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इस मॉड्यूल के पाठ

भाववाच्य — अकर्मक धातु

अनुमानित समय: 15 मिनट

भाववाच्य क्या है?

भाववाच्य (Impersonal Passive) संस्कृत का एक विशिष्ट वाच्य है जो अन्य भाषाओं में दुर्लभ है। यह अकर्मक (intransitive) धातुओं के साथ प्रयुक्त होता है।

तीनों वाच्यों की तुलना

वाच्यप्रधानकर्ताकर्मक्रिया
कर्तृवाच्यकर्ताप्रथमाद्वितीयाकर्ता के अनुसार
कर्मवाच्यकर्मतृतीयाप्रथमाकर्म के अनुसार
भाववाच्यभाव/क्रियातृतीयानहींसदैव प्र.पु.ए.

भाववाच्य की आवश्यकता क्यों?

अकर्मक धातु (जैसे गम्, हस्, स्था, शी) में कोई कर्म नहीं होता। तो कर्मवाच्य नहीं बन सकता — क्योंकि कर्म प्रथमा में लाने के लिए कोई कर्म ही नहीं है।

ऐसी धातुओं को passive बनाने के लिए भाववाच्य प्रयुक्त होता है।

उदाहरण

कर्तृवाच्य: सः गच्छति। (वह जाता है।)

भाववाच्य: तेन गम्यते। (उसके द्वारा जाया जाता है।)

तत्त्वविश्लेषण
तेनकर्ता, तृतीया एकवचन (उसके द्वारा)
गम्यतेगम् + य + ते — प्रथम पुरुष एकवचन

भाववाच्य के नियम

1. कर्ता सदैव तृतीया में

कर्तृवाच्यभाववाच्य
सः (प्रथमा)तेन (तृतीया)
तौ (प्रथमा, द्वि.)ताभ्याम् (तृतीया, द्वि.)
ते (प्रथमा, ब.)तैः (तृतीया, ब.)

2. क्रिया सदैव प्रथम पुरुष एकवचन

यह सबसे महत्त्वपूर्ण नियम है — चाहे कर्ता किसी भी वचन में हो, क्रिया सदैव एकवचन रहती है:

कर्तृवाच्यभाववाच्य
सः हसति (एक.)तेन हस्यते
तौ हसतः (द्वि.)ताभ्याम् हस्यते
ते हसन्ति (ब.)तैः हस्यते

ध्यान दें — तीनों में क्रिया हस्यते ही है!

3. कोई कर्म नहीं

भाववाच्य में कोई कर्म (object) नहीं होता। वाक्य में केवल कर्ता (तृतीया में) और क्रिया होती है।

क्रिया निर्माण — धातु + य + ते

कर्मवाच्य की तरह ही — धातु + य + आत्मनेपद प्रत्यय:

धातुअर्थभाववाच्य रूप
गम्जानागम्यते
हस्हँसनाहस्यते
स्थाखड़ा होनास्थीयते
आस्बैठनाआस्यते
शीसोनाशय्यते
जीव्जीनाजीव्यते
वस्रहनाउष्यते
नृत्नाचनानृत्यते

अधिक उदाहरण

कर्तृवाच्यभाववाच्यअनुवाद (भाववाच्य)
बालकः हसतिबालकेन हस्यतेबालक द्वारा हँसा जाता है
जनाः नृत्यन्तिजनैः नृत्यतेलोगों द्वारा नाचा जाता है
वयं तिष्ठामःअस्माभिः स्थीयतेहमारे द्वारा खड़ा रहा जाता है
त्वं वससित्वया उष्यतेतुम्हारे द्वारा रहा जाता है

भाववाच्य का प्रयोग

संस्कृत साहित्य में भाववाच्य विशेष अवसरों पर मिलता है:

  1. शास्त्रीय शैली — इह विश्राम्यते (यहाँ विश्राम किया जाता है)
  2. विवशता दर्शाने के लिए — तेन रुद्यते (उसके द्वारा रोया जाता है = वह विवश होकर रोता है)
  3. सामान्य कथन — अत्र गम्यते (यहाँ जाया जाता है)

याद रखें

  1. भाववाच्य = Impersonal Passive — केवल अकर्मक धातुओं के साथ
  2. कर्ता → तृतीया, कोई कर्म नहीं
  3. क्रिया = धातु + य + तेसदैव प्रथम पुरुष एकवचन
  4. कर्ता चाहे बहुवचन में हो, क्रिया एकवचन ही रहती है
  5. यह संस्कृत का विशिष्ट वाच्य है — अधिकांश भाषाओं में इसका समकक्ष नहीं है

अभ्यास

प्रश्न 1 / 70 सही

भाववाच्य किस प्रकार की धातुओं के साथ प्रयुक्त होता है?