णिजन्त — Causative
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णिजन्त धातु — प्रेरणार्थक (Causative)
णिच् प्रत्यय धातु में करवाना (causation) का अर्थ जोड़ता है। णिच् प्रत्यय से बनी धातु को णिजन्त कहते हैं। यह संस्कृत का सबसे उत्पादक (productive) व्युत्पन्न प्रत्यय है।
पठ् (पढ़ना) → पाठयति (पढ़ाता है) गम् (जाना) → गमयति (भेजता है) कृ (करना) → कारयति (करवाता है)
णिजन्त कैसे बनता है?
सूत्र: धातु (वृद्धि) + अय (णिच्) + लकार प्रत्यय
| चरण | प्रक्रिया | पठ् का उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | मूल धातु | पठ् |
| 2 | स्वर की वृद्धि | पाठ (अ→आ) |
| 3 | णिच् प्रत्यय (अय) | पाठ + अय |
| 4 | लट् प्रत्यय | पाठय + ति |
| परिणाम | पाठयति |
स्वर-वृद्धि के नियम
| मूल स्वर | वृद्धि | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ | आ | पठ् → पाठयति |
| इ/ई | ऐ | नी → नाययति |
| उ/ऊ | औ | भू → भावयति |
| ऋ | आर् | कृ → कारयति |
कुछ धातुओं में अपवाद हैं: गम् → गमयति (वृद्धि नहीं), श्रु → श्रावयति।
प्रमुख णिजन्त रूप
| मूल धातु | अर्थ | णिजन्त (प्र.पु.ए.) | अर्थ |
|---|---|---|---|
| पठ् | पढ़ना | पाठयति | पढ़ाता है |
| गम् | जाना | गमयति | भेजता है |
| कृ | करना | कारयति | करवाता है |
| भू | होना | भावयति | भावित करता है/उत्पन्न करता है |
| श्रु | सुनना | श्रावयति | सुनाता है |
| ज्ञा | जानना | ज्ञापयति | बताता है |
| पा | पीना | पाययति | पिलाता है |
| खाद् | खाना | खादयति | खिलाता है |
| हस् | हँसना | हासयति | हँसाता है |
| दृश् | देखना | दर्शयति | दिखाता है |
णिजन्त वाक्य-संरचना
णिजन्त वाक्य में दो कर्ता होते हैं:
| भूमिका | विभक्ति | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रेरक कर्ता (causer) | प्रथमा | गुरुः |
| प्रेरित कर्ता (causee) | द्वितीया | शिष्यम् |
| कर्म | द्वितीया | ग्रन्थम् |
गुरुः शिष्यं ग्रन्थं पाठयति। (गुरु शिष्य से ग्रन्थ पढ़वाता है।)
कर्तृवाच्य → णिजन्त तुलना
| कर्तृवाच्य | णिजन्त |
|---|---|
| शिष्यः ग्रन्थं पठति | गुरुः शिष्यं ग्रन्थं पाठयति |
| बालकः गच्छति | माता बालकं गमयति |
| सः हसति | कथा तं हासयति |
णिजन्त का सम्पूर्ण रूप — पाठय (लट् लकार)
णिजन्त भ्वादि गण की तरह चलता है:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पाठयति | पाठयतः | पाठयन्ति |
| मध्यम | पाठयसि | पाठयथः | पाठयथ |
| उत्तम | पाठयामि | पाठयावः | पाठयामः |
द्विणिच् — दोहरा प्रेरणार्थक (Double Causative)
णिजन्त पर पुनः णिच् लगाकर द्विणिच् बनता है:
पठ् → पाठयति (पढ़ाता है) → पाठयति (पढ़वाता है — किसी और से पढ़ाने को कहता है)
कृ → कारयति (करवाता है) → कारयति (करवाने को कहता है)
व्यवहार में द्विणिच् का रूप प्रायः एकल णिच् जैसा ही दिखता है — अर्थ से अन्तर स्पष्ट होता है।
हिन्दी में णिजन्त शब्द
हिन्दी के बहुत से शब्द णिजन्त से आए हैं:
| संस्कृत णिजन्त | हिन्दी | अर्थ |
|---|---|---|
| पाठयति | पढ़ाना | पढ़ने को प्रेरित करना |
| दर्शयति | दिखाना | देखने को प्रेरित करना |
| श्रावयति | सुनाना | सुनने को प्रेरित करना |
| ज्ञापयति | जनाना/बताना | जानने को प्रेरित करना |
| भावयति | भावित करना | भाव उत्पन्न करना |
याद रखें
- णिच् प्रत्यय = करवाना/प्रेरणा (causative) — सबसे उत्पादक प्रत्यय
- बनावट: धातु (वृद्धि) + अय + लट् प्रत्यय
- स्वर-वृद्धि: अ→आ, इ→ऐ, उ→औ, ऋ→आर्
- प्रसिद्ध: पाठयति (पढ़ाता), कारयति (करवाता), गमयति (भेजता), दर्शयति (दिखाता)
- णिजन्त में दो कर्ता — प्रेरक (प्रथमा) और प्रेरित (द्वितीया)
अभ्यास
णिजन्त (causative) धातु का अर्थ क्या होता है?