स्वर सन्धि विशेष — अपवाद
अनुमानित समय: 18 मिनट
स्वर सन्धि के विशेष नियम
आधारभूत पाठ में हमने सवर्ण दीर्घ, गुण और वृद्धि सन्धि पढ़ी। अब कुछ और महत्त्वपूर्ण स्वर सन्धि के नियम पढ़ेंगे।
1. यण् सन्धि
जब इ/ई, उ/ऊ, ऋ/ॠ के बाद कोई असमान स्वर (भिन्न स्वर) आता है, तो:
| पूर्व स्वर | आदेश | सूत्र |
|---|---|---|
| इ / ई | य् | इको यणचि |
| उ / ऊ | व् | इको यणचि |
| ऋ / ॠ | र् | इको यणचि |
उदाहरण
| सन्धि से पहले | सन्धि | नियम |
|---|---|---|
| इति + आह | इत्याह | इ + आ → य् + आ |
| अति + अन्तम् | अत्यन्तम् | इ + अ → य् + अ |
| प्रति + एकम् | प्रत्येकम् | इ + ए → य् + ए |
| मधु + अरिः | मध्वरिः | उ + अ → व् + अ |
| अनु + एषणम् | अन्वेषणम् | उ + ए → व् + ए |
| गुरु + आदेशः | गुर्वादेशः | उ + आ → व् + आ |
| पितृ + आदेशः | पित्रादेशः | ऋ + आ → र् + आ |
| मातृ + अर्थम् | मात्रर्थम् | ऋ + अ → र् + अ |
2. अयादि सन्धि
जब ए, ऐ, ओ, औ (संयुक्त/वृद्धि स्वर) के बाद कोई स्वर आता है:
| पूर्व स्वर | आदेश | सूत्र |
|---|---|---|
| ए | अय् | एचोऽयवायावः |
| ऐ | आय् | एचोऽयवायावः |
| ओ | अव् | एचोऽयवायावः |
| औ | आव् | एचोऽयवायावः |
उदाहरण
| सन्धि से पहले | सन्धि | नियम |
|---|---|---|
| ने + अनम् | नयनम् | ए → अय् |
| नै + अकः | नायकः | ऐ → आय् |
| भो + अनम् | भवनम् | ओ → अव् |
| पौ + अकः | पावकः | औ → आव् |
| शे + अनम् | शयनम् | ए → अय् |
| गै + अकः | गायकः | ऐ → आय् |
| श्रो + अणम् | श्रवणम् | ओ → अव् |
ध्यान दें: अयादि सन्धि प्रायः धातुओं और प्रत्ययों के बीच होती है, शब्दों के बीच में कम।
3. पूर्वरूप सन्धि
पदान्त ए/ओ के बाद अ आने पर, ‘अ’ लुप्त हो जाता है और पूर्व स्वर (ए/ओ) बना रहता है:
सो + अपि → सोऽपि (वह भी) तेन + अपि →
तेनापि(यह सवर्ण दीर्घ नहीं — ‘ए’ + ‘अ’)
वस्तुतः पूर्वरूप सन्धि पदान्त ए/ओ + अ पर लागू होती है। लेखन में अवग्रह (ऽ) लगाया जाता है:
- सः + अपि → सोऽपि
- एषः + अपि → एषोऽपि
4. पररूप सन्धि
उपसर्ग के अन्त में अ/आ हो और धातु ए/ओ से शुरू हो, तो पररूप (बाद वाला) बचता है:
प्र + एजते → प्रेजते (न कि प्रैजते) उप + ओषति → उपोषति
5. प्रकृतिभाव (सन्धि का अभाव)
कुछ स्थितियों में सन्धि नहीं होती:
| स्थिति | उदाहरण |
|---|---|
| द्विवचन ई/ऊ के बाद | कवी इमौ (कव्यिमौ नहीं) |
| अमी सर्वनाम में | अमी इह |
| सम्बोधन के बाद | हे अर्जुन (हार्जुन नहीं) |
सारांश तालिका
| सन्धि | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| यण् | इ/ई→य्, उ/ऊ→व्, ऋ→र् (+ असमान स्वर) | इत्याह, मध्वरिः, पित्रादेशः |
| अयादि | ए→अय्, ऐ→आय्, ओ→अव्, औ→आव् (+ स्वर) | नयनम्, नायकः, भवनम्, पावकः |
| पूर्वरूप | पदान्त ए/ओ + अ → ए/ओ (ऽ) | सोऽपि, एषोऽपि |
| प्रकृतिभाव | सन्धि नहीं होती | कवी इमौ |
याद रखें
- यण् सन्धि: इ→य्, उ→व्, ऋ→र् + असमान स्वर
- अयादि: ए→अय्, ऐ→आय्, ओ→अव्, औ→आव् + स्वर
- पूर्वरूप: ए/ओ + अ → ए/ओ + ऽ (अवग्रह)
- प्रकृतिभाव: द्विवचन -ई/-ऊ, सम्बोधन आदि में सन्धि नहीं
- यण् सन्धि सर्वाधिक प्रयुक्त है — इसे अवश्य याद रखें
अभ्यास
यण् सन्धि कब होती है?