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इस मॉड्यूल के पाठ

लिट् लकार — Perfect

अनुमानित समय: 18 मिनट

लिट् लकार — परोक्ष भूतकाल (Perfect)

लिट् लकार संस्कृत का परोक्ष भूतकाल (Perfect Tense) है। इसका प्रयोग दूर के अतीत की घटनाओं के लिए होता है — विशेषकर जो वक्ता ने स्वयं नहीं देखी

पाणिनि: “परोक्षे लिट्” — जो प्रत्यक्ष न हो, उसके लिए लिट्।

तीन भूतकाल लकारों की तुलना

लकारप्रकारउदाहरण (भू)प्रयोग
लङ्अनद्यतन भूतअभवत्कल या उससे पहले
लुङ्सामान्य भूतअभूत्अनिश्चित भूत
लिट्परोक्ष भूतबभूवदूर का अतीत, अदृष्ट

द्वित्व (Reduplication) — लिट् का मुख्य चिह्न

लिट् लकार की सबसे प्रमुख विशेषता — धातु का द्वित्व (reduplication):

द्वित्व के नियम

  1. धातु के प्रथम व्यञ्जन + हृस्व स्वर को दोहराया जाता है
  2. महाप्राण → अल्पप्राण (भ → ब, ध → द, घ → ग)
  3. कवर्ग (क, ख, ग, घ) का द्वित्व → कवर्ग ही
धातुद्वित्वलिट् (प्र.पु.ए.)
भूब (भ→ब)भूव
कृच (क→च)कार
गम्ज (ग→ज)गाम
पठ्पाठ
दृश्दर्श
श्रुशुशुश्राव

भू धातु — लिट् लकार (सम्पूर्ण)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमबभूवबभूवतुःबभूवुः
मध्यमबभूविथबभूवथुःबभूव
उत्तमबभूवबभूविवबभूविम

ध्यान दें — प्रथम पुरुष एकवचन और उत्तम पुरुष एकवचन दोनों बभूव हैं!

प्रसिद्ध लिट् लकार रूप

ये रूप संस्कृत साहित्य में बार-बार मिलते हैं:

धातुलिट् (प्र.पु.ए.)अर्थ
भूबभूवहुआ (था)
कृचकारकिया (था)
गम्जगामगया (था)
वच्उवाचबोला (था)
दृश्ददर्शदेखा (था)
श्रुशुश्रावसुना (था)
पठ्पपाठपढ़ा (था)
स्थातस्थौठहरा (था)

उवाच (बोला) सबसे प्रसिद्ध लिट् रूप है — गीता में हर अध्याय में: “श्रीभगवानुवाच” (श्रीभगवान् + उवाच = श्रीभगवान बोले)।

परिभाषित लिट् (Periphrastic Perfect)

णिजन्त (causative), सन्नन्त (desiderative) आदि व्युत्पन्न धातुओं के लिए परिभाषित लिट् प्रयुक्त होता है:

धातु + आम् + कृ/भू/अस् (लिट्)

मूलपरिभाषित लिट्अर्थ
पाठयति (causative of पठ्)पाठयाम् + चकार = पाठयाञ्चकारपढ़ाया था
गमयति (causative of गम्)गमयाम् + बभूव = गमयाम्बभूवभेजा था

साहित्यिक प्रयोग

लिट् लकार कथा-वर्णन की मुख्य विधा है:

पुरा कश्चित् राजा बभूव। सः एकदा वनं जगाम। तत्र एकं मुनिं ददर्श।

पुराने समय में एक राजा था। वह एक बार वन गया। वहाँ एक मुनि को देखा।

याद रखें

  1. लिट् = Perfect = परोक्ष (दूर, अदृष्ट) भूतकाल
  2. मुख्य चिह्न = द्वित्व (reduplication) — बभूव, चकार, जगाम
  3. महाप्राण → अल्पप्राण (भ→ब, घ→ग), कवर्ग → चवर्ग (क→च, ग→ज)
  4. उवाच (बोला) — गीता का सबसे प्रसिद्ध लिट् रूप
  5. व्युत्पन्न धातुओं के लिए → परिभाषित लिट् (धातु + आम् + चकार/बभूव)

अभ्यास

प्रश्न 1 / 60 सही

लिट् लकार किस प्रकार के भूतकाल को दर्शाता है?