समास-विग्रह अभ्यास
इस पाठ में हम सभी छह प्रकार के समासों का मिश्रित अभ्यास करेंगे। दो प्रकार के अभ्यास हैं:
- समस्त पद → समास पहचानो + विग्रह करो
- विग्रह → समस्त पद बनाओ
अभ्यास 1: समास पहचानो और विग्रह करो
| समस्त पद | समास | विग्रह |
|---|
| प्रतिदिनम् | अव्ययीभाव | दिनं दिनं प्रति (प्रतिदिन) |
| वनवासः | सप्तमी तत्पुरुष | वने वासः (वन में वास) |
| महाराजः | कर्मधारय | महान् राजा (महान् राजा) |
| त्रिभुवनम् | द्विगु | त्रयाणां भुवनानां समाहारः |
| हरिहरौ | इतरेतर द्वन्द्व | हरिः च हरः च |
| चक्रपाणिः | बहुव्रीहि | चक्रं पाणौ यस्य सः (विष्णु) |
| राजपुत्रः | षष्ठी तत्पुरुष | राज्ञः पुत्रः |
| अधर्मः | नञ् तत्पुरुष | न धर्मः |
| नीलोत्पलम् | कर्मधारय | नीलम् उत्पलम् |
| पञ्चतन्त्रम् | द्विगु | पञ्चानां तन्त्राणां समाहारः |
अभ्यास 2: विग्रह से समस्त पद बनाओ
| विग्रह | समस्त पद | समास |
|---|
| रामः च कृष्णः च | रामकृष्णौ | इतरेतर द्वन्द्व |
| विद्यायाः आलयः | विद्यालयः | षष्ठी तत्पुरुष |
| पीतम् अम्बरं यस्य सः | पीताम्बरः | बहुव्रीहि |
| शक्ति के अनुसार | यथाशक्ति | अव्ययीभाव |
| महान् पुरुषः | महापुरुषः | कर्मधारय |
| सप्तानां ऋषीणां समाहारः | सप्तर्षिः | द्विगु |
साहित्य से समास
संस्कृत साहित्य में समास बहुत प्रचलित हैं। कुछ प्रसिद्ध उदाहरण:
भगवद्गीता से
| शब्द | समास | विग्रह |
|---|
| धर्मक्षेत्रम् | षष्ठी तत्पुरुष | धर्मस्य क्षेत्रम् |
| कुरुक्षेत्रम् | षष्ठी तत्पुरुष | कुरूणां क्षेत्रम् |
| महाबाहो | बहुव्रीहि | महती बाहू यस्य सः |
| पुरुषोत्तमः | कर्मधारय | पुरुषेषु उत्तमः |
रामायण से
| शब्द | समास | विग्रह |
|---|
| दशरथः | बहुव्रीहि | दश रथाः यस्य सः |
| रघुवंशः | षष्ठी तत्पुरुष | रघोः वंशः |
| दशाननः | बहुव्रीहि | दश आननानि यस्य सः |
| सीतारामौ | इतरेतर द्वन्द्व | सीता च रामः च |
सामान्य शब्दावली
| शब्द | समास | विग्रह |
|---|
| विद्यालयः | षष्ठी तत्पुरुष | विद्यायाः आलयः |
| जन्मभूमिः | षष्ठी तत्पुरुष | जन्मनः भूमिः |
| अहोरात्रम् | समाहार द्वन्द्व | अहः च रात्रिः च |
| यथासमयम् | अव्ययीभाव | समयम् अनतिक्रम्य |
समास पहचानने की विधि — सारांश
| प्रश्न | उत्तर → समास |
|---|
| पूर्वपद अव्यय है? | → अव्ययीभाव |
| पूर्वपद संख्या है? | → द्विगु (समाहार अर्थ) या बहुव्रीहि (बाहरी अर्थ) |
| दोनों पद ‘और’ से जुड़े? | → द्वन्द्व |
| दोनों पद प्रथमा में? | → कर्मधारय (विशेषण-विशेष्य) |
| अर्थ बाहरी व्यक्ति/वस्तु? | → बहुव्रीहि |
| विभक्ति लुप्त, उत्तरपद प्रधान? | → तत्पुरुष (विभक्ति से उपप्रकार) |
याद रखें
- समास पहचानने के लिए पहले विग्रह करें
- विग्रह में विभक्ति/सम्बन्ध देखें → प्रकार निर्धारित होगा
- बहुव्रीहि सबसे भ्रामक — सदा पूछें “क्या अर्थ बाहर जा रहा है?”
- एक ही शब्द विभिन्न समास हो सकता है — सन्दर्भ से निर्णय करें
- अभ्यास से ही समास-ज्ञान दृढ़ होता है — साहित्य पढ़ते समय समास पहचानने का अभ्यास करें