लिट् लकार — Perfect
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लिट् लकार — परोक्ष भूतकाल (Perfect)
लिट् लकार संस्कृत का परोक्ष भूतकाल (Perfect Tense) है। इसका प्रयोग दूर के अतीत की घटनाओं के लिए होता है — विशेषकर जो वक्ता ने स्वयं नहीं देखी।
पाणिनि: “परोक्षे लिट्” — जो प्रत्यक्ष न हो, उसके लिए लिट्।
तीन भूतकाल लकारों की तुलना
| लकार | प्रकार | उदाहरण (भू) | प्रयोग |
|---|---|---|---|
| लङ् | अनद्यतन भूत | अभवत् | कल या उससे पहले |
| लुङ् | सामान्य भूत | अभूत् | अनिश्चित भूत |
| लिट् | परोक्ष भूत | बभूव | दूर का अतीत, अदृष्ट |
द्वित्व (Reduplication) — लिट् का मुख्य चिह्न
लिट् लकार की सबसे प्रमुख विशेषता — धातु का द्वित्व (reduplication):
द्वित्व के नियम
- धातु के प्रथम व्यञ्जन + हृस्व स्वर को दोहराया जाता है
- महाप्राण → अल्पप्राण (भ → ब, ध → द, घ → ग)
- कवर्ग (क, ख, ग, घ) का द्वित्व → कवर्ग ही
| धातु | द्वित्व | लिट् (प्र.पु.ए.) |
|---|---|---|
| भू | ब (भ→ब) | बभूव |
| कृ | च (क→च) | चकार |
| गम् | ज (ग→ज) | जगाम |
| पठ् | प | पपाठ |
| दृश् | द | ददर्श |
| श्रु | शु | शुश्राव |
भू धातु — लिट् लकार (सम्पूर्ण)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | बभूव | बभूवतुः | बभूवुः |
| मध्यम | बभूविथ | बभूवथुः | बभूव |
| उत्तम | बभूव | बभूविव | बभूविम |
ध्यान दें — प्रथम पुरुष एकवचन और उत्तम पुरुष एकवचन दोनों बभूव हैं!
प्रसिद्ध लिट् लकार रूप
ये रूप संस्कृत साहित्य में बार-बार मिलते हैं:
| धातु | लिट् (प्र.पु.ए.) | अर्थ |
|---|---|---|
| भू | बभूव | हुआ (था) |
| कृ | चकार | किया (था) |
| गम् | जगाम | गया (था) |
| वच् | उवाच | बोला (था) |
| दृश् | ददर्श | देखा (था) |
| श्रु | शुश्राव | सुना (था) |
| पठ् | पपाठ | पढ़ा (था) |
| स्था | तस्थौ | ठहरा (था) |
उवाच (बोला) सबसे प्रसिद्ध लिट् रूप है — गीता में हर अध्याय में: “श्रीभगवानुवाच” (श्रीभगवान् + उवाच = श्रीभगवान बोले)।
परिभाषित लिट् (Periphrastic Perfect)
णिजन्त (causative), सन्नन्त (desiderative) आदि व्युत्पन्न धातुओं के लिए परिभाषित लिट् प्रयुक्त होता है:
धातु + आम् + कृ/भू/अस् (लिट्)
| मूल | परिभाषित लिट् | अर्थ |
|---|---|---|
| पाठयति (causative of पठ्) | पाठयाम् + चकार = पाठयाञ्चकार | पढ़ाया था |
| गमयति (causative of गम्) | गमयाम् + बभूव = गमयाम्बभूव | भेजा था |
साहित्यिक प्रयोग
लिट् लकार कथा-वर्णन की मुख्य विधा है:
पुरा कश्चित् राजा बभूव। सः एकदा वनं जगाम। तत्र एकं मुनिं ददर्श।
पुराने समय में एक राजा था। वह एक बार वन गया। वहाँ एक मुनि को देखा।
याद रखें
- लिट् = Perfect = परोक्ष (दूर, अदृष्ट) भूतकाल
- मुख्य चिह्न = द्वित्व (reduplication) — बभूव, चकार, जगाम
- महाप्राण → अल्पप्राण (भ→ब, घ→ग), कवर्ग → चवर्ग (क→च, ग→ज)
- उवाच (बोला) — गीता का सबसे प्रसिद्ध लिट् रूप
- व्युत्पन्न धातुओं के लिए → परिभाषित लिट् (धातु + आम् + चकार/बभूव)
अभ्यास
लिट् लकार किस प्रकार के भूतकाल को दर्शाता है?