तत्पुरुष समास
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तत्पुरुष समास क्या है?
तत्पुरुष समास में उत्तरपद प्रधान होता है। पूर्वपद, उत्तरपद के साथ किसी विभक्ति-सम्बन्ध से जुड़ा होता है, परन्तु समास बनने पर विभक्ति लुप्त हो जाती है।
राज्ञः पुत्रः → राजपुत्रः (राजा का पुत्र → राजपुत्र)
यहाँ ‘राज्ञः’ (षष्ठी विभक्ति) से ‘राज’ बचा और विभक्ति लुप्त हो गई।
विभक्ति के आधार पर प्रकार
तत्पुरुष समास को विग्रह में आने वाली विभक्ति के आधार पर पहचाना जाता है:
1. द्वितीया तत्पुरुष (कर्म — को)
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| ग्रामगतः | ग्रामं गतः | ग्राम को गया हुआ |
| सुखप्राप्तः | सुखं प्राप्तः | सुख को प्राप्त |
| स्वर्गगतः | स्वर्गं गतः | स्वर्ग को गया हुआ |
2. तृतीया तत्पुरुष (करण — से/द्वारा)
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| शास्त्रकुशलः | शास्त्रेण कुशलः | शास्त्र से (में) कुशल |
| अकालमृत्युः | अकालेन मृत्युः | अकाल (असमय) से मृत्यु |
| धनहीनः | धनेन हीनः | धन से हीन |
ध्यान दें: ‘शूलपाणिः’ (शूल हाथ में है जिसके) बहुव्रीहि है, तत्पुरुष नहीं, क्योंकि इसका अर्थ शिव की ओर संकेत करता है।
3. चतुर्थी तत्पुरुष (सम्प्रदान — के लिए)
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| गुरुदक्षिणा | गुरवे दक्षिणा | गुरु के लिए दक्षिणा |
| देवबलिः | देवेभ्यः बलिः | देवों के लिए बलि |
| विद्यालयः | विद्यायै आलयः | विद्या के लिए आलय |
4. पञ्चमी तत्पुरुष (अपादान — से)
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| ऋणमुक्तः | ऋणात् मुक्तः | ऋण से मुक्त |
| पापभीतः | पापात् भीतः | पाप से भयभीत |
| धर्मच्युतः | धर्मात् च्युतः | धर्म से भ्रष्ट |
5. षष्ठी तत्पुरुष (सम्बन्ध — का/की/के)
यह सबसे सामान्य प्रकार है:
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| राजपुत्रः | राज्ञः पुत्रः | राजा का पुत्र |
| देवालयः | देवस्य आलयः | देव का आलय (मन्दिर) |
| गजराजः | गजानां राजा | गजों का राजा |
| सेनापतिः | सेनायाः पतिः | सेना का पति |
6. सप्तमी तत्पुरुष (अधिकरण — में)
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| वनवासः | वने वासः | वन में वास |
| आत्मविश्वासः | आत्मनि विश्वासः | आत्म में विश्वास |
| कलाकुशलः | कलायाम् कुशलः | कला में कुशल |
नञ् तत्पुरुष
जब पूर्वपद में ‘न’ (नञ्) = निषेधार्थक शब्द हो:
| समस्त पद | विग्रह | अर्थ |
|---|---|---|
| अधर्मः | न धर्मः | धर्म नहीं |
| अन्यायः | न न्यायः | न्याय नहीं |
| अविद्या | न विद्या | विद्या नहीं (अज्ञान) |
| असत्यम् | न सत्यम् | सत्य नहीं (झूठ) |
नियम: स्वर से शुरू होने वाले शब्दों से पहले अन् लगता है (अन् + अर्थ = अनर्थः), व्यञ्जन से पहले अ (अ + धर्म = अधर्मः)।
पहचान कैसे करें?
- उत्तरपद प्रधान है? → हाँ, तो तत्पुरुष हो सकता है
- विग्रह में कौन-सी विभक्ति आती है? → उसी विभक्ति का तत्पुरुष
- पूर्वपद में ‘अ/अन्’ (नकार) है? → नञ् तत्पुरुष
याद रखें
- तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान, पूर्वपद गौण (विशेषक)
- विग्रह में लुप्त विभक्ति से प्रकार की पहचान — द्वितीया से सप्तमी तक
- षष्ठी तत्पुरुष सबसे सामान्य है (राजपुत्रः, देवालयः)
- नञ् तत्पुरुष में ‘अ/अन्’ से निषेध अर्थ (अधर्म, अन्याय)
- बहुव्रीहि से सावधान — यदि अर्थ बाहरी व्यक्ति/वस्तु को सूचित करे तो तत्पुरुष नहीं है
अभ्यास
प्रश्न 1 / 70 सही
तत्पुरुष समास में कौन-सा पद प्रधान होता है?