कर्मधारय समास
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कर्मधारय समास क्या है?
कर्मधारय समास तत्पुरुष का ही एक विशेष उपभेद है। इसमें दोनों पद प्रथमा विभक्ति (समानाधिकरण) में होते हैं और दोनों एक ही वस्तु या व्यक्ति को सूचित करते हैं।
नीलं कमलम् → नीलकमलम् (नीला कमल)
यहाँ ‘नीलम्’ (विशेषण) और ‘कमलम्’ (विशेष्य) दोनों प्रथमा विभक्ति में हैं।
मुख्य नियम
- दोनों पद प्रथमा विभक्ति (समानाधिकरण) में होते हैं
- उत्तरपद प्रधान होता है
- दो उपभेद — विशेषण-विशेष्य और उपमान-उपमेय
1. विशेषण-विशेष्य कर्मधारय
पूर्वपद विशेषण है, उत्तरपद विशेष्य:
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| नीलकमलम् | नीलं कमलम् | नीला कमल |
| महापुरुषः | महान् पुरुषः | महान् पुरुष |
| सत्कर्म | सत् कर्म | अच्छा कर्म |
| प्रियसखा | प्रियः सखा | प्रिय मित्र |
| महाराजः | महान् राजा | महान् राजा |
| कृष्णसर्पः | कृष्णः सर्पः | काला साँप |
| मृदुभाषणम् | मृदु भाषणम् | मृदु (कोमल) भाषण |
विशेष: कभी-कभी विशेष्य पहले और विशेषण बाद में भी आ सकता है:
- पुरुषोत्तमः = पुरुषः उत्तमः (उत्तम पुरुष)
- घनश्यामः = घनः श्यामः (बादल जैसा साँवला)
2. उपमान-उपमेय कर्मधारय
जहाँ तुलना (उपमा) हो — एक पद उपमान (जिससे तुलना) और दूसरा उपमेय (जिसकी तुलना):
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| मुखचन्द्रः | चन्द्रः इव मुखम् | चन्द्र-सा मुख |
| करकमलम् | कमलम् इव करः | कमल-सा हाथ |
| नरसिंहः | सिंहः इव नरः | सिंह-सा नर |
| चरणकमलम् | कमलम् इव चरणम् | कमल-से चरण |
| वचनामृतम् | अमृतम् इव वचनम् | अमृत-सा वचन |
ध्यान दें: विग्रह में ‘इव’ (समान/जैसा) शब्द आता है।
तत्पुरुष और कर्मधारय में अन्तर
| विषय | तत्पुरुष | कर्मधारय |
|---|---|---|
| विग्रह में विभक्ति | द्वितीया-सप्तमी | दोनों पद प्रथमा |
| सम्बन्ध | विभक्ति-सम्बन्ध | विशेषण-विशेष्य / उपमा |
| उदाहरण | राजपुत्रः (राजा का पुत्र) | नीलकमलम् (नीला कमल) |
वाक्यों में प्रयोग
सरोवरे नीलकमलं विकसति। सरोवर में नीला कमल खिलता है।
तस्याः मुखचन्द्रः शोभते। उसका चन्द्र-सा मुख शोभित है।
महापुरुषाः सत्कर्म कुर्वन्ति। महापुरुष अच्छे कर्म करते हैं।
भगवतः करकमलं सुन्दरम् अस्ति। भगवान् का कमल-सा हाथ सुन्दर है।
याद रखें
- कर्मधारय = विशेषण + विशेष्य या उपमान + उपमेय, दोनों प्रथमा में
- विग्रह में विभक्ति समान (प्रथमा), ‘का/की/के/को’ आदि नहीं
- उपमान-उपमेय कर्मधारय में विग्रह में ‘इव’ (जैसा) आता है
- तत्पुरुष से भिन्न — तत्पुरुष में विभक्ति लुप्त होती है, कर्मधारय में दोनों प्रथमा
- उत्तरपद प्रधान — अर्थ उत्तरपद से निश्चित होता है
अभ्यास
कर्मधारय समास में दोनों पदों के बीच कौन-सा सम्बन्ध होता है?