन्त (Absolutives)
| प्रत्यय | स्थिति | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| क्त्वा | उपसर्ग रहित | …कर / …करके | कृत्वा (करके), गत्वा (जाकर) |
| ल्यप् | उपसर्ग सहित | …कर / …करके | आगत्य (आकर), प्रकृत्य (करके) |
3. भूतकालिक कृदन्त (Past Participles)
| प्रत्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| क्त | …किया गया (passive) | गतः (गया हुआ), कृतः (किया गया) |
| क्तवतु | …किया (active) | गतवान् (गया), कृतवान् (किया) |
4. क्रियार्थक / Infinitive
| प्रत्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| तुमुन् | …ने के लिए (to do) | गन्तुम् (जाने के लिए), कर्तुम् (करने के लिए) |
5. विध्यर्थक कृदन्त (Gerundives — Should be done)
| प्रत्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| तव्य | …ना चाहिए | कर्तव्यः (करना चाहिए) |
| अनीय | …ना चाहिए | करणीयः (करने योग्य) |
| य | …ना चाहिए | कार्यः (करने योग्य) |
6. भाववाचक कृदन्त (Abstract Nouns)
| प्रत्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| घञ् | भाव/क्रिया | त्यागः (त्यजन), योगः (युज् से) |
| अप् | भाव/क्रिया | — |
वाक्यों में कृदन्तों का प्रयोग
गच्छन् बालकः पतति। — जाता हुआ बालक गिरता है। (शतृ)
ग्रामं गत्वा सः आगच्छत्। — गाँव जाकर वह आया। (क्त्वा)
गतः छात्रः न आगच्छति। — गया हुआ छात्र नहीं आता। (क्त)
सः पठितुम् इच्छति। — वह पढ़ना चाहता है। (तुमुन्)
धर्मः कर्तव्यः। — धर्म करना चाहिए। (तव्य)
याद रखें
- कृदन्त = धातु + कृत् प्रत्यय — धातु से संज्ञा/विशेषण/अव्यय बनाना
- मुख्य कृत् प्रत्यय: शतृ, शानच्, क्त्वा, ल्यप्, क्त, क्तवतु, तुमुन्, तव्य, अनीय, य, घञ्
- कृदन्त संस्कृत में अत्यन्त सामान्य हैं — लगभग हर वाक्य में कोई न कोई कृदन्त होता है
- आगामी पाठों में प्रत्येक प्रत्यय का विस्तार से अध्ययन करेंगे
अभ्यास
प्रश्न 1 / 60 सही
'कृदन्त' शब्द का अर्थ क्या है?