क्त और क्तवतु — भूत कृदन्त
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क्त और क्तवतु — भूतकालिक कृदन्त
ये दोनों भूतकाल (past) के कृदन्त हैं — किन्तु एक कर्मवाच्य (passive) है, दूसरा कर्तृवाच्य (active)।
1. क्त प्रत्यय — भूतकालिक कर्मवाच्य (Past Passive Participle)
अर्थ: “किया गया”, “हुआ”
सामान्य रूप
| धातु | क्त रूप | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | नपुंसकलिंग |
|---|---|---|---|---|
| कृ (करना) | कृत | कृतः | कृता | कृतम् |
| गम् (जाना) | गत | गतः | गता | गतम् |
| पठ् (पढ़ना) | पठित | पठितः | पठिता | पठितम् |
| लिख् (लिखना) | लिखित | लिखितः | लिखिता | लिखितम् |
| दृश् (देखना) | दृष्ट | दृष्टः | दृष्टा | दृष्टम् |
| श्रु (सुनना) | श्रुत | श्रुतः | श्रुता | श्रुतम् |
| भू (होना) | भूत | भूतः | भूता | भूतम् |
| त्यज् (छोड़ना) | त्यक्त | त्यक्तः | त्यक्ता | त्यक्तम् |
| वच् (बोलना) | उक्त | उक्तः | उक्ता | उक्तम् |
| ज्ञा (जानना) | ज्ञात | ज्ञातः | ज्ञाता | ज्ञातम् |
क्त कृदन्त विशेषण की तरह decline होता है — अ-कारान्त (राम/फल) की भाँति।
कर्मवाच्य में प्रयोग
| वाक्य | अर्थ |
|---|---|
| रामेण ग्रन्थः लिखितः | राम द्वारा ग्रन्थ लिखा गया |
| गुरुणा पाठः पठितः | गुरु द्वारा पाठ पढ़ाया गया |
| मया कार्यं कृतम् | मेरे द्वारा कार्य किया गया |
कर्मवाच्य में: कर्ता → तृतीया विभक्ति, कर्म → प्रथमा विभक्ति, क्त कृदन्त कर्म के लिंग-वचन अनुसार।
अकर्मक धातुओं में
अकर्मक (intransitive) धातुओं का क्त कृदन्त कर्तृवाच्य (active) अर्थ में भी प्रयुक्त होता है:
| वाक्य | अर्थ |
|---|---|
| रामः गतः | राम गया (न कि ‘राम गया गया’) |
| सः प्रसन्नः | वह प्रसन्न हुआ |
| बालकः पतितः | बालक गिरा |
2. क्तवतु प्रत्यय — भूतकालिक कर्तृवाच्य (Past Active Participle)
अर्थ: “उसने किया”, “उसने … किया” — कर्ता पर बल
रूप
| धातु | क्तवतु रूप | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | नपुंसकलिंग |
|---|---|---|---|---|
| कृ | कृतवत् | कृतवान् | कृतवती | कृतवत् |
| गम् | गतवत् | गतवान् | गतवती | गतवत् |
| पठ् | पठितवत् | पठितवान् | पठितवती | पठितवत् |
| दृश् | दृष्टवत् | दृष्टवान् | दृष्टवती | दृष्टवत् |
| खाद् | खादितवत् | खादितवान् | खादितवती | खादितवत् |
क्तवतु = क्त + वतु। ‘-वत्’ प्रातिपदिक — ‘भगवत्/धनवत्’ की तरह decline होता है।
कर्तृवाच्य में प्रयोग
| वाक्य | अर्थ |
|---|---|
| रामः ग्रन्थं लिखितवान् | राम ने ग्रन्थ लिखा |
| सीता भोजनं कृतवती | सीता ने भोजन किया |
| छात्राः पाठं पठितवन्तः | छात्रों ने पाठ पढ़ा |
कर्तृवाच्य में: कर्ता → प्रथमा, कर्म → द्वितीया, क्तवतु कर्ता के लिंग-वचन अनुसार।
क्त vs क्तवतु — तुलना
| विषय | क्त | क्तवतु |
|---|---|---|
| वाच्य | कर्मवाच्य (passive) | कर्तृवाच्य (active) |
| कर्ता | तृतीया विभक्ति | प्रथमा विभक्ति |
| उदाहरण | रामेण कृतम् (राम द्वारा किया गया) | रामः कृतवान् (राम ने किया) |
| बल | कर्म पर | कर्ता पर |
वाक्यों में उपयोग
गुरुणा उक्तं वचनं छात्रेण श्रुतम्। गुरु द्वारा कहा गया वचन छात्र द्वारा सुना गया। (दोनों क्त)
अर्जुनः गीतां श्रुतवान्, ज्ञानं प्राप्तवान्, युद्धं कृतवान्। अर्जुन ने गीता सुनी, ज्ञान प्राप्त किया, युद्ध किया। (तीनों क्तवतु)
याद रखें
- क्त = कर्मवाच्य — “किया गया” (कृतः, गतः, दृष्टः)
- क्तवतु = कर्तृवाच्य — “उसने किया” (कृतवान्, गतवान्)
- दोनों विशेषण हैं — लिंग-वचन-विभक्ति बदलती है
- अकर्मक धातुओं में क्त भी कर्तृवाच्य होता है (रामः गतः)
- ये संस्कृत में अत्यन्त सामान्य हैं — लगभग हर वाक्य में मिलते हैं
अभ्यास
क्त प्रत्यय किस अर्थ में प्रयुक्त होता है?