कर्तृवाच्य — कर्ता प्रधान
अनुमानित समय: 15 मिनट
वाच्य क्या है?
वाच्य (voice) बताता है कि वाक्य में कौन प्रधान है — कर्ता, कर्म, या भाव। संस्कृत में तीन वाच्य हैं:
- कर्तृवाच्य (Active Voice) — कर्ता प्रधान
- कर्मवाच्य (Passive Voice) — कर्म प्रधान
- भाववाच्य (Impersonal Passive) — भाव/क्रिया प्रधान
इस पाठ में हम कर्तृवाच्य पढ़ेंगे — यह संस्कृत का सबसे सामान्य वाच्य है।
कर्तृवाच्य — कर्ता प्रधान
कर्तृवाच्य में कर्ता (agent/doer) प्रधान होता है। क्रिया कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार बदलती है।
नियम
| तत्त्व | विभक्ति/नियम |
|---|---|
| कर्ता | प्रथमा विभक्ति |
| कर्म | द्वितीया विभक्ति |
| क्रिया | कर्ता के पुरुष + वचन के अनुसार |
| पद | परस्मैपद या आत्मनेपद (धातु के अनुसार) |
उदाहरण
रामः ग्रन्थं पठति।
| पद | विश्लेषण |
|---|---|
| रामः | कर्ता, प्रथमा एकवचन |
| ग्रन्थम् | कर्म, द्वितीया एकवचन |
| पठति | पठ् धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन (कर्ता ‘रामः’ के अनुसार) |
अनुवाद: राम पुस्तक पढ़ता है।
कर्ता-क्रिया सामञ्जस्य (Subject-Verb Agreement)
कर्तृवाच्य की सबसे महत्त्वपूर्ण बात — क्रिया कर्ता के अनुसार बदलती है:
वचन के अनुसार
| कर्ता | क्रिया | अनुवाद |
|---|---|---|
| बालकः पठति | एकवचन | लड़का पढ़ता है |
| बालकौ पठतः | द्विवचन | दो लड़के पढ़ते हैं |
| बालकाः पठन्ति | बहुवचन | सब लड़के पढ़ते हैं |
पुरुष के अनुसार
| कर्ता | क्रिया | पुरुष |
|---|---|---|
| सः गच्छति | प्रथम पुरुष | वह जाता है |
| त्वं गच्छसि | मध्यम पुरुष | तू जाता है |
| अहं गच्छामि | उत्तम पुरुष | मैं जाता हूँ |
परस्मैपद में कर्तृवाच्य
अधिकांश कर्तृवाच्य वाक्यों में परस्मैपद प्रत्ययों का प्रयोग होता है:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | -ति | -तः | -न्ति |
| मध्यम | -सि | -थः | -थ |
| उत्तम | -मि | -वः | -मः |
अधिक उदाहरण
| कर्तृवाच्य वाक्य | अनुवाद |
|---|---|
| सीता गीतं गायति | सीता गीत गाती है |
| छात्राः पाठं पठन्ति | छात्र पाठ पढ़ते हैं |
| अहं जलं पिबामि | मैं पानी पीता हूँ |
| त्वं फलं खादसि | तू फल खाता है |
| गुरुः शिष्यं पाठयति | गुरु शिष्य को पढ़ाता है |
ध्यान दें — कर्ता का लिङ्ग (स्त्रीलिङ्ग/पुल्लिङ्ग) क्रिया को प्रभावित नहीं करता। ‘रामः पठति’ और ‘सीता पठति’ — दोनों में क्रिया ‘पठति’ ही है।
अकर्मक धातुओं का कर्तृवाच्य
कुछ धातुओं के साथ कोई कर्म नहीं होता (अकर्मक/intransitive):
| वाक्य | अनुवाद |
|---|---|
| बालकः हसति | लड़का हँसता है |
| सः तिष्ठति | वह खड़ा होता है |
| वृक्षाः वर्धन्ते | वृक्ष बढ़ते हैं |
इन वाक्यों में भी कर्ता प्रथमा में है और क्रिया कर्ता के अनुसार है — अतः यह कर्तृवाच्य ही है।
याद रखें
- कर्तृवाच्य = Active Voice — कर्ता प्रधान
- कर्ता प्रथमा विभक्ति में, कर्म द्वितीया में
- क्रिया कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार
- यह संस्कृत का सबसे सामान्य वाच्य है — अधिकतर वाक्य इसी में होते हैं
- अगले पाठ में हम देखेंगे कि इसी वाक्य को कर्मवाच्य में कैसे बदलें
अभ्यास
कर्तृवाच्य में क्रिया किसके अनुसार होती है?