हेतुवाचक — यतः, अतः
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हेतुवाचक वाक्य — कारण और फल
हेतुवाचक (causal) वाक्य कारण-फल (cause-effect) सम्बन्ध बताते हैं — “इसलिए…क्योंकि…”।
प्रमुख कारणवाचक शब्द
कारण बताने वाले (Cause)
| शब्द | अर्थ | स्थिति |
|---|---|---|
| यतः | क्योंकि/चूँकि | वाक्य के आरम्भ में |
| हि | क्योंकि/निश्चय ही | वाक्य में दूसरे स्थान पर |
| यस्मात् | जिस कारण से | वाक्य के आरम्भ में |
फल/निष्कर्ष बताने वाले (Effect)
| शब्द | अर्थ | स्थिति |
|---|---|---|
| अतः | इसलिए | वाक्य के आरम्भ में |
| तस्मात् | इसलिए/अतएव | वाक्य के आरम्भ में |
| ततः | तब/इसलिए | वाक्य के आरम्भ में |
1. यतः…अतः — मूल कारण-फल
यतः सः विद्वान् अस्ति, अतः सर्वैः पूज्यते।
अनुवाद: क्योंकि वह विद्वान् है, इसलिए सबके द्वारा पूजित होता है।
अधिक उदाहरण
| वाक्य | अनुवाद |
|---|---|
| यतः त्वं सत्यं वदसि अतः ते विश्वसिमि | क्योंकि तू सत्य बोलता है इसलिए तुझ पर विश्वास करता हूँ |
| यतः सः परिश्रमं करोति अतः सफलः भवति | क्योंकि वह परिश्रम करता है इसलिए सफल होता है |
| यतः मेघाः वर्षन्ति अतः शस्यानि वर्धन्ते | क्योंकि बादल बरसते हैं इसलिए फसलें बढ़ती हैं |
2. हि — कारण/बल
हि = क्योंकि / निश्चय ही (for/because/indeed)
विशेष नियम: ‘हि’ सदैव वाक्य में दूसरे स्थान पर आता है
विद्या हि धनं श्रेष्ठम्। (विद्या ही श्रेष्ठ धन है।)
अहिंसा हि परमो धर्मः। (अहिंसा ही परम धर्म है।)
गीता से उदाहरण
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। कर्मणि एव हि अधिकारः ते…
ज्ञानं हि ते अहं सविज्ञानम्… (गीता 7.2) ज्ञान निश्चय ही मैं तुझे बताऊँगा…
3. तस्मात् — निष्कर्ष
तस्मात् = इसलिए/अतएव (therefore) — वाक्य के अन्त में निष्कर्ष के लिए:
तस्मात् योगी भव अर्जुन। (गीता 6.46) इसलिए योगी बन, अर्जुन!
तस्मात् सर्वेषु कालेषु माम् अनुस्मर। (गीता 8.7) इसलिए सब समय मेरा स्मरण कर।
4. यस्मात्…तस्मात् — formal कारण-फल
यस्मात् त्वम् अपराधं कृतवान्, तस्मात् दण्डः ते भविष्यति।
अनुवाद: जिस कारण तूने अपराध किया है, इसलिए तुझे दण्ड होगा।
वाक्य-क्रम
| क्रम | उदाहरण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| कारण पहले | यतः सत्यं वदति अतः पूज्यते | सामान्य |
| फल पहले | सः पूज्यते यतः सत्यं वदति | भी सम्भव |
| हि — कारण बीच में | विद्या हि श्रेष्ठम् | हि सदैव दूसरे स्थान पर |
हेतुवाचक शब्दों की तुलना
| शब्द | प्रकार | शैली | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| यतः…अतः | कारण-फल युग्म | सामान्य | यतः वर्षा अतः सुभिक्षम् |
| हि | कारण/बल | शास्त्रीय/काव्य | विद्या हि धनम् |
| यस्मात्…तस्मात् | कारण-फल (formal) | शास्त्रीय | यस्मात् पापं तस्मात् दुःखम् |
| तस्मात् (अकेले) | निष्कर्ष | गीता-शैली | तस्मात् योगी भव |
याद रखें
- यतः…अतः = क्योंकि…इसलिए — सबसे सामान्य कारण-फल युग्म
- हि = क्योंकि/निश्चय ही — सदैव दूसरे स्थान पर
- तस्मात् = इसलिए — निष्कर्ष के लिए (गीता में बहुत प्रचलित)
- संस्कृत साहित्य में हि सबसे अधिक प्रयुक्त कारणवाचक शब्द है
- ये शब्द अव्यय हैं — इनका कोई रूप-परिवर्तन नहीं होता
अभ्यास
'यतः' का अर्थ क्या है?