द्वन्द्व समास
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द्वन्द्व समास क्या है?
द्वन्द्व समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं। ये ‘और’ (च) से जुड़े होते हैं।
रामः च लक्ष्मणः च → रामलक्ष्मणौ (राम और लक्ष्मण → रामलक्ष्मण)
द्वन्द्व के दो प्रमुख प्रकार
1. इतरेतर द्वन्द्व
प्रत्येक पद की अलग-अलग सत्ता बनी रहती है। समस्त पद का वचन पदों की संख्या के अनुसार होता है:
| पदों की संख्या | वचन | उदाहरण |
|---|---|---|
| 2 पद | द्विवचन | रामलक्ष्मणौ |
| 3+ पद | बहुवचन | धर्मार्थकामाः |
उदाहरण:
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| रामलक्ष्मणौ | रामः च लक्ष्मणः च | राम और लक्ष्मण |
| सीतारामौ | सीता च रामः च | सीता और राम |
| मातापितरौ | माता च पिता च | माता और पिता |
| गुरुशिष्यौ | गुरुः च शिष्यः च | गुरु और शिष्य |
| हरिहरौ | हरिः च हरः च | विष्णु और शिव |
| धर्मार्थकामाः | धर्मः च अर्थः च कामः च | धर्म, अर्थ और काम |
लिंग-निर्णय: समस्त पद का लिंग अन्तिम पद के लिंग के अनुसार होता है:
- रामलक्ष्मणौ → पुल्लिंग (लक्ष्मण पुल्लिंग)
- सीतारामौ → पुल्लिंग (राम पुल्लिंग)
2. समाहार द्वन्द्व
सब पद मिलकर एक समूह (collection) का बोध कराते हैं। समस्त पद सदा नपुंसकलिंग एकवचन में होता है:
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| पाणिपादम् | पाणी च पादौ च (इत्येतेषां समाहारः) | हाथ और पैर (अंगों का समूह) |
| अहोरात्रम् | अहः च रात्रिः च | दिन और रात (समय का समूह) |
| शीतोष्णम् | शीतं च उष्णं च | ठण्डा और गरम |
पदों का क्रम
द्वन्द्व में पदों के क्रम के कुछ नियम हैं:
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| लघु (छोटा) पद पहले | रामलक्ष्मणौ (न कि लक्ष्मणरामौ) |
| पुल्लिंग पद प्रायः बाद में | सीतारामौ |
| आदरणीय पद पहले | मातापितरौ, गुरुशिष्यौ |
वाक्यों में प्रयोग
रामलक्ष्मणौ वनं गच्छतः। राम और लक्ष्मण वन जाते हैं। (द्विवचन — गच्छतः)
मातापितरौ बालकं पालयतः। माता और पिता बालक का पालन करते हैं।
धर्मार्थकामाः पुरुषार्थाः सन्ति। धर्म, अर्थ और काम — ये पुरुषार्थ हैं। (बहुवचन)
अहोरात्रं सः पठति। वह दिन-रात पढ़ता है। (नपुंसकलिंग एकवचन — समाहार)
तुलना: इतरेतर vs समाहार
| विषय | इतरेतर | समाहार |
|---|---|---|
| सत्ता | अलग-अलग | सामूहिक |
| वचन | पदसंख्या अनुसार | सदा एकवचन |
| लिंग | अन्तिम पद के अनुसार | सदा नपुंसकलिंग |
| उदाहरण | रामलक्ष्मणौ | पाणिपादम् |
याद रखें
- द्वन्द्व = दोनों पद प्रधान, ‘और’ (च) से जुड़े
- इतरेतर = अलग सत्ता → वचन पदसंख्या अनुसार (द्वि-/बहु-)
- समाहार = सामूहिक → सदा नपुंसकलिंग एकवचन
- विग्रह में ‘च…च’ (और…और) आता है
- पदों का क्रम — लघु पहले, आदरणीय पहले
अभ्यास
द्वन्द्व समास में दोनों पदों का सम्बन्ध कैसा होता है?