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इस मॉड्यूल के पाठ

आशीर्लिङ् — आशीर्वाद

अनुमानित समय: 15 मिनट

आशीर्लिङ् लकार क्या है?

आशीर्लिङ् (Benedictive mood) संस्कृत का एक विशेष लकार है जो आशीर्वाद, शुभकामना और मङ्गल-कामना के लिए प्रयुक्त होता है।

आशीः (आशीर्वाद) + लिङ् (लकार) = आशीर्लिङ्

विधिलिङ् और आशीर्लिङ् में अन्तर

विधिलिङ्आशीर्लिङ्
अर्थचाहिए, सम्भावनाआशीर्वाद, शुभकामना
उदाहरणभवेत् (हो सकता है/होना चाहिए)भूयात् (हो! — आशीर्वाद)
प्रयोगसामान्य/कथनमन्त्र, आशीर्वाद, शुभकामना

परस्मैपद — आशीर्लिङ्

प्रमुख चिह्न: -यात् (प्र.पु.ए.)

भू धातु — आशीर्लिङ् (परस्मैपद)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमभूयात्भूयास्ताम्भूयासुः
मध्यमभूयाःभूयास्तम्भूयास्त
उत्तमभूयासम्भूयास्वभूयास्म

अन्य धातुओं के रूप (प्रथम पुरुष एकवचन)

धातुआशीर्लिङ् (प्र.पु.ए.)अर्थ
भू (होना)भूयात्हो!
जीव् (जीना)जीव्यात्जीवे!
वृध् (बढ़ना)वृध्यात्बढ़े!
सुख् (सुखी होना)सुख्यात्सुखी हो!

आत्मनेपद — आशीर्लिङ्

प्रमुख चिह्न: -ईष्ट (प्र.पु.ए.)

कृ धातु — आशीर्लिङ् (आत्मनेपद)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकृषीष्टकृषीयास्ताम्कृषीरन्
मध्यमकृषीष्ठाःकृषीयास्थाम्कृषीध्वम्
उत्तमकृषीयकृषीवहिकृषीमहि

प्रसिद्ध आशीर्वाद — साहित्य से

संस्कृत साहित्य और मन्त्रों में आशीर्लिङ् के उदाहरण:

आशीर्वादअर्थ
चिरं जीव्यात्दीर्घायु हो!
शुभं भूयात्शुभ हो!
कल्याणं भूयात्कल्याण हो!
विजयी भूयात्विजयी हो!
सर्वे भूयासुः सुखिनःसब सुखी हों!

ये आशीर्वाद-वाक्य आज भी दैनिक संस्कृत प्रयोग में मिलते हैं।

आशीर्लिङ् कब प्रयुक्त होता है?

  1. आशीर्वाद देते समय — चिरं जीव्यात् (दीर्घायु हो!)
  2. मन्त्रों/प्रार्थनाओं में — सर्वे भूयासुः सुखिनः (सब सुखी हों)
  3. शुभकामना में — शुभं भूयात् (शुभ हो!)

व्यावहारिक संस्कृत में आशीर्लिङ् दुर्लभ है। अधिकतर लोट् लकार (भवतु) या विधिलिङ् (भवेत्) से काम चलता है। लेकिन मन्त्रों और शास्त्रीय शैली में आशीर्लिङ् मिलता है।

याद रखें

  1. आशीर्लिङ् = Benedictive = आशीर्वाद/शुभकामना
  2. परस्मैपद चिह्न: -यात् (प्र.पु.ए.)
  3. आत्मनेपद चिह्न: -ईष्ट (प्र.पु.ए.)
  4. प्रसिद्ध उदाहरण: भूयात् (हो!), जीव्यात् (जीवे!)
  5. मन्त्रों, आशीर्वादों और शास्त्रीय शैली में प्रयुक्त — दैनिक गद्य में दुर्लभ

अभ्यास

प्रश्न 1 / 60 सही

आशीर्लिङ् लकार का प्रयोग किसके लिए होता है?