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इस मॉड्यूल के पाठ

तत्पुरुष समास

अनुमानित समय: 20 मिनट

तत्पुरुष समास क्या है?

तत्पुरुष समास में उत्तरपद प्रधान होता है। पूर्वपद, उत्तरपद के साथ किसी विभक्ति-सम्बन्ध से जुड़ा होता है, परन्तु समास बनने पर विभक्ति लुप्त हो जाती है।

राज्ञः पुत्रःराजपुत्रः (राजा का पुत्र → राजपुत्र)

यहाँ ‘राज्ञः’ (षष्ठी विभक्ति) से ‘राज’ बचा और विभक्ति लुप्त हो गई।

विभक्ति के आधार पर प्रकार

तत्पुरुष समास को विग्रह में आने वाली विभक्ति के आधार पर पहचाना जाता है:

1. द्वितीया तत्पुरुष (कर्म — को)

समस्त पदविग्रहअर्थ
ग्रामगतःग्रामं गतःग्राम को गया हुआ
सुखप्राप्तःसुखं प्राप्तःसुख को प्राप्त
स्वर्गगतःस्वर्गं गतःस्वर्ग को गया हुआ

2. तृतीया तत्पुरुष (करण — से/द्वारा)

समस्त पदविग्रहअर्थ
शास्त्रकुशलःशास्त्रेण कुशलःशास्त्र से (में) कुशल
अकालमृत्युःअकालेन मृत्युःअकाल (असमय) से मृत्यु
धनहीनःधनेन हीनःधन से हीन

ध्यान दें: ‘शूलपाणिः’ (शूल हाथ में है जिसके) बहुव्रीहि है, तत्पुरुष नहीं, क्योंकि इसका अर्थ शिव की ओर संकेत करता है।

3. चतुर्थी तत्पुरुष (सम्प्रदान — के लिए)

समस्त पदविग्रहअर्थ
गुरुदक्षिणागुरवे दक्षिणागुरु के लिए दक्षिणा
देवबलिःदेवेभ्यः बलिःदेवों के लिए बलि
विद्यालयःविद्यायै आलयःविद्या के लिए आलय

4. पञ्चमी तत्पुरुष (अपादान — से)

समस्त पदविग्रहअर्थ
ऋणमुक्तःऋणात् मुक्तःऋण से मुक्त
पापभीतःपापात् भीतःपाप से भयभीत
धर्मच्युतःधर्मात् च्युतःधर्म से भ्रष्ट

5. षष्ठी तत्पुरुष (सम्बन्ध — का/की/के)

यह सबसे सामान्य प्रकार है:

समस्त पदविग्रहअर्थ
राजपुत्रःराज्ञः पुत्रःराजा का पुत्र
देवालयःदेवस्य आलयःदेव का आलय (मन्दिर)
गजराजःगजानां राजागजों का राजा
सेनापतिःसेनायाः पतिःसेना का पति

6. सप्तमी तत्पुरुष (अधिकरण — में)

समस्त पदविग्रहअर्थ
वनवासःवने वासःवन में वास
आत्मविश्वासःआत्मनि विश्वासःआत्म में विश्वास
कलाकुशलःकलायाम् कुशलःकला में कुशल

नञ् तत्पुरुष

जब पूर्वपद में ‘न’ (नञ्) = निषेधार्थक शब्द हो:

समस्त पदविग्रहअर्थ
अधर्मःन धर्मःधर्म नहीं
अन्यायःन न्यायःन्याय नहीं
अविद्यान विद्याविद्या नहीं (अज्ञान)
असत्यम्न सत्यम्सत्य नहीं (झूठ)

नियम: स्वर से शुरू होने वाले शब्दों से पहले अन् लगता है (अन् + अर्थ = अनर्थः), व्यञ्जन से पहले (अ + धर्म = अधर्मः)।

पहचान कैसे करें?

  1. उत्तरपद प्रधान है? → हाँ, तो तत्पुरुष हो सकता है
  2. विग्रह में कौन-सी विभक्ति आती है? → उसी विभक्ति का तत्पुरुष
  3. पूर्वपद में ‘अ/अन्’ (नकार) है? → नञ् तत्पुरुष

याद रखें

  1. तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान, पूर्वपद गौण (विशेषक)
  2. विग्रह में लुप्त विभक्ति से प्रकार की पहचान — द्वितीया से सप्तमी तक
  3. षष्ठी तत्पुरुष सबसे सामान्य है (राजपुत्रः, देवालयः)
  4. नञ् तत्पुरुष में ‘अ/अन्’ से निषेध अर्थ (अधर्म, अन्याय)
  5. बहुव्रीहि से सावधान — यदि अर्थ बाहरी व्यक्ति/वस्तु को सूचित करे तो तत्पुरुष नहीं है

अभ्यास

प्रश्न 1 / 70 सही

तत्पुरुष समास में कौन-सा पद प्रधान होता है?